सर्दी में भी पानी की किल्लत झेल रही मुस्लिम महिलाओं ने अहमदाबाद की सड़कों पर किया प्रदर्शन

मेरा शहर , अहमदाबाद, शुक्रवार , 07-12-2018


muslim-women-protest-water-amc-modi-model

कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। 'जल ही जीवन है' लेकिन देश के सबसे बड़े प्रचारित मॉडल में लोगों को ये बुनियादी जरूरत भी मयस्सर नहीं है। नतीजतन इसके लिए अब लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। यहां बात हो रही है गुजरात की राजधानी अहमदाबाद की। जिस सूबे के नाम पर मोदी ने केंद्र में सत्ता हासिल की उसकी राजधानी पानी के लिए तरस रही है शायद ही किसी को इसका इलहाम हो। 

बुधवार को दोपहर 1 बजे के आस-पास अहमदाबाद के जुहापुरा से सैकड़ों की तादाद में मुस्लिम महिलाएं हाथ में बैनर लिए पैदल अहमदाबाद म्युनिसिपल दफ्तर पहुंच कर धरने पर बैठ गईं। इस रैली का नेतृव पूर्व विधायक साबिर कबलीवाला तथा दलित मुस्लिम एकता मंच के राज्य संयोजक एवं हमारी आवाज़ संस्था के प्रमुख कौशर अली सैय्यद ने किया। रैली के पहुंचते ही पुलिस एवं प्रशासन ने म्युनिसिपल कारपोरेशन के सभी दरवाज़े बन्द कर लिए।

जिसके चलते मेन सड़क पर ही प्रदर्शनकारी बैठ गए और महापौर बिजल पटेल एवं म्युनिसिपल कमिश्नर विजय नेहरा के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। अंत में प्रतिनिधि मंडल से कमिश्नर ने मुलाक़ात कर समस्या का हल निकालने का आश्वासन दिया। कौशर अली ने उन्हें साफ़ पानी न दिए जाने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। जबकि साबिर कबलीवाला को आशा है की एएमसी यानी अहमदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन जल्द ही इसका हल निकालेगी।

पानी के लिए प्रदर्शन।

उसके बाद म्युनिसिपल विभाग के अधिकारियों का रवैया भी बेहद दिलचस्प रहा। जब इस मुद्दे पर मीडिया कर्मियों ने कमिश्नर विजय नेहरा से बाईट लेनी चाही तो उन्होंने पानी की समस्या पर बात करने से मना कर दिया। पानी का जगह विजय नेहरा की दिलचस्पी प्रधानमंत्री के फ्रांस दौरे के दरम्यान हुए एक समझौते पर थी। जिसके मुताबिक फ्रांस अहमदाबाद को ट्रैफिक, प्रदूषण से निपटने की टेक्नोलॉजी और प्लानिंग देगा। 

जबकि गुजरात में पर्यावरण के लिए कार्य करने वाले महेश पंड्या इस समझौते को एक धोखा मानते हैं। उनका कहना है विदेश टूर और भ्रष्टाचार करने के लिए इस प्रकार के समझौते होते हैं। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया की बात कर प्रोजेक्ट विदेश को दिया जाता है जबकि भारत में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सक्षम एजेंसियां एवं लोग हैं बड़े बड़े संस्थान हैं।

एएमसी कमिश्नर।

मकतम पूरा पार्षद मिर्ज़ा इसरार बेग ने जनचौक को बताया कि "यह समस्या पिछले 15 वर्षों से है। हमारे अलावा आधा दर्जन से अधिक एनजीओ हाईकोर्ट तक जा चुके हैं। हाईकोर्ट का आदेश 2012 तक सभी मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने का था। लेकिन भाजपा के लोग कोई कार्य नहीं करते हैं। हम अधिकारियों को पटा-पटा कर काम निकालते हैं। मिर्ज़ा का आरोप है कि कौशर अली केवल सस्ती प्रसिद्धि के लिए गरीबों को भड़का रहे हैं। यह धरना, रैली राजनीति है। समस्या 15 साल से है अभी क्यों जागे।"

हमारी आवाज़, हमारा अधिकार के इमरान शेख का कहना है कि “समस्या का निपटारा होना चाहिए भले ही राजनीति क्यों न हो। गुजरात मॉडल के नाम पर अब जनता धोखे में नहीं रहने वाली। गुजरात के युवा आंदोलन और संघर्ष करना सीख चुके हैं।"

राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच की लक्ष्मी बेन ने कहा कि स्वच्छ पानी "हम महिलाओं का अधिकार है। म्युनिसिपल कारपोरेशन को देना पड़ेगा। दलित एवं मुस्लिम के साथ किसी तरह का भेदभाव सहन नहीं किया जायेगा।"

 








Tagmuslimwomen water protest amc gujratmodel

Leave your comment