बोल्शेविक क्रांति शताब्दी समारोह : क्रांतिकारी ताकतों को एक मंच पर लाने का प्रयास

झारखंड , रांची, बुधवार , 01-11-2017


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रूपेश कुमार सिंह

रांची। 7 नवंबर 2017 को ‘महान बोल्शेविक क्रांति’ की जीत की सौवीं वर्षगांठ है। 7 नवंबर 1917 (पुराने कैलेंडर के अनुसार 25 अक्टूबर) को ही रूस में बोल्शेविक क्रांति घटित हुई थी, जिसने समूची दुनिया को हिला दिया था और मानव इतिहास के एक नये युग का आरंभ किया था।

 

  • झारखंड में 16 जगह शताब्दी समारोह का आयोजन
  • 7 नवंबर से 30 नवंबर तक होंगे कार्यक्रम
  • 13 जनसंगठन कार्यक्रम समिति में शामिल 
  • बच्चा सिंह संयोजक और दामोदर तुरी सह-संयोजक बनाए गए
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कार्यक्रम का पोस्टर।

बोल्शेविक क्रांति

“7 नवंबर 1917 के बाद दुनिया वैसी नहीं रह गयी थी जैसे उसके पहले थी और बोल्शेविक क्रांति के बाद साल दर साल दुनिया इतने आमूल-चूल परिवर्तनों से गुजरी, जितना कि शायद ही मानव इतिहास में कभी हुआ हो। कहा जा सकता है कि बोल्शेविक क्रांति की तोपों के धमाके पूरी दुनिया में गूंज उठे। इससे केवल रूस में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में चल रहे वर्ग संघर्षों को एक नयी गति व ऊर्जा मिली। 

इस क्रांति ने पूंजीवादियों और सामंतों के नियंत्रणाधीन मजबूत रूसी राजसत्ता को सशस्त्र बगावत के जरिये ध्वस्त किया और कामरेड लेनिन व कामरेड स्तालिन के नेतृत्व में पहली बार मजदूर वर्ग व मेहनतकश जनता का एक नया राज्य स्थापित किया। 

मानव जाति के इतिहास में पहली बार किसी देश में ऐसा शासन कायम हुआ, जिसके मालिक मजदूर-किसान थे। इसने समाजवाद के निर्माण का काम हाथ में लिया और एक समाजवादी व्यवस्था की नींव रखकर साम्यवाद की तरफ आगे बढ़ने का रास्ता खोल दिया। 

हमें यह कदापि नहीं भूलना होगा कि रूस की महान बोल्शेविक क्रांति का मार्गदर्शक था, मार्क्सवाद की सही सर्वहारा विचारधारा और एक सही सर्वहारा क्रांतिकारी पार्टी। इसने सही रणनीति व कार्यनीति तथा पार्टी व देश के अंदर पनपे दक्षिणपंथी व ‘वाम अवसरवाद’ के खिलाफ निरंतर संघर्ष का रास्ता अपनाया, फलस्वरूप 7 नवंबर 1917 को महान समाजवादी क्रांति में जीत हासिल करने में सफल रहा।’’ (महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह समिति, झारखण्ड के पर्चे से)

 

  • मुख्य नारे
  • “ब्राह्मणवादी हिन्दुत्व फासीवादी हमले का मुंहतोड़ जवाब दें” 
  • “मजदूरों-किसानों का राज स्थापित करने के लिए आगे बढ़ें”

‘महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह को 7 नवंबर से 30 नवंबर, 2017 तक क्रांतिकारी उत्साह व पूरे जोश-खरोश के साथ मनाएं’ एवं ‘देश में बढ़ रहे ब्राह्मणवादी हिन्दुत्व फासीवादी हमले का मुंहतोड़ जवाब दें और मजदूरों-किसानों का राज स्थापित करने के लिए आगे बढ़ें’,  इन दो केन्द्रीय नारों के साथ पूरे झारखंड में 16 जगहों पर बोल्शेविक क्रांति का शताब्दी समारोह मनाया जाएगा। 

झारखंड में 16 जगह मनाया जाएगा बोल्शेविक क्रांति का शताब्दी समारोह।

समारोह समिति 

ये तमाम आयोजन ‘महान बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह समिति, झारखण्ड’ के बैनर तले किए जाएंगे, जिसका गठन झारखंड के बोकारो थर्मल में 3 अक्टूबर, 2017 को 13 जनसंगठनों की संयुक्त बैठक में किया गया था। ये 13 जनसंगठन हैं- मजदूर संगठन समिति (झारखंड), मेहनतकश महिला संघर्ष समिति (बोकारो), आदिवासी-मूलवासी अधिकार मंच (बोकारो), तेनुघाट विस्थापित बेरोजगार संघर्ष समिति (ललपनिया, बोकारो), आदिवासी-मूलवासी विकास मंच (बोकारो), उलगुलान बेरोजगार मंच (गिरिडीह), भारतीय आदिम जनजाति परिषद् (गढ़वा), भारतीय भूईयां विकास परिषद् (गढ़वा), भारतीय आदिवासी विकास परिषद् (गढ़वा), जल-जंगल-जमीन रक्षा समिति (दुमका), जन-जागरण वनाधिकार संघर्ष समिति (गुमला व सिमडेगा), भारत नौजवान सभा (गिरिडीह) एवं महिला उलगुलान संघ (रांची)। इसी बैठक में समारोह समिति का संयोजक मजदूर संगठन समिति के केंद्रीय महासचिव बच्चा सिंह को व विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के नेता दामोदर तुरी को सह-संयोजक बनाया गया।

कार्यक्रम का मकसद

समारोह के संयोजक व सह-संयोजक ने बताया कि ‘‘ बोल्शेविक क्रांति की सौवीं वर्षगांठ को पूरे विश्व की क्रांतिकारी ताकतें मना रही हैं, इसी कड़ी में झारखंड की क्रांतिकारी ताकतों को भी एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। इस कार्यक्रम की तैयारी व बोल्शेविक क्रांति की मूल बातों के प्रचार-प्रसार के लिये 50 हजार पर्चे, 30 हजार पोस्टर व हजारों बैनर तैयार करवाए गए हैं। झारखंड के गांवों, कस्बों व शहरों में पर्चे बांटे जा रहे हैं, पोस्टर चिपकाये जा रहे हैं व बैनर लगाये जा रहे हैं। हमलोग इन समारोहों को भी गांवों, कस्बों व शहरों यानी गांव से लेकर राजधानी तक मनाएंगे और अपने देश की परिस्थिति के अनुसार व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई को और भी तेज करने का आह्वान करेंगे, ताकि हमारे देश में भी एक शोषणविहीन समाज की स्थापना हो सके।’’

7 से 30 नवंबर तक कार्यक्रम

संयोजक, सह-संयोजक ने बताया कि ‘‘7 नवंबर को गिरिडीह जिला मुख्यालय से कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे व 30 नवंबर को झारखण्ड की राजधानी रांची में कार्यक्रम का समापन करेंगे, जिसमें देश के कई जाने-माने बुद्धिजीवी भी शिरकत करेंगे। साथ ही, 7 नवंबर से 30 नवंबर के बीच में 14 जगहों पर कार्यक्रम किया जाएगा, जिसमें गांव व छोटे कस्बे शामिल हैं- 12 नवंबर (नरकी, बोकारो), 13 नवंबर (हरलाडीह पश्चिमी, गिरिडीह), 15 नवंबर (कतरास, धनबाद), 17 नवंबर (अहिल्यापुर, गिरिडीह), 18 नवंबर (बोकारो थर्मल), 19 नवंबर (रामगढ़), 20 नवंबर (चन्द्रपुरा), 21 नवंबर (गढ़वा), 22 नवंबर (महिशलिट्टी, गिरिडीह), 24 नवंबर (ललपनिया, बोकारो), 25 नवंबर (तिरूम, चांडिल), 26 नवंबर (खलारी), 28 नवंबर (दुमका)।’’

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल शोध के मकसद से झारखंड को अपना ठिकाना बनाए हुए हैं।)










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