माओवादियों की जनअदालत में नक्सल विरोधी टाइगर फोर्स के समर्थक पिता-बेटे की पिटाई

झारखंड , , रविवार , 30-12-2018


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विशद कुमार

 झारखंड के गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में दहशत के पर्याय के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुके टाइगर फोर्स के संचालक और बाघमारा के भाजपा विधायक ढुलू महतो को उस वक्त जोर का झटका लगा, जब विगत 26 दिसंबर की रात भाकपा (माओवादी) ने जन अदालत लगाकर विधायक के समर्थक खुखरा थाना क्षेत्र के बदगावां के मुखिया गिरिजा शंकर महतो और उनके पुत्र ओमप्रकाश महतो की जमकर पिटाई की और उनकी कार को जला कर राख कर दी।

गिरिजा शंकर का बेटा ओमप्रकाश महतो ढुल्लू महतो के संगठन टाइगर फोर्स का पीरटांड़ प्रखंड अध्यक्ष है। घटना के बाद से महतो परिवार के सदस्य डरे-सहमे हैं। घटना को लेकर मुखिया का कहना है कि रात में नक्सली दस्ते के 50-60 सदस्य आये थे। दस्ते में कुछ महिला नक्सली भी शामिल थीं। नक्सलियों ने सबसे पहले ओमप्रकाश को बंधक बनाया, हाथ बांध कर पीटा और टाइगर फोर्स छोड़ने की चेतावनी दी। उसके बाद उनकी बोलेरो गाड़ी की चाबी ली और उसे किनारे ले जाकर उसमें आग लगा दी।

घटना के बाद मुखिया के पुत्र ओमप्रकाश महतो ने अपने पद सहित टाइगर फोर्स की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वैसे 27 दिसंबर की सुबह सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

उल्लेखनीय है कि 70 के दशक में माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ने तत्कालीन बिहार के धनबाद—गिरिडीह तथा गया में अपना विस्तार शुरू किया। संगठन गया क्षेत्र में एमसीसी और धनबाद—गिरिडीह क्षेत्र में लालखंड के नाम से चर्चे में आया। गिरिडीह के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लालखंड का पैठ बनता और आदिवासियों से अपनी पकड़ ढीली पड़ती देख शिबू सोरेन ने परोक्ष रूप से उनके 2—3 समर्थकों की हत्या करवा दी, जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप लालखंडियों ने उनके 10—12 लोगों को मार डाला।

नतीजतन शिबू समर्थकों में भगदड़ मच गयी और शिबू सोरेन ने चुप्पी साध ली।  क्षेत्र में जनअदालतों का दौर शुरू हुआ और एमसीसी का काफी तेजी से विस्तार हुआ। क्षेत्र में होने वाले तमाम तरह के भ्रष्टाचार, महाजनी—सामंती शोषणों सहित हर तरह के अपराध आदि पर अंकुश लगना शुरू हुआ, जो महाजनों और सामंतों को नागवार गुजरने लगा। 

आखिर में सामंतों ने सनलाइट सेना बनाकर एमसीसी से मुकाबला शुरू की, मगर जल्द ही पटल से गायब हो गए।  90 के दशक में तब के भाजपा के सबसे क्रांतिकारी चेहरा समझे जाने वाले बोकारो के पूर्व विधायक समरेश सिंह ने लालखंडियों यानी एमसीसी के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने एमसीसी के गढ़ के रूप में परिभाषित पीरटाड़ में एक रैली आयोजित की, जो धनबाद से शुरू की गई, मगर उस रैली में शामिल लोग डुमरी आते-आते इधर—उधर बिखर गए। 21 सितंबर 2004 में जब पीपुल्स वार ग्रुप और एमसीसी के विलय के बाद भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ तब संगठन और मजबूत हुआ। माओवादी पार्टी का मानना है कि टाइगर फोर्स के माध्यम से क्षेत्र में फासिस्ट ताकतों की घुसपैठ की जा रही है, संघ की पूंजीवादी, सामंतवादी विचारधारा को फैलाया जा रहा है, जिसे क्रांतिकारी जनता क्षेत्र में चलने नहीं देगी। 

2003 में समरेश सिंह ने टाइगर फोर्स बनाया और ढुलू महतो को उसका सुप्रीमो बना दिया। 2004 में होने वाले विधानसभा चुनाव में समरेश सिंह ने स्वगठित पार्टी बनांचल कांग्रेस से ढुलू महतो को बाघमारा से टिकट दिया। 26000 मत पाकर ढुलू महतो चुनाव हार गए और फिर समरेश का साथ छोड़ कर वो सुदेश महतो की पार्टी आजसू में चले गए। वहां भी जब दाल नहीं गली तो उन्होंने 2009 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम का दामन थामा और चुनाव जीत कर विधायक बन गए। 2014 के चुनाव में पाला बदला और भाजपा से टिकट पाकर पुन: विधानसभा पहुंच गए। 

इस बीच, उन्होंने टाइगर फोर्स को अपने कब्जे में ले लिया और इस संगठन के माध्यम से क्षेत्र के नौजवानों को बरगलाकर बीसीसीएल के कोयलांचल क्षेत्र पर अपना कब्जा जमाया और कोयला कारोबारियों से आर्थिक उगाही करते रहे। आपको बता दें कि ढुलू महतो पर विभिन्न थानों में 35 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

उन्हें तीन मामलों में एक—एक साल की सजा भी हुई है। ढुलू महतो के रघुवर दास से रिश्ते कितने प्रगाढ़ हैं उसका अंदाजा इस प्रकरण से लगाया जा सकता है। महतो पर एक मामला कतरास थाना के कांड संख्या 120/2013 है। जिसमें ढुलू महतो पर आरोप है कि वे आरोपी को पुलिस कस्टडी से भगाकर ले गए, पुलिस कर्मी के साथ मारपीट की और पुलिस की वर्दी फाड़ दी। 

उक्त मामले पर रघुवर सरकार ने कोर्ट में एक यचिका दायर कर इस मामले को खारिज करने की अपील की है, सरकार की इस याचिका को निचली अदालत एवं हाईकोर्ट ने खरिज कर दिया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सूत्रों के मुताबिक ढुलू महतो गिरिडीह लोकसभा से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए टाइगर फोर्स के माध्यम से जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश में हैं।

उक्त घटना के बाद उनके समर्थकों में दहशत छाई हुई है। उनसे जब मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो ढुलू महतो ने बताया कि ''उन्हें मामले की पूरी जनकारी नहीं है, क्योंकि वे दिल्ली में थे अत: मामले की पूरी जानकारी के बाद ही कुछ बयान दे पाएंगे।'' जबकि सूत्र बताते हैं कि वे राज्य में चल रहे शीतकालीन विधानसभा सत्र में शामिल थे, यानी वे झारखंड में ही थे, तो आखिर कौन सी मजबूरी में वे झूठ बोल गए। यह एक बड़ा सवाल है।

 








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