गुजरात: लोकसभा चुनाव के केंद्र में हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश

गुजरात , , रविवार , 10-03-2019


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद: चुनाव  की घोषणा होने और आदर्श आचार संहिता लगने के कुछ घंटे ही शेष रह गए हैं। लेकिन गुजरात की राजनीति में शाह- मात  और दल बदलने का खेल आरंभ हो चुका है। इस खेल में दूसरे दल के नेताओं को मंत्री बनाया जा रहा है। शनिवार को मड़ावदर से तीन टर्म से कांग्रेस पार्टी के विधायक अब पूर्व विधायक जवाहर चावड़ा ने बीजेपी शासित गुजरात सरकार में कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री की उपस्थिति में चावड़ा के अलावा कांग्रेस के ही जामनगर उत्तर के विधायक धर्मेंद्र सिंह जडेजा को राज्य मंत्री की शपथ दिलाई। इससे पहले कोली समाज के कद्दावर नेता कुंवर जी बावलिया को भी मंत्री बनाया गया था। कांग्रेस नेताओं को दल बदल करवाकर मंत्री बनाये जाने के इस सिलसिले पर बीजेपी नेताओं का कहना है कि, “मंत्री बनने के लिए बीजेपी से नहीं बल्कि कांग्रेस से चुनाव जीतना पड़ता है,भाजपा विधायकों मंजीरा बजाओ।”

दलबदल की घटना पर सोशल मीडिया में चुटकुले

दल बदल और मंत्री बनने की घटना सोशल मीडिया में खूब छायी है। लोग बीजेपी विधायकों और नेताओं का मज़ाक उड़ा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- 

“तू कांग्रेस मुखालिफ होने का दावा न कर ऐ भक्त

हमने तुम्हें बिके हुए कांग्रेसियों के लिए कुर्सी साफ करते देखा है।”

“मालामाल बनने का आफर कांग्रेस से विधायक बनो फिर भाजपा में मंत्री बन मालामाल हो जाएं।”

“कांग्रेसवाले भाजपा में मेवा खाएं और भाजपा वाले जूट भाजपा है तो मुमकिन है” इत्यादि।

कांग्रेस के विधायकों को मंत्री बनाने पर बीजेपी में आक्रोश

शनिवार को एक तरफ राजभवन में पैराशूट नेताओं को शपथ दिलाई जा रही थी तो दूसरी तरफ बीजेपी के सीनियर विधायक कनु पटेल और केशु नाकर्णी सहित कई विधायक  अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर नाराज़गी व्यक्त की। इन्हें मनाने के लिए संसदीय सचिव बनाने का गाजर लटकाया गया जो अभी तक मिला नहीं है। 

जामनगर से हार्दिक को रोकने के लिए बीजेपी की रणनीति  

जामनगर से आरसी फरदु पहले से ही कैबिनेट मंत्री हैं। और जामनगर से ही दो अन्य को मंत्री बनाने का मुख्य कारण हार्दिक पटेल हैं। सूत्रों के अनुसार हार्दिक पटेल को कांग्रेस क्रिकेटर रविन्द्र जडेजा की पत्नी रीवाबा जडेजा (बीजेपी उम्मीदवार) के खिलाफ चुनाव लड़ाने की तैयारी चल रही है। बीजेपी हार्दिक के खिलाफ क्षत्रिय और कोली समाज के मतों के ध्रुवीकरण की रणनीति बना रही है। 2014 में बीजेपी से पूनम मॉडम अपने ही चाचा विक्रम मॉडम के खिलाफ चुनाव जीतीं थीं। जामनगर में मॉडम परिवार का दबदबा है। कांग्रेस भी अहीर और पाटीदार वोटों का ध्रुवीकरण कर सकती है। कांग्रेस को मुस्लिम वोट बोनस में मिल जाएंगे।

अल्पेश के बीजेपी में शामिल की अटकलों पर पूर्णविराम

पिछले एक सप्ताह से इन विधायकों के साथ अल्पेश ठाकोर के भी बीजेपी में जाने की अटकलें चल रही थी। परंतु शनिवार को ठाकोर दिल्ली से लौटकर प्रेस वार्ता कर साफ कर दिया कि वह कांग्रेस में ही रहेंगे। ठाकोर ने कहा, “हां मैं बीजेपी के संपर्क में था, ऑफर भी मिला था किसे सत्ता अच्छी नहीं लगती। लेकिन फिर भी मैं सत्ता के बजाय संघर्ष को चुना। कांग्रेस में रहकर संघर्ष करूंगा।” जानकर बता रहे हैं कि बीजेपी ने खुद ठाकोर को लेने से इनकार कर दिया क्योंकि बीजेपी को ठाकोर से लाभ काम हानि अधिक होती। ठाकोर के आने से पाटीदार वोटरों का कांग्रेस की तरफ खिसकने का खतरा था। अनुमान यह भी है अल्पेश ठाकोर खुद बीजेपी में जाने की अफवाह उड़ाई हो ताकि लोकसभा चुनाव से पहले कंग्रेस से सौदेबाज़ी हो सके।

क्या हार्दिक कांग्रेस में शामिल होंगे   

हार्दिक पटेल का कांग्रेस में शामिल होने और जामनगर से लोकसभा चुनाव लड़ना लगभग तय हो चुका है। हार्दिक के खुलकर कांग्रेस में चले जाने से कांग्रेस को सौराष्ट्र और मेहसाणा जैसी सीटों पर लाभ हो सकता है। पिछले कुछ समय से हार्दिक अपने आप को पाटीदार के साथ साथ किसान नेता भी बता रहे हैं। विधानसभा चुनाव में गुजरात के किसानों ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया था। बीजेपी को सौराष्ट्र से केवल 20 सीटें मिल पाई थी। जिसमें से 7 को मंत्री भी बनाया है। हार्दिक के कारण सौराष्ट्र की लड़ाई रोचक होगी। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव लालजी देसाई ने जनचौक को बताया “12 मार्च को कार्यकारणी मीटिंग है। दांडी मार्च को याद करते हुए मीटिंग के अलावा गांधी आश्रम में प्रार्थना कार्यक्रम रखा गया है। शहीदों को याद करने के अलावा मीटिंग में पालिसी पर चर्चा होगी। लेकिन अभी तक हार्दिक पटेल के पार्टी में शामिल होने की हमें आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं है। यह केवल मीडिया में चल रहा है।” एक अन्य वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हार्दिक के कांग्रेस में शामिल होने की पूरी संभावना है और जामनगर से चुनाव भी लड़ेंगे।

जिग्नेश मेवानी का कच्छ से चुनाव लड़ने का अफवाह 

2017 गुजरात विधानसभा का चुनाव अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवानी और हार्दिक पटेल के इर्द गिर्द लड़ गया था। इनके कारण राज्य में जातियों का दखल बढ़ा और राहुल गांधी स्टार प्रचारक बन गए। अब स्थानीय मीडिया में जिग्नेश मेवानी के कच्छ (सुरक्षित) सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। परंतु मेवानी खुद इस संभावना से इनकार कर चुके हैं। कांग्रेस के पास कोई मज़बूत दलित चेहरा न होने के कारण मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं। वाम विचारों वाले मेवानी कांग्रेस पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़ें यह संभावना कम है। लालजी देसाई ने जनचौक को बताया कि, “मेरी कल जिग्नेश से बात हुई थी वह खुद लोकसभा चुनाव लड़ना नहीं चाहते हैं।इसलिए मीडिया में चल रही इस खबर का कोई अर्थ नहीं है।”



 








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