माओवादी सर्च अभियान में आदिवासियों का जीना हुआ दूभर

झारखंड , , बुधवार , 25-04-2018


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रुपेश कुमार सिंह

रांची। झारखंड के कोल्हान जंगल में भाकपा (माओवादी) के खिलाफ सुरक्षा बलों (बीएसएफ, सीआरपीएफ, कोबरा, झारखंड जगुआर, झारखंड पुलिस आदि) का अब तक का सबसे लम्बा छापेमारी अभियान जारी है। पिछले 13 अप्रैल से शुरु हुआ यह अभियान सुरक्षा बलों के हजारों जवानों के साथ  अभी तक जारी है। इस पूरे अभियान में अब तक ‘सुरक्षा बलों’ द्वारा जंगलों माओवादियों को लक्ष्य कर सैकड़ों गोले मोर्टार व राॅकेट लांचर से दागे जा चुके हैं। गांवों में माओवादियों की खोज के लिए डोर टू डोर सर्च अभियान चलाया जा चुका है। ग्रामीण अपने घरों से फरार हो चुके हैं। 

गोईलकेरा बाजार के दुकानदारों को पुलिस ने आदेश दिया है कि 5 किलो से ज्यादा चावल आदिवासियों को नहीं बेचा जाए। जंगल जाने वाले सभी रास्ते पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया गया है। सभी नदी-नाले यानी पानी के तमाम स्रोत पर पुलिस का पहरा है, ताकि माओवादो भूख और प्यास से तंग आकर समर्पण कर दे या फिर कमजोर हालत में लड़ाई के दौरान मारे जाएं।

माओवादियों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज किया जा चुका है। दो-तीन गांव के मुंडा (ग्राम प्रधान) को माओवादियों के हिमायती बताकर गिरफ्तार कर लिया गया है।

हर बार की तरह कई माओवादियों को मार गिराने का दावा पुलिस के द्वारा किया जा चुका है, लेकिन पुलिस के हाथों एक भी माओवादी का लाश नहीं मिला है और ना ही एक भी हथियार। अब तक के अभियान में सीआरपीएफ कोबरा के 4 जवान आइडी विस्फोट व माओवादियों की गोली से घायल हो चुके हैं, 15 अप्रैल को 2 व 20 अप्रैल को 2 जवान।

इधर आज के हिन्दुस्तान अखबार में खबर छपी है कि माओवादियों के सारे बड़े नेता पुलिस घेराबंदी से बाहर निकल चुके हैं, फिर भी अभियान जारी है और लम्बे समय तक जारी रहेगा।

2011 में भी सारंडा जंगल में ‘आॅपरेशन एनाकोंडा-1’ व 2012 में ‘ऑपरेशन एनाकोंडा-2’ (दोनों ऑपरेशन महीनों चले थे) में भी हजारों सुरक्षा बलों के द्वारा माओवादियों के खिलाफ अभियान चलाया गया था और बाद में दर्जनों स्थायी सीआरपीएफ कैंप की स्थापना इलाके में कर दी गयी थी। इन दोनों आॅपरेशनों में माओवादियों को कितना नुकसान हुआ, यह तो अंदाजा लगाना मुश्किल है (इन दोनों ऑपरेशनों के बाद भी एक भी माओवादी का शव बरामद नहीं हुआ था।), लेकिन आम जनता पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था।

बाद में गई फैक्ट फाइंडिंग टीम ने खुलासा किया था कि सुरक्षा बलों ने सैकड़ों घरों को जला दिया है, कई घरों में लूटपाट किया है, कई ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट किया है और कई महिलाओं के साथ बदतमीजी भी की है।पिछले 10-12 दिनों से जारी छापेमारी अभियान की सच्चाई को सामने लेने के लिये मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व प्रगतिशील नागरिकों की एक जांच टीम जरूर ही झारखंड के चाईबासा जिलान्तर्गत गोईलकेरा प्रखंड के सांगाजाटा गांव के आसपास के गांवों का दौरा करना चाहिए।

 

 




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