यूपी के हिंडाल्को में बदली श्रमिकों की हालत बदतर, वर्कर्स फ्रंट ने सीएम से लगायी गुहार

उत्तर प्रदेश , सोनभद्र, शुक्रवार , 19-01-2018


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जनचौक ब्यूरो

सोनभद्र। यूपी वर्कर्स फ्रंट ने हिण्डालको में कार्यरत बदली कर्मचारियों की प्रथा को अवैध बताया है। साथ ही इस पर तत्काल रोक लगाकर उन्हें स्थाई करने की मांग की है। इसके अलावा संगठन ने काम से निकाले गए 30 बदली श्रमिकों को तत्काल पुनर्बहाल करने की बात कही है। इस सिलसिले में संगठन ने यूपी के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। 

पत्र में कहा गया है कि हिण्डालको इण्डस्ट्रीज लिमिटेड की संविदा में बदली श्रमिक को परिभाषित किया गया है। जिसमें बताया गया है कि स्थायी श्रमिकों के अवकाश या फिर उनकी गैरमौजूदगी में जिन लोगों को काम पर रखा जाएगा उनको बदली श्रमिक कहा जाएगा। और उनका नाम रजिस्टर में बाकायदा बदली श्रमिक के तौर पर दर्ज होगा। फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने बताया कि रेनूकूट स्थित हिण्डाल्को कंपनी में इस तरह से पिछले 10 सालों से बदली श्रमिकों से काम लिया जा रहा है। और उसमें से कुछ बदली श्रमिक के बतौर पूरी जिन्दगी नियोजित रहते हैं और इसी पद पर सेवानिवृत्त तक हो जाते हैं। लेकिन उन्हें स्थायी नहीं किया जाता है। 

कई बार इस अवैधानिक कार्रवाई के खिलाफ अपनी न्यायोचित बात कहने पर प्रबन्धन श्रमिकों को काम से हटा देता है। हालत इतने बुरे हैं कि प्रबंधन द्वारा 21100 रुपये मूल वेतन हासिल करने वाले बदली श्रमिकों को स्थाई करने की स्थिति में महज 4000 रुपये के मूल वेतन पर कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता है। जबकि मान्यता प्राप्त यूनियनों द्वारा प्रबन्धन के साथ किए गए समझौते में ये बात बिल्कुल साफ तौर पर कही गयी है कि ऐसे अस्थाई बदली श्रमिक जो पूर्व से इस ग्रेड के न्यूनतम वेतनमान से अधिक मूल वेतन प्राप्त कर रहे हैं। वे श्रमिक उसी वेतनमान एवं अन्य लाभों को प्राप्त करते रहेंगे। 

छंटनी किए गए श्रमिकों से भी प्रबन्धन उपश्रमायुक्त के यहां हुई वार्ताओं में बहुत कम वेतनमान पर ट्रेनी के रूप में कार्य पर नियोजित करने का प्रस्ताव रखता रहा। प्रबन्धन का यह प्रस्ताव समझौते और श्रम कानूनों के विरुद्ध जाता है। लेकिन उपश्रमायुक्त पिपरी ने प्रबन्धन के इस अवैधानिक प्रस्ताव पर कार्यवाही करने की जगह वार्ता समाप्त कर दी। और शासन, प्रशासन व श्रमायुक्त को पत्र लिखकर वार्ता समाप्ति की सूचना भेज दी। 

मौजूदा समय में प्रशासन व प्रबंधन के संवेदनहीन रवैये के कारण छंटनी किए गए श्रमिक और उनके परिवार भुखमरी की हालत में पहुंच गए हैं। इसमें से एक श्रमिक जसवीर सिंह की पत्नी दर्शन कौर की इलाज के अभाव में मृत्यु हो चुकी है। और संतोष यादव एवं शिवपूजन यादव की पत्नी का मानसिक संतुलन खराब हो चुका है। जिनका इलाज पैसे के अभाव में नहीं हो पा रहा है। 






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