मिशन 2019: एक बार फिर बिखरी ताकत समेटकर मोदी से लोहा लेने को तैयार माया

विशेष , मेरठ रैली, मंगलवार , 19-09-2017


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मुकुल सरल

बोलने के अधिकार के लिए राज्यसभा से इस्तीफा देने वाली बीएसपी प्रमुख मायावती पूरे दो महीने बाद कल, सोमवार को मेरठ में बोलीं और जमकर बोलीं। मेरठ के वेद व्यासपुरी मैदान में तीन मंडलों के कार्यकर्ता सम्मेलन में मायावती ने सहारनपुर कांड से बात शुरू कर योगी और मोदी सरकार दोनों पर सीधा निशाना साधा। और यह भविष्यवाणी करते हुए कि लोकसभा चुनाव समय से पहले होंगे कार्यकर्ताओं से अभी से चुनाव की तैयारी में जुट जाने का आह्वान किया।

मेरठ में मायावती की रैली। फोटो साभार

नई पारी की शुरुआत

मायावती ने इसी साल 18 जुलाई को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था और हर महीने-दूसरे महीने की 18 तारीख़ को रैली करने का ऐलान किया था। इस कड़ी में कल यह पहली रैली थी। इसे उनकी राजनीति की दूसरी या नई पारी या नई लड़ाई की शुरुआत भी कहा जा सकता है क्योंकि यही वह समय है जब वे किसी सदन की सदस्य नहीं है। यही वह समय है जब वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पराजित होने के बाद एक बार फिर अपनी बिखरी ताकत को इकट्ठा करने की कोशिश कर रही हैं। यही वह समय है जब वह एक बार फिर फर्श से अर्श तक के सफ़र की जद्दोज़हद कर रही हैं।

मेरठ में मायावती की रैली। फोटो साभार

मेरठ का चुनाव अहम

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गढ़ और ऐतिहासिक शहर मेरठ से इसकी शुरुआत करने के ख़ास मायने समझे जा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश मायावती का गृहक्षेत्र भी है और कार्यक्षेत्र भी। उन्होंने अस्सी के दशक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले से ही अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। 1984 में कांशीराम द्वारा बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के गठन के बाद मायावती ने 1985 में बिजनौर से चुनाव लड़ा। हालांकि उसमें उन्हें हार मिली लेकिन यहीं से उनकी राजनीति की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने 1989 में बिजनौर से जीत हासिल की और लोकसभा में पहुंची। पश्चिमी उत्तर प्रदेश जाट बहुल इलाका है। इसे गन्ना बेल्ट भी कहा जाता है। दलित और मुस्लिम भी यहां काफी तादाद में हैं। और इस क्षेत्र ने कुछेक मौकों को छोड़कर ज़्यादातर मायावती का साथ दिया है।

मेरठ में मायावती की रैली। फोटो साभार

शक्ति प्रदर्शन

शायद यही वजह थी कि दो महीने की चुप्पी के बाद मायावती अपनी पहली रैली जिसे कार्यकर्ता सम्मेलन का नाम दिया गया उसमें शक्ति प्रदर्शन करना चाहती थीं, तभी तो इस सम्मेलन में तीन अहम मंडल मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद के कार्यकर्ता और समर्थक बुलाए गए। वेद व्यासपुरी मैदान में भारी भीड़ देखकर मायावती भी गदगद रहीं।

सीधे बीजेपी पर हमला

समय की नज़ाकत समझते हुए मायावती ने न समाजवादी पार्टी पर कोई प्रहार किया न कांग्रेस पर। वह सीधे बीजेपी पर बरसीं। उन्होंने सहारनपुर के शब्बीरपुर प्रकरण का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि शब्बीरपुर में उनकी हत्या कर बसपा को दफ़्न करने की साज़िश थी। सावधान रहने की वजह से यह साजिश नाकाम हो गई। उन्होंने एक बार फिर कहा कि दलितों के हक़ की आवाज़ नहीं उठाने देने की वजह से उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा देकर सड़कों पर लड़ने का फैसला लिया। उन्होंने अपने इस्तीफे की तुलना बाबा साहेब अंबेडकर के इस्तीफे से भी कर दी। उन्होंने कहा कि दलितों-आदिवासियों के हक़ के लिए बाबा साहेब को भी कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने रोहित वेमुला, ऊना और शब्बीरपुर का जिक्र करते हुए कहा कि ये घटनाएं साबित करती हैं कि देश में दलितों का उत्पीड़न बढ़ रहा है। 

मायावती ने फिर दोहराया कि बीजेपी दलितों और पिछड़ों के आरक्षण को खत्म कर रही है। सब कुछ प्राइवेट सेक्टर को दिया जा रहा है। 

उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी को देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक बताया और कहा कि देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुन-चुनकर विपक्षी दलों के नेताओं को निशाने पर ले रही है और सीबीआई, इन्कम टैक्स और ईडी का दुरुपयोग कर रही है।

मायावती ने कार्यकर्ताओं से 2019 में बीजेपी को हराने का आह्वान करते हुए कहा कि तभी वह समझेंगी की उनका इस्तीफा सूद समेत लौटा दिया गया है।

मेरठ रैली में मायावती के भाई आनंद कुमार और भतीजे। फोटो साभार गूगल

मंच पर भाई-भतीजे भी 

मेरठ रैली में कई रंग देखने को मिले और कार्यकर्ताओं में भी जोश रहा। मायावती ने भी इस रैली के लिए विशेष रणनीति अपनाई। आमतौर पर हैलीकॉप्टर से रैली स्थल पर पहुंचने वाली मायावती रैली में सड़क मार्ग से पहुंची। वह दिल्ली से कार से चलीं और रास्ते में जगह-जगह स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं के बीच रुकीं। कल उनके मंच पर उनके भाई आनंद कुमार के साथ भतीजे भी मौजूद थे जिनका बाकायदा परिचय कराया गया। समझा जा रहा है कि माया अपने बाद की रणनीति पर भी विचार करके चल रही हैं। आलोचक इसे परिवारवाद की ओर एक कदम भी मानते हैं। उनका कहना है कि अन्य दलों की तरह अब बीएसपी में भी परिवार को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है।  










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