डुमरी मॉब लिंचिंग मामले में पुलिस की संदिग्ध भूमिका के विरोध में सभा

झारखंड , , रविवार , 02-06-2019


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विशद कुमार

रांची। 31 मई को रांची से सौ किमी दूर गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में पिछली 10 अप्रैल को प्रखंड के जुरमु गांव हुए मॉब लिंचिंग और मामले पर पुलिस की संदिग्ध भूमिका के खिलाफ एक जन सभा का आयोजन किया गया जिसमें करीब पांच हज़ार लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में राज्य के कई मानवाधिकार कार्यकर्ता भी शामिल हुए। 

बताते चलें कि पिछले 10 अप्रैल 2019 को, गुमला जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत जुरमु गांव के रहने वाले 50 वर्षीय आदिवासी प्रकाश लकड़ा को पड़ोसी जैरागी गांव के लोगों की भीड़ ने पीट-पीट कर उस वक्त मार दिया था जब वे अपने तीन और लोगों, पीटर केरकेट्टा, बेलारियस मिंज और जेनेरियस मिंज एक मरे हुए बैल की खाल एवं उसका मांस निकाल रहे थे। भीड़ द्वारा पिटाई के कारण  पीटर केरकेट्टा, बेलारियस मिंज और जेनेरियस मिंज गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 

 दरअसल गांव के पंच जखारियुस कुजुर का बूढ़ा बैल पानी पीने के क्रम में चट्टान से फिसल कर गिर गया था और वहीं उसकी मृत्यु हो गयी थी। जिसका वे लोग मांस काट रहे थे और साथ में करीब 15—20 बच्चे भी वहां मौजूद थे। उस दिन जैरागी बाजार का दिन भी था।  8 बजे रात लगभग बड़ी संख्या में धारदार हथियारों से लैश लोग अचानक आ धमके और 'मारो-मारो' कहते हुए आदिवासियों को  मारने लगे।  हमलावर  चारों को लात घूसों से ताबड़-तोड़ मारते रहे और  जोर-जोर से 'जय श्री राम! जय हनुमान' का नारा लगाते रहे ।  इस बीच, जो बच्चे थे, वे सभी छुप कर भाग निकले थे।

उक्त  हिंसा एवं पुलिस की भूमिका के विरुद्ध एक  जनसंगठन 'केंद्रीय जन संघर्ष समिति' द्वारा 31 मई 2019 को डुमरी में विरोध सभा का आयोजन किया गया। सभा में गुमला, लातेहार व रांची से 5 हजार लोगों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए जन संघर्ष समिति की सरोज हेम्ब्रम ने कहा कि उनके एवं अन्य कई मानवाधिकार संगठनों द्वारा इस घटना की जांच की गयी। जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि जुरमु गांव के एक मरे हुए बैल के मालिक द्वारा पीड़ितों और अन्य ग्रामीणों को बैल का मांस काटने और खाल निकालने के लिए बोला गया था।

जब वे ऐसा कर रहे थे, तब उन पर जैरागी गांव के लगभग 35 - 40 लोगों की भीड़ ने हमला किया। लगभग तीन घंटों तक पीटने के बाद आधी रात को पीड़ितों को अपराधियों ने डुमरी पुलिस थाने के सामने छोड़ दिया। पीड़ितों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बजाए, पुलिस ने लगभग चार घंटों तक उन्हें ठंड में बाहर असहाय छोड़ दिया। जब उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, तब प्रकाश ने दम तोड़ दिया था। सरोज हेम्ब्रम ने लोगों को याद दिलाया कि झारखंड में पिछले चार वर्षों में 11 व्यक्तियों को भीड़ द्वारा पीट पीटकर मारा गया है,  जिसमें 9 लोग मुसलमान थे और बाकी दो आदीवासी थे।

अस्पताल में पीड़ित का इलाज।

केंद्रीय जन संगठन समिति के जेरोम जेराल्ड कुजूर ने प्रतिरोध में आए लोगों को प्रकाश लकड़ा की मृत्यु में पुलिस की भूमिका के बारे में बताया। जांच में गए मानवाधिकार कार्यकर्ता जेम्स हेरेंज ने कहा कि उन्हें इस बात का भी बहुत दुःख है कि अखबार में यह खबर छपी कि जुरमु के लोग आपस में मांस बांटते बांटते लड़ने लगे, जिसके कारण प्रकाश लकड़ा की मृत्यु हो गयी। ज्यां द्रेज़ ने, जो इस मामले में SP से बात करने गए थे, कहा कि जुरमु में जो हुआ, वह सीधी-सीधी ह्त्या थी और सब कुछ पुलिस व राज्य सरकार के आशीर्वाद से हुआ था।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटना झारखंड में ही नहीं, पर पूरे देश में बार बार हो रही है, जिसके पीछे देश में बढ़ता हिंदुत्व है। अशोक वर्मा ने आरएसएस पर हमला करते हुए कहा कि भारत में एक साझी संस्कृति रही है, जिसमें लोग एक दूसरे के विचारों व धर्मों का सम्मान करते हैं। पर देश में एक संगठन है जो इस हिन्दू राष्ट्र बनाने की चाह में देश में साम्प्रदायिकता फैला रहा है। 

इस हिंसा के अपराधियों पर तुरंत कार्रवाई करने के बजाए पुलिस ने आदिवासी पीड़ितों पर ही गौ हत्या की फ़र्ज़ी प्राथमिकी दर्ज कर  दी, जो दुखद ही नहीं बल्कि अलोकतांत्रिक भी है। उन्होंने कहा कि   अभी तक सभी अपराधियों को पकड़ा भी नहीं गया है। इस जघन्य घटना को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अंजाम दिया गया है। जिसका केंद्रीय जन संघर्ष समिति निंदा करती है। समिति पूरे इलाके में अमन चाहती है। परन्तु इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया है। घटना के इतने दिनों बाद भी दोषियों की गिरफ्तारी में देरी पुलिस के असंवेदनशीलता और उनकी असली नीयत का परिचय दे रही है। विरोध सभा के अंत में प्रतिनिधियों ने प्रखंड कार्यालय में राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर निम्न मांगें की।

1. जुरमु के आदिवासियों के खिलाफ दर्ज गौ हत्या के फर्जी प्राथमिकी को निरस्त किया जाए।

2. भीड़ द्वारा की गई हिंसा में शामिल सभी अपराधियों को गिरफ्तार कर उन पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जाए।

3. स्थानीय पुलिस के खिलाफ पीड़ितों के लिए चिकित्सा उपचार में देरी एवं गौ हत्या का झूठा मुक़दमा दायर करने के लिए कारवाई की जाए।

4. मृतक प्रकाश लकड़ा के परिवार को 15 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

5. घायलों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

6.मॉब  लिंचिंग पर सर्वोच्च न्यायालय के हाल के फैसले का पूर्ण अनुपालन किया जाए ।




 








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