सोनीपत में भी बवाना दोहराया गया;फैक्ट्री में आग,तीन मरे

हरियाणा , , मंगलवार , 20-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली/सोनीपत। सोनीपत के राई औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पेंट फैक्ट्री में रविवार सुबह को लगी आग में कई मजदूरों के जल कर मरने की आशंका है। घटना के तीन दिन बाद भी मृतकों की सही संख्या सामने नहीं आ पाई है। पुलिस-प्रशासन मृतकों और गायब मजदूरों सही संख्या बताने से कतरा रहा है। फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर तो काबू पा लिया गया है। लेकिन आग में जिंदा जले मजदूरों के परिजन अब पेट की आग में जलने को मजबूर है। शासन-प्रशासन ने मृतक और गायब मजदूरों के राहत के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है। पुलिस मृतकों की संख्या तीन बता रही है। मजदूर संगठन ‘एक्टू’ दिल्ली की सचिव श्वेता राज कहती हैं-

‘‘जब फैक्ट्री में आग लगी उस समय उसमें लगभग बीस मजदूर थे। आग लगने के समय फैक्ट्री का दरवाजा बंद था जिसके कारण 6-7 मजदूर छत से कूद कर अपनी जान बचाने में सफल रहे। लेकिन वे सब गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।’’ 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मृतकों की संख्या अधिक है। फैक्ट्री से अभी तक सिर्फ तीन लाशें निकली हैं। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फैक्ट्री के अंदर से लाशों के अलावा हड्डियां भी निकली हैं। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि चारों तरफ से फैक्ट्री बंद होने के कारण कई मजदूरों के जलने की संभावना है।    

मजदूर नेता श्वेता राज कहती हैं कि आग लगने के बाद से ही फैक्ट्री मालिक गायब है। फैक्ट्री में श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। श्रम कानूनों के मुताबिक किसी भी फैक्ट्री में निकलने के लिए कम से कम तीन दरवाजे होने चाहिए। लेकिन इस फैक्ट्री में एक ही दरवाजा था वो भी बंद था।

दरअसल, सोनीपत के राई इंडस्ट्रियल एरिया में प्लॉट नंबर 291, 92 और 93 में पेंट की फैक्ट्री है। जिसका मालिक दिल्ली रहता है। फैक्ट्री की छत पर रहने के लिए कुछ कमरे बनाए गए थे। इनमें सिक्युरिटी और फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर परिवार के साथ रहते थे। रविवार सुबह अचानक फैक्ट्री में आग लगने से कई लोग अंदर फंसे रह गए। सूचना के मुताबिक अधिकांश मजदूर बिहार के मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के रहने वाले बताए जा रहे हैं लेकिन उनकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। 

सोनीपत गयी एक्टू की जांच टीम के सदस्य अभिषेक कहते हैं कि फैक्ट्री में सुरक्षा एवं श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। मजदूरों को 6 हजार और महिला मजदूरों को दो हजार महीने वेतन दिया जाता था। 

एक्टू जांच टीम का कहना है कि घटना के बाद वहां भय का माहौल है। पुलिस-प्रशासन के अलावा स्थनीय लोग भी अपनी जुबान नहीं खोल रहे हैं। श्वेता कहती हैं कि दिल्ली के बवाना में हुई आगजनी की तरह ही यह घटना भी भयावह थी।  तहसीलदार व डीएसपी कहते हैं कि घटना की जांच की जा रही है। लेकिन अभी तक फैक्ट्री मालिक पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। ’ऐक्टू’ जांच दल में साथ गए अभिषेक, अजय, प्रेमपाल  चैटेला व श्वेता ने राई औद्योगिक क्षेत्र का दौरा करने के बाद कहा कि ’बवाना’ फैक्ट्री की आगजनी की घटना के बाद दो महीने के अंदर ये दूसरी घटना है। पूरे देश में मजदूरों के हितों की रक्षा के बजाए उनके अधिकारों पर कुठाराघात किया जा रहा है। 

 

 










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