राजस्थान में भगवाई उत्पात: सांप्रदायिकता के सहारे सत्तासीन होने के सपने

राजस्थान , , शनिवार , 06-01-2018


rajasthan-communalism-riots-rss-bhagwa-vasundhara

मदन कोथुनियां

जयपुर। राजस्थान में हिंदू संगठनों का उपद्रव दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। बूंदी में हर साल होने वाले टाइगर हिल मानधाता पूजन के दौरान हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं के अड़ियल रुख के चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए। इसके चलते इलाके में तनाव का माहौल बन गया। धारा 144 लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। 

दरअसल विवाद पूजा स्थल को जाने वाले रास्ते को ले कर उपजा। मानधाता हनुमान मंदिर को जाने का रास्ता मीरा साहब की दरगाह से है, लेकिन प्रशासन ने इस बार इस रास्ते से मंदिर जाने पर रोक लगा दी थी। वहीं हिंदू महासभा इसी रास्ते से मंदिर जाने पर अड़ी रही।

हिंदू महासभा के आह्वान पर सोमवार, 1 जनवरी 2018 की सुबह से ही लोग बड़ी तादाद में हाथों में भगवा लेकर मानधाता बालाजी की ओर कूच करने के लिए इकट्ठा होने लगे। जैसे ही हुड़दंगी मंदिर की ओर बढ़े पुलिस ने उन्हें खदेड़ना शुरू कर दिया। 

तनाव की आशंका के चलते पहले से ही भारी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन लोग नहीं माने तो उन पर लाठियां बरसानी पड़ी। घटना में करीब एक दर्जन से ज्यादा लोगों को चोटें आईं। 

जिले में इंटरनेट, एसएमएस पर रोक लगाने के साथ ही धारा 144 लागू कर दी गई है। भारी भरकम पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दिया गया और ड्रोन कैमरों की मदद से शहर भर में निगरानी की गई।

बूंदी की घटना के दिन ही सोमवार, 1 जनवरी को सांप्रदायिक दंगे भड़काने के उद्देश्य से अजमेर में एक भड़काऊ भाषण का वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सुरक्षा बंदोबस्त कड़े कर दिए। हालांकि वीडियो में भड़काऊ भाषण देने वाले व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। 

पुलिस अधीक्षक राजेंद्र सिंह के मुताबिक, शिवसेना हिंदुस्तान नाम के हिंदूवादी संगठन की ओर से जारी इस वीडियो में अजमेर दरगाह को हिंदू मंदिर बताया गया है और बाबरी मस्जिद की तर्ज पर उसे भी ढहाने का आह्वान किया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद दरगाह मैनेजमेंट के सदस्यों ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का आग्रह किया था। 

पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमारी फोर्स पहले से वहां तैनात है और हम किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए कुछ-कुछ अंतराल पर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। हमने अपनी टीम के सदस्यों को हालात के हिसाब से कार्रवाई करने का निर्देश दिया हुआ है। मौके पर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं।'' 

दरगाह के प्रबंधन से जुड़े समीर चिश्ती के मुताबिक, "हम कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा दिए गए अपमानजनक बयानों की कड़ी निंदा करते हैं, जो देश में शांति और सौहार्द को बिगाड़ना चाहते हैं। '' 

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की जांच करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच के नतीजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। हम सूफी हैं और हमारा लक्ष्य लोगों के बीच प्रेम, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देना है। 

चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन सलमान चिश्ती ने भी कहा है कि पिछले 8 सौ सालों से हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक इस दरगाह को पहली बार विवाद में घसीटने की कोशिश की जा रही है। देवबंद के उलेमा ने भी सरकार से ऐसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने और इन संगठनों को प्रतिबंधित करने की मांग की है। 

इस बीच, शिवसेना हिन्दुस्तान ने वायरल हो रहे वीडियो से खुद को दूर कर लिया है। 

अजमेर के पुलिस जांच अधिकारी संजय बोथारा ने बताया कि इंटरनेट पर वायरल हुए इस वीडियो में शिवसेना हिन्दुस्तान का सदस्य लखन सिंह धार्मिक आधार पर भड़काऊ बातें कहता पाया गया। उसका मोबाइल जब्त कर लिया गया है और यही वीडियो उसके मोबाइल में भी मिला है। इस वीडियो को आगे की जांच के लिए भेजा गया है। 

इससे पहले भी राजस्थान के बिसाऊ (झुंझुनू), सूरसागर (जोधपुर) व जैसलमेर में धार्मिक जुलूस निकालने के दौरान तनाव व पत्थरबाजी की खबरें आई तो देशभर में सियासत द्वारा प्रायोजित दंगों की यादें फिर से ताज़ा हो गईं।

पिछले दिनों जयपुर के चौमू इलाके में भी एक लड़की से छेड़खानी की अफवाह फैली और हिन्दू बनाम मुस्लिम की आड़ में जाटों को मुस्लिमों से लड़ाने का षड्यंत्र सामने आया। जब जानकारी जुटाई गई तो यह महज अफवाह निकली। लोगों को माजरा समझ मे आने लगा तो मंदिर में मूर्ति खंडित करने की अफवाह फैलाई गई। 

अब जाट कौम के युवाओं को कौन समझाए कि मुस्लिम बाजार जो हिन्दू ग्राहकों से चलता हो, वहां कोई मुस्लिम मंदिर में ऐसी हरकत करके अपना धंधा चौपट क्यों करेगा ? अगर किसी असामाजिक तत्व ने मूर्ति खंडित कर भी दी तो पुजारी जाने व पुलिस-प्रशासन जाने, लोग अपनी पूँछ क्यों जला लेते है। 

इस मामले में जयपुर के ग्रामीण व बाहरी इलाकों से कोचिंग करने चौमूं व आस-पास के इलाकों में आए नौजवानों को दंगों की आग में धकेला गया। पंचायतें, सभाएं करके सोशल मीडिया के माध्यम से इलाके को मुस्लिम मुक्त करने की कसमें दिलवाई गईं। इलाके में जमकर पत्थरबाजी की गई। 

राजस्थान में ये हिन्दू-मुस्लिम व जातीय नफरत दोनों विकल्प सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। आप को जिस मे उलझना है उस में उलझकर अपने मुद्दों की कब्र खोद लीजिए। 

पिछले साल भीलवाड़ा में दंगा रोकने वाले अफसर पंकज चौधरी को परेशान किया जा रहा है। इसी साल डीडवाना में बीजेपी के मंत्री के समर्थकों द्वारा देशविरोधी नारे लगवाए गए। उससे पहले नागौर में गौहत्या के नाम पर दंगा भड़काने की कोशिश की गई। 

इसी कड़ी में जाट बाहुल्य नागौर इलाके में आरएसएस का राष्ट्रीय अधिवेशन किया जाता है। उसके बाद अब एक साथ झुंझुनू, जोधपुर व जैसलमेर से ऐसी खबरें आना इसी तरफ संकेत कर रही हैं। बाड़मेर में करनी सेना के झंडाबरदार सुखदेव गोगामेड़ी ने 35 बनाम एक करके दूसरा विकल्प भी खोल दिया है।

राजस्थान में आज तक भगवा बिग्रेड कोई बड़ा हिन्दू-मुस्लिम दंगा करवाने में सफल नहीं हुई है, इसलिए दूसरा विकल्प भी ये लोग आजमाना चाहते हैं।

(मदन कोथूनियां पत्रकार हैं और जयपुर में रहते हैं।) 

 






Leave your comment