कुंभ मेला प्रशासन की लापरवाही से हुई एक सफाई कर्मी की मौत

उत्तर प्रदेश , इलाहाबाद, मंगलवार , 25-12-2018


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जनचौक ब्यूरो

इलाहाबाद। वैसे तो प्रयाग में आयोजित कुंभ मेले में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। धर्म और आस्था के नाम पर योगी सरकार पैसे पानी की तरह बहा रही है। और उसी के मुताबिक श्रद्धालुओं की सुविधाओं की भी व्यवस्था की जा रही है। लेकिन अगर कोई हिस्सा इन सभी सुविधाओं से महरूम है तो वो मेले के सफाई कर्मी। जिन्हें सूबे के विभिन्न हिस्सों से सफाई के लिए तो बुला लिया गया है। लेकिन सुविधा के नाम पर उन्हें रजाई तक मयस्सर नहीं है। और जैसे-तैसे ठहरने की व्यवस्था कर दी गयी है। ऊपर से काम के दौरान दस्ताने और दूसरे जरूरी सामान न होने से ठिठुरन भरी ये सर्द उनके पूरे जीवन पर भारी पड़ रही है। इसी का नतीजा है कि सोमवार को मेले में एक युवा सफाईकर्मी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

आपको बता दें कि इन सफाई कर्मियों को अत्यधिक कम मासिक वेतन मिलता है और काम के घंटे भी नियत नहीं हैं। इन्हें आवासीय सुविधा के नाम पर छोटे-छोटे फटे पुराने टेंट दिए गए हैं। दिसंबर में जब सर्दी अपने चरम पर है तब सफाई कर्मियों से रात-बेरात काम करवाया जा रहा है। इन्हें पानी में भीगकर और गंदगी में काम करना पड़ रहा है फिर भी इनके लिए ना तो अलाव की व्यवस्था की गयी है और ना ही इन्हें अच्छे टेंट दिए गए हैं जो ठंड से उनका बचाव कर सके। 

अगर कोई सफाई कर्मी बीमार हो जाए तो उसके लिए उचित स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। प्रशासन की इसी लापरवाही का शिकार सफाई कर्मचारी ननकाई (पुत्र- श्री लोला, उम्र- 21 वर्ष, ग्राम- बरुआ, पोस्ट- गाजीपुर, जिला- फतेहपुर) हो गया जो सोमवार की सुबह अपने टेंट में मृत अवस्था में पाया गया। ननकाई के बड़े भाई ने बताया कि "ननकाई अभी नौजवान था वह पूरी तरह स्वस्थ था लेकिन कल रात में जब काम से लौटा तो गंदगी में काम करके आने के कारण उसे नहाना पड़ा जिससे उसे ठंड लग गई और मौत हो गयी। सफाई कर्मियों को गंदगी में काम करते समय दस्ताना, जूता, जैकेट आदि कुछ नहीं मिलता है। आज मेरा भाई मरा है कल कोई भी सफाई कर्मी मर सकता है।"

सफाई मजदूर एकता मंच (संबद्ध ऐक्टू) के अध्यक्ष राम सिया ने कहा कि "हमारी यूनियन पिछले मेलों में भी सफाईकर्मियों के लिए बेहतर रहन-सहन की मांग करती रही है लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता है।" मंच के सचिव संतोष कुमार ने कहा कि "सरकार स्वच्छ भारत का प्रोपोगेंडा तो बहुत कर रही है मगर जिनके दम पर पूरे देश की सफाई व्यवस्था टिकी है उन सफाईकर्मियों के हित की बात छोड़िए उल्टे उनकी जान से खिलवाड़ कर रही है।" ऐक्टू के जिलाध्यक्ष एससी बहादुर ने मेला प्रशासन से मांग की है कि "ननकाई के परिजनों को तत्काल दस लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को स्थाई नौकरी दी जाए।"

 








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