कांग्रेस से तवज्जो न मिलने से परेशान हैं अक्लियत के लोग

गुजरात , अहमदाबाद, बुधवार , 25-10-2017


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कलीम सिद्दीकी

वडोदरा। गुजरात में कांग्रेस पार्टी के सबसे वफादार मतदाता मुसलमान हैं लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस के एजेंडे से मुसलमान गायब हैं। राहुल गांधी से लेकर भरत सोलंकी तक किसी की जुबान से मुसलमान शब्द भी नहीं निकल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बदरुद्दीन शेख़ ने आज तक से बातचीत में बताया कि पहले कांग्रेस पार्टी चुनाव के समय मुस्लिम संगठनों से समर्थन मांगती थी परन्तु इस बार मेरे गुजारिश किये जाने के बाद भी अभी तक किसी संगठन को आमंत्रण नहीं दिया गया। अहमद पटेल की गुजरात चुनाव में बड़ी भूमिका रहती है परन्तु इस बार राहुल गांधी ने पूरी कमान अपने हाथ में ले ली है। अहमद पटेल की भूमिका न के बराबर हो चुकी है। बदरुद्दीन शेख अहमदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन में विपक्ष के नेता रह चुके हैं। अहमद पटेल के करीबी लोगों में से हैं संभवतः बदरुद्दीन शेख द्वारा बड़े न्यूज़ चैनल के माध्यम से ऐसी बातें उठाने के पीछे अहमद पटेल हो सकते हैं। यदि गुजरात में अहमद पटेल की भूमिका के बिना कांग्रेस को सत्ता मिल जाती है तो पटेल का कद दिल्ली में भी छोटा हो जायेगा।
रविवार को वडोदरा में आयोजित आल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मशावारत ने अपने वार्षिक समारोह में भी मुसलमानों के साथ सियासी भेदभाव को लेकर चिंता जताई। मजलिस के अध्यक्ष नवेद अहमद ने कहा कि 1969 में उत्तर प्रदेश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। जिसमें मुस्लिम मजलिस पार्टी ने 32 सीटें जीती थी। इसी 32 सीट के कारण ही गैर कांग्रेसी सरकार संभव हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि मुसलमानों ने कभी भी फिरकावाराना सियासत नहीं की है। भारतीय फ़ौज में मुसलमानों की संख्या 3% है जबकि कारगिल वार में शहीदों में मुसलमानों का अनुपात 10% था। मुसलमानों के सामने इस समय उनका एक ही दुश्मन है। मुसलमानों को चाहिए कि वंचित समाज के साथ मिलकर वो अपने विवेक से वोट दें। 
किशनगंज से सांसद मौलाना असरारुल हक ने कहा कि इक्तिदार बिना इल्म नहीं आता। इक्तिदार चाहिए तो इल्म हासिल करो। टीपू सुल्तान ने इल्म से ही पहली बार मिसाइल बनाया था। अब्दुल कलाम इल्म से ही फादर ऑफ मिसाइल बने। उनकी मौत पर देश ने तीन दिन तक शोक मनाया। राष्ट्रीय ध्वज झुका दिया गया। मौलाना ने कहा कि चुनौतियां हमेशा आती हैं। किसी को भी उससे लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। सियासी अहमियत मिले या ना मिले हर ज़माने में अच्छे लोग होते हैं। उनके साथ मिलकर चुनौती का सामना करने की ज़रूरत है नकली देशभक्तों से घबराने की ज़रूरत नहीं है।

मजलिसे मशावारत की उपाध्यक्ष उज़मा नाहिद जो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य भी हैं ने अपने संबोधन में मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया। नाहिद ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर मज़बूत बनाए जाने की आवश्यकता है। वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए अगले 50 वर्ष का प्लान तैयार किया जान चाहिए। महिलाओं को मज़बूत करने से पूरा मुस्लिम समाज मज़बूत होगा।

मजलिस के सम्मेलन में जुटे लोग।

मुसलमानों को नजरंदाज कर रही हैं सियासी जमातें
प्रदेश के अध्यक्ष शफी मदनी ने कहा कि सियासी जमातें मुसलमानों को नज़र नंदाज़ कर रही हैं। लेकिन हमें सोच समझ कर अपने विवेक से सियासी निर्णय लेना चाहिए। मुजतबा फारुक ने कहा कि विकास पगला कर विनाशकारी हो गया है। हमने ही विकास को दिल्ली भेजा है हमें ही उसको दिल्ली से वापस लाना पड़ेगा उसके लिए 60 को 120 बनाना पड़ेगा।
कांग्रेस पार्टी द्वारा मुसलमानों को नज़र अंदाज़ किया जा रहा है जो अन्य मुस्लिम संगठनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस मुद्दे पर बुधवार (आज) को जमाते इस्लामी, हमारी आवाज़ और इंसाफ की एक बैठा हो रही है। जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी क्योंकि आज ही हार्दिक पटेल ने गोधरा में मुसलमानों द्वारा आयोजित स्नेह मिलन समोह में भाग लिया, अल्पेश ठाकोर के साथ भी कई मुस्लिम उसकी टीम में है और जिग्नेश मेवानी दलित-मुस्लिम एकता का प्रतीक ही बन चुके हैं। इस समय इन तीनों पर पूरे गुजरात की राजनीति टिकी हुई है मात्र कांग्रेस को ही मुसलमान का नाम लेने से फिर क्यों डर क्यों लग रहा है?










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Ahmad Imam :: - 10-25-2017
Muslamano ko chahiye ke banner aur poster ke zariye yeh elaan Karen hum is baar election mein hissa nahi lenge aur hum kisi ko votes nahi karenge.