प्रवीण तोगड़िया की रहस्यमयी गुमशुदगी का सच

गुजरात , , बुधवार , 17-01-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। लगभग 11 घंटे की गुमशुदगी के बाद विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया मिल तो गए लेकिन उनकी गुमशुदगी और डर के ड्रामे ने कई सवाल उठा दिए हैं। पहला सवाल यह है कि कोतारपुर वाटर टैंक के पास से बेहोशी की हालत में मिलना ? कोतारपुर वाटर टैंक पर मोदी शासनकाल में कई संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ हो चुकी है और वहां पर तथाकथित आतंकी मारे गए थे। दूसरा, किसी अनजान व्यक्ति ने 108 नम्बर पर फोन कर एम्बुलेंस बुलाकर प्रवीण तोगड़िया को चंद्रमणि हॉस्पिटल में ही क्यों ले गया। चन्द्रमणि हॉस्पिटल में ही पूर्व डीजीपी पीपी पाण्डेय भी अदालत से बचने के लिए दाखिल हो गए थे। तीसरा, बड़े सरकारी बाबू,नेता, बिल्डर, कारोबारी इत्यादि पुलिस और अदालत से बचने के लिए इसी हॉस्पिटल में क्यों दाखिल होते आए हैं? इस हॉस्पिटल के मालिक रूप अग्रवाल प्रवीण तोगड़िया के क्लासमेट और मित्र बताये जा रहे हैं। जिस कारण पूरी घटना को एक ड्रामे के रूप में देखा जा रहा है। 

15 जनवरी को राजस्थान पुलिस ने धारा 188 जैसी मामूली धारा के तहत तोगड़िया को गिरफ्तार करने गुजरात आई हुई थी। बताया जा रहा है कि बीस वर्ष पुराने केस में कोर्ट ने तोगड़िया को हाजिर करने का आदेश जारी किया था।

रूप अग्रवाल ने जनचौक से हुई बातचीत में बताया कि प्रवीण तोगड़िया अभी कुछ और दिन हॉस्पिटल में रहेंगे। कुछ जांचबाकी है। लेकिन उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया कि बड़े लोग जिन्हें अदालत या पुलिस ढूंढ़ती है वह आप के ही हॉस्पिटल में क्यों दाखिल होते है? कल रूप अग्रवाल ने कुछ मीडिया कर्मी से कहा था कि कार्यकारी डीजीपी शिवानन्द झा ने भी एक दिन पहले उनसे फोन कर प्रवीण तोगड़िया की गुमशुदगी के बारे में पूछा था। यहां अहम सवाल यह है कि शिवानन्द झा ने रूप अग्रवाल से ही क्यों पूछा ? हालांकि अग्रवाल ने जनचैक से बातचीत में इस सवाल का जवाब नहीं दिया।   

तोगड़िया को एक मामूली केस में पुलिस से बचने के लिए इतना बड़ा ड्रामा करना पड़ा और हिन्दू ह्रदय सम्राट को मीडिया के सामने रोना पड़ा। तोगड़िया ने प्रेस वार्ता में रोते हुए कहा पुलिस मेरा एनकाउंटर करना चाहती है।

प्रेसवार्ता के समय तोगड़िया गहरे सदमें में थे। उनका कोतारपुर (गुजरात पुलिस के लिए एनकाउंटर स्पॉट) से बेहोशी की हालत में मिलना हैरान करने वाला और राज्य पुलिस पर सवालिया निशान है। तोगड़िया का यह आरोप गुजरात पुलिस पर मुठभेड़ में राजनैतिक हत्या करने की पुष्टि भी करता है। ऐसे में इस मामले का सच बाहर आना चाहिए। एक बड़ा तबका पूरे घटनाक्रम को एक ड्रामा के रूप में देख रहा है। परन्तु तोगड़िया का खुद दावा करना कि ‘‘फर्जी मुठभेड़ में मेरी हत्या हो सकती है।’’ यह खुद अपने आप में एक सुबूत है।  

हालांकि ज्वाॅइंट पुलिस कमिश्नर जेके भट्ट ने जेड केटेगरी सुरक्षा में फर्जी एनकाउंटर हो पाने को असंभव बताया। इस असंभव में भी एक संभावना दिखती है क्योंकि उनके जवाब में फर्जी एनकाउंटर होता है का प्रमाण पत्र भी है।  

तोगड़िया का जो हाल इस समय है इससे पहले कभी नहीं हुआ था। सन् 2002 के चुनाव में वह नरेंद्र मोदी के साथ एक ही चॉपर में प्रचार किया करते थे। 2003 से पहले मुख्यमंत्री कोई भी हो आदेश तोगड़िया का ही चलता था। बड़े-बड़े अफसर और नेता परिषद् के दफ्तर सलामी ठोकने जाते थे। लेकिन आज प्रवीण तोगड़िया की इतनी भी हैसियत नहीं है कि एक कांस्टेबल का तबादला करा सकें। धीरे-धीरे गुजरात में विहिप को समाप्त कर दिया है। जयदीप पटेल, वैद, बाबू बजरंगी जैसे नेता विहिप के साथ नहीं हैं। हरीश भट्ट 2002 में गोधरा से विधायक बने विहिप से वफादारी और आशीष खेतान के स्टिंग में फंसने के बाद बीजेपी ने दोबारा टिकट नहीं दिया। मजबूरन उन्हें शिवसेना जैसी पार्टी में जाना पड़ा, जिसकी गुजरात में कोई हैसियत नहीं है। परिषद के बहुत से नेता सत्ता पक्ष के वफादार होकर सत्ता का लाभ पाने के लिए हिंदुत्व का रास्ता छोड़ सरकारी दलाली कर रहे हैं और विहिप को मात्र तोगड़िया के भरोसे छोड़ दिया गया है। जिस कारण विहिप की शक्ति कम होती जा रही है। हाल ही में विश्व हिन्दू परिषद् के संगठन चुनाव में बीजेपी और आरएसएस तोगड़िया के खिलाफ थे। जिस कारण तोगड़िया को पद पर बने रहने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। 

2002 दंगे से पहले तोगड़िया हिन्दू ह्रदय सम्राट माने जाते थे। लेकिन 2002 के बाद नरेंद्र मोदी का नए हिन्दू ह्रदय सम्राट के रूप में उदया हुआ। एक राज्य में दो-दो सम्राट होना ही तोगड़िया और मोदी के बीच शीत युद्ध का कारण माना जा रहा है। केशु भाई पटेल के शासनकाल में तोगड़िया का कद बहुत बड़ा माना जाता था और नरेंद्र मोदी एक मामूली नेता से अधिक कुछ नहीं थे। 

जब बीजेपी लीडरशिप ने केशुभाई को मुख्यमंत्री पद से हटाने का मन बनाया तो पहले प्रवीण तोगड़िया को सीएम का ऑफर दिया गया था लेकिन सुपर सीएम होने के कारण तोगड़िया ने सीएम बनने से मना कर दिया था जिसके बाद मोदी को मौक़ा दिया गया मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी अमित की जोड़ी ने राज्य की सत्ता के साथ-साथ संगठन पर भी पकड़ मजबूत कर ली। केशुभाई और गोरधन झड़फिया जो तोगड़िया के करीबी माने जाते थे सत्ता और संगठन दोनों से दूर हो गए। हरेन पंड्या की संदिग्ध मौत के बाद मोदी-अमित की जोड़ी और शक्तिशाली होती गई बल्कि यह कहें कि हिंदुत्व की फसल की कटाई अकेले मोदी ही करते गए और तोगड़िया एक बागी के अलावा कुछ नहीं रहे। वरिष्ठ पत्रकार बसंत रावत का कहना है “प्रवीण तोगड़िया द्वारा जो अंदेशा जताया जा रहा है कि उनकी फर्जी एनकाउंटर में हत्या भी हो सकती है। गुजरात में फर्जी मुठभेड़ और राजनैतिक हत्याओं का इतिहास भी रहा है। ऐसा हो भी सकता है। तोगड़िया के अनुसार उनके पास बहुत से राज़ हैं। तो इसकी भी जांच होनी चाहिए कि उनके पास किसके राज़ हैं और तोगड़िया को बिना खौफ राज़ खोल डालना चाहिए। जनता उनके साथ खड़ी होगी। मानवाधिकार पर काम करने वालों को इस समय तोगड़िया के साथ खड़ा होना चाहिए। यदि सामाजिक संगठन इसलिए तोगड़िया से दूर रहते हैं क्योंकि वह प्रवीण तोगड़िया हैं तो ये न्याय नहीं होगा।” तोगड़िया के करीबी सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार 2006 में तोगड़िया जब राजस्थान में थे उन्हें गुजरात आईबी के एक अधिकारी (जो गोरधन झड़फिया का नजदीकी था) के माध्यम से जानकारी दी गई कि “प्रवीण तोगड़िया अपनी गाड़ी से सफर न कर अपने प्रोग्राम में बदलाव कर लें क्योंकि उन्हें सड़क दुर्घटना में मारने का षड्यंत्र रचा गया है।

तोगड़िया ने सूचना की पुष्टि करने के लिए खुद सफर न कर तय प्रोग्राम के अनुसार सफर जारी रखा। लेकिन अपनी गाड़ी से अन्य व्यक्ति को भेज कर खुद दूसरे रस्ते से सफर किया। उसी सफर में तोगड़िया की गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ जिसके बाद से ही प्रवीण तोगड़िया अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। 1996 में बीजेपी सांसद आत्माराम पटेल की पिटाई के मामले में तोगड़िया के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकलना फिर अन्य मामले में राजस्थान से वारंट निकलना एक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  

बजरंग दल के कद्दावर नेता और गोधरा के पूर्व विधायक हरीश भट्ट ने भी हॉस्पिटल जाकर तोगड़िया से मुलाकात की। भट्ट ने जनचौक संवाददाता से कहा,

‘‘मात्र प्रवीण भाई ही नहीं मेरी भी फर्जी मुठभेड़ में हत्या कराई जा सकती है। इतने गंभीर आरोप का कारण पूछे जाने पर भट्ट ने कहा कि गुजरात में पहले भी फर्जी एनकाउंटर के द्वारा हत्याएं हुई हैं। इसलिए संभावना है कि राजनैतिक कारणों से हमारी भी फर्जी मुठभेड़ में हत्या करा दी जाए।’’ 

इस समय प्रवीण तोगड़िया बीजेपी के लिए अछूत से हो गए हैं। तोगड़िया शाही बाग के चन्द्रमणि हॉस्पिटल में दाखिल हैं। वहां से कुछ ही किलोमीटर पर कमलम है। परन्तु बीजेपी के किसी नेता ने तोगड़िया से मिलने की हिम्मत नहीं दिखाई। तोगड़िया से मिलने कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया सहित कई अन्य कांग्रेसी नेता पहुंचे। इनके अलावा डीजी वंजारा और हार्दिक पटेल ने भी हॉस्पिटल में तोगड़िया का हाल जाना। 

असल कहानी यह है कि राजस्थान पुलिस से बचने के लिए प्रवीण तोगड़िया अपने मित्र घनश्याम भाई के घर चले गए थे। घनश्याम भाई तोगड़िया के गांव गरियाधर के रहने वाले हैं। वहां पहुंचने के बाद तोगड़िया ने अपना फोन बंद कर दिया। घनश्याम भाई के घर से वह लगातार अन्य फोन से अपने निजी सहयोगियों के संपर्क में थे। तोगड़िया के सहयोगी जीतू मेहता लगातार फोन पर संपर्क में होते हुए भी मीडिया को भ्रमित करने वाली खबरों से वातावरण को गर्म कर रहे थे। वातावरण अधिक गर्म होने पर घनश्याम भाई की कार से कोतारपुर पहुंचे। वहां ड्राइवर निकुल रबारी के फोन से 108 बुलाकर चंद्रमणि हॉस्पिटल में दाखिल हो गए। हालांकि क्राइम ब्रांच को घनश्याम भाई के घर पर होने की सूचना मिल चुकी थी। 










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Sehzad :: - 01-17-2018
Exrra ordinary. Exclusive......

Shahid Husain khan :: - 01-17-2018
Jis qaum ki mukhalifat ko apna maqsad banaya tha iske nateeje men uppar wale ki taraf se yeh to hona hi tha "APNE HUYE PARAYE" MATLAB ki duniya se aur kya ummid rakhi ja Sakti hai? "INSANIYAT K NAATE " KAMNA KARTE HAIN" UPAR WALA" AAPKI HIFAZAT KARE EK MUSLIM BHAI