गुजरात विधानसभा में जिग्नेश के बोलते ही जब स्पीकर ने बंद कराया माइक्रोफोन!

गुजरात , अहमदाबाद, मंगलवार , 27-02-2018


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कलीम सिद्दीकी

गांधीनगर। सोमवार को गुजरात विधानसभा में सत्ता पक्ष का लोकतंत्र विरोधी चेहरा उस समय सामने आ गया जब उसने नवनिर्वाचित विधायक जिग्नेश मेवानी को सदन में बोलने से रोक दिया। लेकिन इस मसले पर विपक्ष ने सत्ता पक्ष की जमकर घेरेबंदी की और वो सदन से वॉकआउट कर गया। 

दरअसल भानु भाई आत्मदाह मुद्दे को लेकर नियम 116 के तहत पाटन के एमएलए किरीट भाई पटेल, वडगाम विधायक जिग्नेश मेवानी और दानीलिमडा के विधायक शैलेश परमार ने सदन में चर्चा के लिए नोटिस दिया था। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदन में जिग्नेश मेवानी ने जैसे ही कहा कि राज्य के 50 लाख दलितों को अब रूपानी सरकार पर भरोसा नहीं रह गया है।

इससे आगे कुछ बोल पाते उससे पहले ही स्पीकर की तरफ से माइक को बंद करने का इशारा हो गया। माइक बंद होते ही विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक खड़े होकर माइक चालू करने की मांग करने लगे। लेकिन मांगे न माने जाने पर वो लोग सदन से बायकॉट कर गए। विपक्ष के वॉकआउट के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। 

इस दौरान विपक्षी दलों ने "दलित विरोधी सरकार नहीं चलेगी" के नारे भी लगाए। जिग्नेश मेवानी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "गुजरात विधानसभा में माइक्रोफोन बंद करने से मेरी आवाज़ रुक नहीं जायेगी, ये सरकार अच्छे से समझ ले। क्योंकि मेरी आवाज़ इन्कलाब जिंदाबाद की आवाज़ है। जिसे दुनिया की कोई हुकूमत नहीं रोक सकती, जनता के हित में हम सड़कों पर भी हल्ला बोलेंगे और सदन में भी बोलेंगे! चुप कतई नहीं रहेंगे।" 

इस वर्ष के अंत तक कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे देश के महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हैं। और 2019 में लोकसभा चुनाव होना भी तय है। जिस प्रकार से जिग्नेश मेवानी गुजरात समेत दूसरे राज्यों में भाजपा के खिलाफ गोलबंदी कर रहे हैं और उसके जरिये सत्तारूढ़ दल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। वो भाजपा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। मेवानी से कैसे डील करना है उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा है। मेवानी को रोकने की कोई भी कोशिश उल्टे भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। 










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