गुजरात में उलेमा काउंसिल के रशादी ने मांगी मुसलमानों के लिए 17-18 सीटें

गुजरात , , मंगलवार , 07-11-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। गुजरात की राजनीति ‘धर्म और जाति’ से आगे नहीं निकल पा रही है तीन दिनों से अहमदाबाद में मौलाना आमिर रशादी अपने कुछ साथियों के साथ डेरा डाले हुए थे। रशादी मुस्लिम इलाकों में घूम-घूम कर गुजरात की राजनीति में मुसलमानों की समस्याओं और हिस्सेदारी जानने की कोशिश कर रहे थे गुजरात की राजनीति में अचानक मौलवी और मौलानाओं के मुस्लिमों के साथ संवाद से कांग्रेस की चिंता बढ़ गयी। लिहाजा उसकी मुस्लिम लीडरशिप भी जाग गई पार्टी के बचाव में कांग्रेसी मुस्लिम भी गली मोहल्लों में घूम-घूम कर कहने लगे कि ये लोग बीजेपी के निमंत्रण पर गुजरात के मुसलमानों को भ्रमित करने आये हैं। इसका नतीजा ये हुआ कि मुसलमानों के मोहल्ले जो चुनावी माहौल से वंचित थे वहां भी चुनावी माहौल खड़ा हो गया। 

मौलाना आमिर रशादी ने अहमदाबाद के कैम्बे होटल में प्रेस वार्ता कर मीडिया को बताया कि हम लोग विकास के उस मॉडल को देखने आये थे जिसके नाम पर पूरे देश को ठग लिया गया। गुजरात में ऐसा कुछ अलग नहीं है जो लखनऊ, मुंबई या दिल्ली में न हो। सबका साथ सबका विकास की बात की गई। परन्तु मोदीजी को 2014 में मुसलमानों का साथ मिला लेकिन मुसलमानों को विकास से दूर रखा गया। देश की जनता को गौ रक्षा, तीन तलाक, लव जिहाद में उलझा कर रखा गया है। गुजरात की राजनीति हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश के इर्द-गिर्द घूम रही है। राहुल मंदिर-मन्दिर घूम रहे हैं लेकिन किसी मस्जिद के इमाम से नहीं मिलते। 70 वर्षों तक कांग्रेस मुस्लिमों के वोट से सत्ता में बनी रही अब मुसलमान कांग्रेस को अछूत मान रहे हैं। मौलाना रशादी ने कांग्रेस पार्टी से गुजरात में मुसलमानों की जनसंख्या के अनुपात में 17-18 सीटों की मांग की है। मौलाना ने कहा कि यदि बीजेपी हमारी मांग मानकर मुसलमानों को 18 सीट दे देती है तो मुसलमान बीजेपी को भी वोट दे सकते हैं यदि दोनों पार्टियां हमारी मांगों को नहीं मानती हैं तो हम तीसरे विकल्प के तौर अपने उम्मीदवार उतारेंगे। मौलाना ने एक प्रश्न के जवाब में शंकर सिंह वाघेला की जनविकल्प पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने की तैयारी की बात भी बताई। 

मौलाना रशादी ने कांग्रेस और बीजेपी को तीन दिन में विचार कर मुसलमानों की सत्ता में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने को कहा है। यदि गुजरात की दोनों बड़ी पार्टियां मुसलमानों के प्रति पालिसी और टिकट में भागेदारी को लेकर अपना सही फैसला नहीं लेती हैं तो हम लोग गुजरात में मुसलमानों और अन्य वंचित समाज के हक की लड़ाई लड़ेंगे और उसके लिए फिर राज्यव्यापी बड़ा आन्दोलन होगा। 

मौलाना आमिर रशादी दिल्ली बटला हाउस कथित मुठभेड़ के बाद चर्चे में आये थे। 2008 में बटला हाउस एनकाउंटर के बाद आज़मगढ़ से दिल्ली हजारों की संख्या में ट्रेन से पहुंचकर मौलाना रशादी ने दिल्ली के जंतर मन्तर पर प्रदर्शन किया था। यही नहीं लखनऊ में भी हजारों लोगों के साथ समाजवादी पार्टी का घेराव किया था। आज़मगढ़ में हुए इस आन्दोलन के बाद राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल नाम से राजनैतिक दल का गठन कर 2009 में लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। कट्टर छवि के कारण रशादी विवादों में रहते हैं गुजरात की राजनीति में उलेमा काउंसिल के प्रवेश से बीजेपी को फ़ायदा होगा। परन्तु इनके प्रवेश से कांग्रेस के उन मुस्लिम नेताओं को भी अहमियत मिलने लगी है जो हाशिये पर धकेल दिए गए थे।  










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imtiyaz.vora :: - 11-10-2017
Inko gujarat ke musalmano ki cheenta karneki jarurat nahI. Yahaka Muslim aapki chalbazi ko samjta he aap yaha gujarat me bjp ki madad karne aaye ho