पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में कितने पुलिस अधिकारी मैनेज हुए?

सवाल दर सवाल , रांची, सोमवार , 27-11-2017


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रामकुमार

रांची। एक पूर्व मंत्री की हत्या की जांच संदेह के घेरे में है और षड़यंत्र पर सस्पेंस बरकरार है। 

मामला राजनीतिक है इसलिये उलझना स्वाभाविक है। 

छल, प्रपंच, झूठ व फरेब राजनीति में स्थापित होने और सत्ता-शीर्ष पर पहुंचने की पहली सीढ़ी माना जाता है। सत्ता द्वारा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल भी कोई नई बात नहीं है। शायद यही वजह है कि नौ साल पहले 9 जुलाई 2008 में रांची जिले के बुंडू स्थित एक स्कूल में समारोह के दौरान पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की कथित नक्सलियों द्वारा की गई हत्या अब तक एक पहेली बनी हुई है।

पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में पूर्व मंत्री राजा पीटर पर आरोप। फोटो साभार

यह भी समझा जा रहा है कि एक रचे गए राजनीतिक षड़यंत्र का खुलासा करने और सुबूत जुटाने की बजाय नई कहानी गढ़ने और वास्तविक षड़यंत्र को बदलने की कोशिश चल रही है। इसके लिए कानून की नयी व्याख्या करने की नाकाम और खौफनाक कोशिश की जा रही है। 


एनआईए की टीम सच से दूर खड़ी दिखाई दे रही है। यह किसके इशारे पर हो रहा है इसका खुलासा होना अभी बाकी है। लेकिन तथ्यों व उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल के यही संकेत हैं।

 

नौ साल बाद जोड़ा गया प्रिवेंशन ऑफ अन लॉ फुल एक्टिविटी एक्ट

नौ साल जांच करने के बाद झारखंड की पुलिस व सीआईडी इस नतीजे पर पहुंचती है कि वास्तव में यह हत्या नहीं होकर ‘’वास्तव’’ में देश की संप्रभुता और अखंडता पर खतरा है। इसी बात को स्थापित करने के लिए राज्य की सीआईडी नौ साल के बाद एफआईआर में अचानक प्रिवेंशन ऑफ अन लॉ फुल एक्टिविटी एक्ट की तीन धाराएं जोड़ती है और इन धाराओं के जुड़ने पर देश की चर्चित जांच एजेंसी एनआईए यह मामला अपने हाथों में लेकर हवा में जादुई छड़ी घुमाना शुरू कर देती है। 

बकौल कोलकोता हाईकोर्ट के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, बगैर किसी कानूनी अधिकार के इस हत्याकांड में साजिशकर्ता के आरोप में सीधे पूर्व मंत्री गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर को सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है। श्रीवास्तव के मुताबिक राजा पीटर की गिरफ्तारी, रिमांड और जेल सभी गैरकानूनी तरीके से की गई कार्रवाई है। 

एनआईए अभी तक राजा पीटर के खिलाफ किसी तरह का कोई साक्ष्य अदालत में पेश नहीं कर पायी है।

उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक झारखंड पुलिस व सीआईडी जांच के बाद ही सितबंर 2016 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल करती है। जिसमें राजा पीटर के नाम का कहीं कोई जिक्र तक नहीं है! और न ही इस हत्याकांड में पुलिस द्वारा गिरफ्तार नक्सलियों का पुलिस के समक्ष दिये गए बयान में भी कहीं राजा पीटर का नाम है!! लेकिन एनआईए अपनी तीन महीने की जांच में साजिशकर्ता के आरोप में राजा पीटर को गिरफ्तार करती है और अदालत में कहती है कि साजिशकर्ता राज्य पुलिस और सीआईडी को मैनेज कर बच गया था। 

तत्कालीन पुलिस अधिकारी आज एनआईए के डीआईजी

दिलचस्प तथ्य यह है इस हत्याकांड की जांच के दौरान रांची जिले के एसएसपी पद पर एक मार्च 2009 से जुलाई 2011 तक और रांची रेंज के डीआईजी पद पर जो पुलिस अधिकारी विराजमान रहे वही पुलिस अधिकारी फिलवक्त दिल्ली में एनआईए के डीआईजी हैं। उक्त पुलिस अधिकारी की कार्यशैली से झारखंड परिचित है। 

सवाल उठना लाजमी है कि साजिशकर्ता ने क्या उस समय के इस अधिकारी जो आज एऩआईए में हैं को मैनेज किया था? 

एनआईए क्या राज्य की पुलिस व सीआईडी के उन अधिकारियों को चिह्नित कर पायी है जो मैनेज हुए हैं? 

और उस पर क्या कार्रवाई की गई है? इसका खुलासा क्या एनआईए की टीम करेगी? 

बहस के दौरान एनआईए ने अदालत को यह भी बताया कि इस हत्याकांड में राजा पीटर के अलावा अन्य लोग भी साजिश में शामिल हैं। राजनीतिक गलियारों में इसका एक मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि सत्ता के लिए खतरा बने और भी राजनीतिज्ञों को नापा जाएगा?

राजा पीटर दोषी हैं, निर्दोष हैं या महज़ एक मोहरा कहना मुश्किल है लेकिन झारखंड में रमेश सिंह मुंडा अकेले नेता नहीं है जिनकी हत्या नक्सली द्वारा की गयी है, बल्कि नक्सलियों के शिकार नेताओं व पुलिस अधिकारियों की सूची लंबी है। सांसद सुनील महतो, विधायक महेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बेटे अनूप मरांडी, एसपी अजय कुमार, एसपी अमरजीत बहिहार, डीएसपी प्रमोद कुमार, स्पेशल ब्रांच के इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार इत्यादि लेकिन किसी हत्याकांड में राज्य की पुलिस व सीआईडी ने प्रिवेंशन ऑफ अन लॉ फुल एक्टिविटी एक्ट की धारा लगाने की जरूरत नहीं महसूस की? 

इस बाबत झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता रोहित सिन्हा कहते हैं कि “मुझे याद नहीं है कि किसी केस में इस तरह की धारा का उपयोग किया गया है।” 

उन्होंने कहा कि इस केस के साथ कानून को नजरअंदाज कर एनआईए काम कर रही है। एक मामले में दो बार एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती है। लेकिन इस मामले में पहली एफआईआर नौ जुलाई 2008 को की गई जो बुंडू थाना केस संख्या 65/2008 है। फिर नौ साल बाद दूसरा केस दर्ज होता है। एऩआईए केस संख्या 11/2017/NIA/DLI दिनांक 30.6.17 है।

इस हत्याकांड के आरोपी पूर्व मंत्री राजा पीटर की पत्नी आरती देवी का कहना है कि उनके पति को एक उच्च राजनीतिक षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है। न्यायालय से उन्हें इंसाफ मिलेगा। उन्होंने कहा कि “एनआईए की टीम यहां कानून संगत काम नहीं बल्कि गुंडागर्दी कर रही है। मेरे पति के क्षेत्र में समर्थकों व शुभचिंतकों में दहशत फैला कर उन्हें धमका रही है। मेरा पति निर्दोष हैं, हम सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेंगे और जनता के बीच अपनी बात रखेंगे।”

(रांची में रहने वाले रामकुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और जनता से जुड़े मुद्दों पर बेबाक कलम चलाते हैं।)










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