कन्हैया से मिलने के चलते विश्वविद्यालय से हुआ दो छात्रों का निष्कासन

गुजरात , अहमदाबाद , शनिवार , 10-03-2018


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कलीम सिद्दीकी

बड़ौदा। गुजरात के बड़ौदा में दो छात्रों को इंस्टीट्यूट से इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि उन्होंने जेएनयू में छात्र नेता कन्हैया कुमार से मुलाकात कर ली थी। 

मामला महाराज सायाजी यूनिवर्सिटी से जुड़े इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप एंड गवर्नेंस का है। यहां के कुछ छात्रों ने अपने टूर के दौरान जेएनयू में छात्र नेता कन्हैया कुमार से मुलाकात की थी। इन छात्रों का यह एजुकेशनल टूर था। इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप एंड गवर्नेंस में डिप्लोमा इन पॉलिटिकल लीडरशिप एंड गवर्नेंस नाम का एक शॉर्ट टर्म कोर्स चलाया जाता है। इस कोर्स के विद्यार्थी अपने एजुकेशनल टूर के तहत पिछले महीने दिल्ली गए थे। इस प्रवास के दौरान इन छात्रों ने अलग-अलग राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के नेताओं से मुलाकात की।

इसी कड़ी में जब वो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर निकले तो इनकी मुलाकात कन्हैया कुमार से हो गई। कन्हैया से छात्रों की मुलाकात की सूचना संघ से जुड़े विद्यार्थी संगठन विद्यार्थी विकास संघ को मिली तो उसने इन छात्रों के खिलाफ यूनिवर्सिटी हेड ऑफिस के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। 

विद्यार्थी विकास संघ का कहना था कि यदि इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है तो यहां पर भी कन्हैया कुमार जैसे लोग पैदा हो जाएंगे। और यूनिवर्सिटी के अंदर छात्रों में राष्ट्र विरोधी भावना जगेगी। नतीजतन इस कट्टरपंथी छात्र संगठन के दबाव में आकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 7 मार्च को रूमेल सुतारिया एवं मनीषा सोलंकी को फीस ना भरने का बहाना बनाकर निष्कासित कर दिया। लेकिन अब छात्र भी प्रशासन के फैसले के खिलाफ गोलबंद होना शुरू हो गए हैं। और उन्हें इस मामले में बाहर से भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। वडगाम विधायक जिग्नेश मेवानी ने रोमेल सुतारिया को इसमें सहयोग करने तथा आंदोलन में अल्पेश ठाकोर और हार्दिक पटेल को जोड़ने भरोसा दिया है।

रूम मेल सुतारिया ने बताया कि शैक्षणिक टूर के दौरान उन्होंने कन्हैया कुमार के साथ मीटिंग की व्यवस्था की थी जो उनके हेड की जानकारी में है। कन्हैया कुमार से मुलाकात के बाद उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा था। यही नहीं उनके साथ दो अन्य छात्रों को भी निष्कासित किया गया है। निष्कासन का कारण बताया गया कि वो कोर्स के लायक नहीं हैं। लेकिन सुतारिया पिछले 4 महीने से लगातार क्लास कर रहे थे।

उन्होंने परीक्षा भी दी है। अचानक उनका निकाला जाना संघ से जुड़े संगठनों के दबाव का ही नतीजा है। उनका कहना था कि कैंपस में आरएसएस के बहुत से नेता आते हैं उस पर किसी को कोई आपत्ति क्यों नहीं होती है। पिछले 3 वर्षों से राज्य में अलग-अलग आंदोलन चल रहे हैं। यदि शिक्षा के व्यापारीकरण के खिलाफ आंदोलन होता है तो बीजेपी सरकार के लिए दिक्कत हो सकती है। राज्य में बहुत से युवा हैं जो कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवानी, हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकुर को अपना आइकन मानते हैं। 

 










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