भूख से हो रही मौतें नहीं कारपोरेट का मुनाफा है रघुवर के एजेंडे में

झारखंड , , बुधवार , 01-11-2017


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राम कुमार

झारखंड सरकार कभी पूरे नहीं होने वाले सपने दिखाने में दक्ष हो चुकी है। झारखंड में निवेशकों को लाने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास न केवल बेचैन दिख रहे हैं बल्कि झारखंडी जनता के साथ-साथ निवेशकों के सामने झारखंड की मनगढ़ंत कहानी गढ़ रहे हैं। विकास के नाम पर यहां के आदिवासी और मूलवासियों को उजाड़ने की नीति पर लगातार सक्रिय हैं, जिसका लगातार विरोध भी तेज है। राज्य में पूंजी निवेश की नीति के तहत राज्य सरकार ने पहले मोमेंटम झारखंड का आयोजन किया फिर मुख्यमंत्री का जापान दौरा और अब राजधानी रांची में तीन दिवसीय माइनिंग शो का आयोजन हो रहा है। इन कार्यक्रमों के जरिये सरकार जनता के खून-पसीने की कमाई को धड़ल्ले से उड़ा रही है। माइनिंग शो का आज समापन हो गया। जिसमें बड़े-बड़े दावे किए गए। 

तीस अक्तूबर से एक नवंबर तक आयोजित माइनिंग शो का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि पूंजीपतियों की पूंजी झारखंड में सुरक्षित है। देश के विकास में झारखंड का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि कृषि के भरोसे बेरोजगारी दूर नहीं होगी। कोयला उत्पादन में हमारा राज्य दूसरा और लौह अयस्क में तीसरा स्थान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुजरात के बाद विकास में झारखंड का दूसरा स्थान है। साथ ही दावा किया कि निवेशक अपनी समस्या सरकार को बताएं 24 घंटे के भीतर समाधान किया जायेगा। दूसरी और हकीकत यह है कि देश में आर्थिक भूमिका अदा करने और कभी काले हीरे की मंडी के रूप में विश्वविख्यात धनबाद स्थित झरिया के साढ़े पांच लाख बाशिंदे दहशत में जीने को विवश है। यहां धरती के नीचे भीषण आग तेजी से विकराल रुप धारण करती जा रही है। केंद्र और राज्य सरकारें आग बुझाने में अब तक नाकाम रही हैं। 

दरअसल झरिया और उसके आस-पास के बीस वर्ग किलोमीटर में फैला क्षेत्र आग की चपेट में है। एक अऩुमान के मुताबिक 42 मिलियन टन से भी अधिक कोयला इस आग में खाक हो चुका है और लगातार जलता ही जा रहा है। जबकि आग बुझाने के नाम पर अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि सरकार के पास यह आंकड़ा भी नहीं है कि झरिया समेत कोयलांचल क्षेत्र के धरती के भीतर कितनी आग फैली हुई है। अब इस माइनिंग शो में सरकार का दावा है कि बंद खदानों में जमा पानी के इस्तेमाल के लिए सीसीएल के साथ एमओयू  किया गया है। बताते चलें कि राज्य में लौह अयस्क की खदानें पश्चिम सिंहभूम के नोवामुंमडी और मनोहर पुर प्रखंड में है। यहां रहने वाले आदिवासियों की हालत नारकीय बनी हुई है। लोग पलायन कर रहे हैं। बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। 

आम लोग दवा के बगैर दम तोड़ रहे हैं। पिछले तीन सालों से यहां के अधिकांश लौह अयस्क की खदानें बंद पड़ी हैं। नोवामुंडी में टाटा, गुवा मैंसेल औऱ बड़ा जामदा में ऊषा मार्टिन की खदानें चल रही हैं। खबर है कि पिछले महीने बड़ा जामदा में तीन छोटी खदानें बड़ी जद्दोजहद के बाद खुली हैं। लौह अयस्क में अरबों रुपये के घोटाले का मामला लंबित है। “शाह कमीशन” की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा पहले ही हो चुका है। लेकिन कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। झारखंड सरकार इस साल करोड़ों रुपये खर्च कर 16-17 फरवरी में मोमेंटम झारखंड का आयोजन कर 210 देशी-विदेशी कंपनियों के साथ उद्योग लगाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुकी है। जिसमें चार लाख हजार करोड़ रुपये निवेश का दावा किया गया। देश- विदेश में इसको लेकर रोड शो किये गये। लेकिन अभी तक निवेश नहीं हुआ। पिछले अक्तूबर माह में मुख्यमंत्री का जापान दौरा हुआ और दावा किया गया कि वहां से बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश झारखंड में होगा। 

 

  • झारखंड के भीतर के उद्योगों की हालत खस्ता
  • संसाधनों की हो रही है खुली लूट

 

बाहर से पूंजी निवेश के लिए निवेशकों को लाने के लिए सरकार की बेचैनी देखते ही बनती है लेकिन झारखंड के भीतर लगे उद्योगों की हालत जर्जर है। उस पर सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी दे रही है। मुख्यमंत्री रघुवर दास का विधानसभा क्षेत्र में विश्वविख्यात केबल कंपनी वर्षों से बंद पड़ी है। एशिया विख्यात आदित्यपुर स्माल इंडस्ट्रीज की हालत खराब है। माह भर पहले टायों कंपनी बंद हो गयी। हजारों मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं। स्पंज कारखाना राज्य में दम तोड़ रहा है। रोलिंग मिल की हालत खस्ता है। लेकिन सरकार को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर प्रसाद का आरोप है कि झारखंड की संपदा व संसाधन को लूटने और यहां के धरतीपुत्रों को उजाड़ने की नीति पर सरकार काम कर रही है।

(राम कुमार लेखक-पत्रकार हैं और आजकल रांची में रहते हैं।)










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