हरियाणा में बरप रहा है सरकार का कहर, निशाने पर दलित और आरटीआई कार्यकर्ता

हरियाणा , , मंगलवार , 13-03-2018


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उदय चे

हरियाणा सरकार सामाजिक एवं सूचना का अधिकार (आरटीआई )के कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमों में नामजद कर जेल में डाल रही है। राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को तंग करने का षड्यंत्र रचती रहती है। ताजा मामला कैथल जिले के बालू गांव का है।

पुलिस आरटीआई कार्यकर्ता संजीव का एनकाउंटर करने या झूठे मुकदमे लादकर जेल में डालना चाहती है। इसी मंशा से कल बालू गांव की दलित बस्ती में सादी वर्दी में आई पुलिस संजीव को घसीटते हुए गाड़ी में लाद ले गयी। बस्ती के आदमी और महिलाएं जब संजीव को उठाने का कारण पूछे तो पुलिस ने गाली देते हुए सब को भगा दिया। पुलिस के पास संजीव के खिलाफ कोई गिरफ्तारी का वारंट नहीं था। ऐसे में संजीव के फर्जी एनकाउंटर करने की आशंका है। 

इससे पहले भी बालू गांव के ही दलित आरटीआई कार्यकर्ता शिव कुमार बाबड़ को हरियाणा पुलिस डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम के कारण हुए दंगो में आरोपी बना कर देशद्रोह की धारा लगाकर जेल में डाल चुकी है। जबकि सच्चाई यह है कि शिव कुमार बाबड़ का इस मामले से कुछ लेना देना नहीं है। वह राम रहीम के खिलाफ ही रहा है।

दरअसल संजीव ,शिव कुमार और उसके साथी सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ ही दलित जाति से हैं। संजीव जैसे लोग हरियाणा में सवर्ण उत्पीड़न के खिलाफ लंबे समय से दलितों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं की आवाज बुलंद करते रहे हैं। इस प्रक्रिया में वे समय-समय पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ भी आवाज उठाते हैं। 

बालू गांव की घटना सामंती तत्वों द्वारा नियम-कानून की धज्जियां उड़ाने की कहानी है। इस बार पंचायत चुनाव में हरियाणा सरकार ने सरपंच पद के लिए 10 वीं पास होने की योग्यता अनिवार्य बनाया था।

बालू गांव के निर्वाचित सरपंच ने 10वीं पास का जो प्रमाण पत्र जिला निर्वाचन अधिकारी को दिया है वह फर्जी है। सरपंच ने शिक्षा बोर्ड से फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र बनवा कर दाखिल कर दिया था। फर्जी प्रमाणपत्र की जानकारी होने पर संजीव और उसके साथियों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई।

सरपंच पर झूठे प्रमाण पत्र के आधार पर निर्वाचन आयोग को गुमराह करने का मामला उठाया। कैथल जिला प्रशासन ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर सरपंच बन बैठे आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए संजीव की ही जान लेने पर तुली है। 

जाट जाति के सरपंच ने 1मई 2017 को सैकड़ों लोगों के साथ संजीव पर उनके घर में घुस कर जानलेवा हमला किया, पूरी दलित बस्ती में तोड़फोड़ की, महिलाओं, बुजुर्गों से मारपीट की गई और जातिसूचक गालियां दी गयीं। इस हमले में संजीव की जान तो बच गयी लेकिन संजीव का हाथ तोड़ दिया गया। 

जब इस मामले की पुलिस में शिकायत की गई तो पुलिस सरपंच को गिरफ्तार करने की बजाए उसके पक्ष में खड़ी है। संजीव के दूसरे साथी शिवकुमार को दलितों-महिलाओं के पक्ष में आवाज उठाने पर पहले तो भैंस चोरी का आरोप लगाकर फर्जी मुकदमा बनाया। बाद में रामरहीम का समर्थक बताकर दंगे भड़काने और देशद्रोह का मुकदमा लगाकर जेल में ठूस दिया।  






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