मुकुल को चाहिए था दल और बीजेपी को नेता

प. बंगाल , , शनिवार , 04-11-2017


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जनचौक ब्यूरो, कोलकाता

भाग मुकुल भाग का नारा जिस पार्टी ने दिया था, मुकुल रॉय भाग कर उसी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। या यूं कहें कि कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस से भारतीय जनता पार्टी, राजनीति का त्रिकोण पूरा कर लिए। वैसे भी ममता-मुकुल के बीच दूरी की नींव काफी पहले पड़ गई थी। अब मुकुल रॉय बीजेपी के सिपहसालार बन गये हैं। पश्चिम बंगाल में 2018 में होने वाले पंचायत चुनाव के पहले मुकुल राय का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के लिए राहत की बात हो सकती है, क्योंकि मुकुल राय को काफी अच्छा संगठक माना जाता है। पंचायत चुनाव में बीजेपी उनकी सांगठनिक क्षमता का भरपूर उपयोग करना चाहेगी।

ऐसे में संभावना है कि मुकुल राय को पंचायत चुनाव का प्रभारी बनाया जाये। पार्टी चाहती है कि मुकुल अपने अनुभवों का लाभ भाजपा को पहुंचाएं जिससे बंगाल में भाजपा को संगठन बढ़ाने में मदद मिलेगी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के अनुसार, मुकुल रॉय के बीजेपी में आने से पार्टी की शक्ति बढ़ी है, इससे आने वाले समय में बीजेपी को लाभ मिलेगा। वह पंचायत चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पंचायत चुनाव व आने वाले अन्य चुनावों में भाजपा नंबर वन बनने के लिए लड़ेगी। राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी में पंचायत स्तर पर टूट होगी। बंगाल में पंचायत स्तर पर मुकुल रॉय के काफी समर्थक हैं। पंचायत चुनाव में जिन उम्मीदवारों को कांग्रेस या तृणमूल टिकट नहीं देगी वे भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। कई जिलों में वामपंथी भी पार्टी से असंतुष्ट हैं। वे भी मुकुल रॉय का नेतृत्व स्वीकार सकते हैं।

राजनीतिक नाटक का श्याम पक्ष

अभी तक मुकुल रॉय की नई राजनीतिक पारी का श्वेत पक्ष था। अब एक नजर श्याम पक्ष पर भी डालते हैं। पश्चिम बंगाल प्रदेश बीजेपी के नेताओं में मुकुल रॉय को लेकर एक बहुत अच्छी राय या कह सकते हैं उत्साह नहीं है। कई नेताओं का मानना है कि मुकुल रॉय के बीजेपी में आने से पार्टी में गुटबाजी बढ़ेगी। तृणमूल संस्कृति का जन्म होगा और एक नया तृणमूल बीजेपी देखने को मिलेगा। ऐसे ही हर जिले में पार्टी के पुराने कार्यकर्ता मुंह फुलाये बैठे हैं। पुराने नेताओं का मानना है कि जो नये लोग पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं, उनको केंद्रीय नेतृत्व अधिक महत्व देने लगा है। जो लोग पार्टी के दुर्दिन में इसके साथ थे, अब वे दरकिनार कर दिये गये हैं।

 

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बहरहाल, बीजेपी में शामिल होने के बाद जहां मुकुल रॉय को अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर हो रही चिंता से यदि राहत मिली है तो वहीं मुकुल रॉय समर्थक नेता भी अभी से अपनी गोटी सेट करने में लग गए हैं। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष व विधायक दिलीप घोष और पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा के पास जिन नेताओं को जगह नहीं मिल रही थी, अब वे मुकुल रॉय के पास पहुंचने का जुगाड़ लगा रहे हैं। उनमें कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी  में जानेवाले नेताओं की संख्या अधिक है। जनवरी' 18 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बंगाल आने वाले हैं। उसके पहले मुकुल रॉय को अपनी क्षमता दिखानी होगी। जहां तक इन पर शारदा नारदा भ्रष्टाचार का आरोप है बीजेपी का जवाब लाजवाब है। कानून अपना काम करेगा और कानून से बड़ा कोई नहीं हो सकता। यह मामला अदालत में है अतः इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं।

 










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