सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी से झारखंड में उबाल

झारखंड , , बुधवार , 21-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

रांची। झारखंड में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा में लगे व्यक्तियों और संस्थाओं को फर्जी मामले में फंसा कर जेल में भेजा जा रहा है। ऐसे ही फर्जी और बेबुनियाद आरोप में विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के कार्यकर्ता दामोदर तुरी को 15 फरवरी 2018 को रांची पुलिस ने गिरफ्तार किया है।पुलिस की इस कार्यवाही का झारखंड में जगह-जगह विरोध हो रहा है। विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के कार्यकर्ता दामोदर पर लगाए गए आरोप को फर्जी बताते हुए उनको रिहा करने और मुकदमे वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। विकास आंदोलन के त्रिदिब घोष कहते हैं-

‘‘पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत रांची पुलिस ने दामोदर तुरी को तब गिरफ्तार किया जब वे ‘लोकतंत्र बचाओ मंच’द्वारा आयोजित सेमिनार से वापस लौट रहे थे। लोकतंत्र बचाओ मंच झारखंड के विभिन्न जनसंगठनाें का संयुक्त मंच है। जिसने मजदूर संगठन समिति पर लगाये गए प्रतिबंध, जून 2017 में मोतीलाल के फर्जी मुठभेड़ में की गयी हत्या, पीडीएस में आधार कार्ड को अनिवार्य कर अनाज न मिलने से हुई मौतों जैसे मुद्दों को लेकर 15 फरवरी को सम्मेलन किया था।’’ 

विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के दामोदर तुरी

लोकतंत्र बचाओ मंच की माधुरी कहती हैं कि दामोदर तुरी को गिरफ्तार करके झारखंड सरकार तमाम प्रगतिशील जनसंघर्षों औरे आन्दोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को डराने और दमन करने में लगी है। जिससे लोकतंत्र बचाओ मंच को कमजोर किया जा सके। इसी रणनीति के तहत प्रशासन ने

झारखंड में मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे मजदूर संगठन समिति को भी बेबुनियाद आरोपों के तहत प्रतिबंधित कर दिया है। प्रशासन दामोदर तुरी का नाम मजदूर संगठन समिति से जबरन जोड़ने का प्रयास कर रही है। कार्यकर्ताओं पर इस तरह के तमाम बेबुनियाद आरोप झारखंड पुलिस लगा रही है।

इसी जनविरोधी रणनीति के तहत 22 दिसंबर 2017 को झारखंड के मुख्य सचिव ने मजदूर संगठन समिति को प्रतिबंधित कर दिया। अब प्रतिबंधित संगठन से दामोदर तुरी का नाम जोड़कर उन पर फर्जी मुकदमे लादे जा रहे हैं। इसके पहले झारखंड के डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने 20 दिसंबर 2017 को मजदूर संगठन समिति पर आरोप लगाते हुए दामोदर तुरी को इसका संचालक बताया था। 2008 में दामोदर तुरी को नक्सली साहित्य रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ऐसा दावा किया गया।

जबकि सचाई यह है कि विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन के केन्द्रीय संचालन समिति के ने 22 जनवरी 2018 को ही प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह स्पष्ट किया था की दामोदर तुरी विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन के कार्यकर्ता हैं उनका मजदूर संगठन समिति से कोई लेना देना नहीं है। दामोदर तुरी को 2008 के जिस फर्जी केस के तहत गिरफ्तार किया गया था, उस केस में 19 दिसंबर 2017 को रांची कोर्ट ने इन्हें आरोपमुक्त कर दिया था। दामोदर तुरी 2012 में तमिलनाडु के कुडुम-कुलम में परमाणु उर्जा सयंत्र के प्रभावों की जांच करने के लिए गठित राष्ट्रीय जांच दल के सदस्य थे। जिसमें कई राज्यों से वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, आन्दोलनकर्मी, मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल थे। परमाणु सयंत्र का विरोध कर रहे स्थानीय जनता और उनकेे समर्थन में उतरे अन्य साथियों को तमिलनाडु सरकार ने गिरफ्तार किया था। उस समय तमिलनाडु में जांच दल को भी गिरफ्तार किया गया था। बाद में तमिलनाडु सरकार ने ये सभी मुकदमे वापस कर लिए थे।  

दामोदर तुरी पर मजदूर समिति पर प्रतिबंध लगाने के पहले तक किसी भी कोर्ट में कोई भी न्यायिक मामला लंबित नहीं था। अब उन पर मजदूर समिति से संबंधित चार मुकदमों में आरोप दर्ज किये हैं। जिसमें क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 1908, जैसे जनविरोधी और कठोर कानूनों के तहत मुकदमें दर्ज किए गए हैं।   

विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के प्रशांत कहते हैं,‘‘दामोदर तुरी पिछले 20 सालों से झारखंड एवं देश भर में सरकार द्वारा किये जा रहे हिंसक विस्थापन प्रक्रिया के विरोध में जन आन्दोलनों को संगठित करने का काम कर रहे हैं।आदिवासी क्षेत्रों के जल-जंगल-जमीन और संसाधनों की पूंजीवादी मुनाफाखोरी के लिए की जा रही लूट के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।’’ आदिवासी क्षेत्रों में खदानों, बड़े डैम, बड़े कारखानों के वजह से हो रहे विस्थापन के खिलाफ, शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट सिटी और विकास के नाम मजदूर बस्तियों को उजाड़ने के खिलाफ, भूमिहीनों और दलितों को जमीन के अधिकार के लिए चल रहे आन्दोलनों में दामोदर ने सक्रिय भूमिका निभाई है। दामोदर और विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन ने हमेशा से सरकार समर्थित सलवा जुडूम, आपरेशन ग्रीन हंट जैसी जनविरोधी प्रक्रियाओं के खिलाफ आन्दोलनों में सक्रिय रहा है। जनता के साथ आन्दोलन में उनकी सक्रिय सहभागिता पूंजीपरस्त राज्य व्यवस्था को चुभ रही थी। इसी कारण आज उन्हें गिरफ्तार कर सरकार उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।  

 










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