कन्हैया समेत 15 छात्रों को हाईकोर्ट से राहत, जेएनयू की अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द

ख़ास ख़बर , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 12-10-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्विविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत 15 छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालय द्वारा की गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई पिछले साल 2016 में 9 फरवरी को विश्वविद्यालय में हुए विवादास्पद कार्यक्रम से जुड़ी थी।

न्यायमूर्ति वी के राव ने इस मामले को नये सिरे से फैसला करने के लिये वापस जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पास भेज दिया है।

 

 

  • 9 फरवरी, 2016 के विवादित कार्यक्रम का मामला
  • जेएनयू को छात्रों की सुनवाई करने का आदेश
  • छात्रों ने निष्कासन समेत अन्य सज़ाओं को दी थी चुनौती
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इससे पहले अदालत ने छात्रों को रिकॉर्ड का निरीक्षण करने और उन्हें सुनने की अनुमति दी थी। अदालत ने जेएनयू के अपीली प्राधिकार से कहा कि वह छात्रों को सुनने के छह हफ्ते के भीतर एक तार्किक आदेश दे। जिन छात्रों की सुनवाई होनी है उनमें उमर खालिद और अर्निबान भट्टाचार्य भी शामिल है। इनका कहना था कि विश्वविद्यालय ने अनुशासनहीनता के आरोपों से खुद को बचाने के लिये उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया।

छात्रों ने उन्हें दी गयी सजा को भी याचिका में चुनौती दी थी। जेएनयू प्रशासन ने छात्रों को कुछ सेमेस्टर के लिये निष्कासन से लेकर हॉस्टल सुविधा छोड़ने जैसी सजाएं दी थीं।

विश्वविद्यालय के अपीली प्राधिकार ने उमर खालिद को इस साल दिसंबर तक के लिये विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया था जबकि भट्टाचार्य को पांच साल के लिये विश्वविद्यालय से बाहर किया गया था।

आपको मालूम है कि संसद हमले के आरोपी अफजल गुरु को फांसी दिये जाने के विरोध में 9 फरवरी, 2016 को जेएनयू परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने और कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगाये जाने के आरोप में कन्हैया, खालिद और भट्टाचार्य को पहले देशद्रोह के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें बाद में इस मामले में अदालत ने जमानत दे दी थी। इस संबंध में आरोप पत्र अब तक दायर नहीं किया गया है।

 










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