अब राजस्थान में भी पागल हुआ विकास!

एक नज़र इधर भी , व्यंग्य लेख, मंगलवार , 16-01-2018


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मदन कोथुनियां

आजकल तो जनता गद्दार हो गई है ! विकास को छिपा कर कहती है कि विकास मिला ही नहीं है ! अब बेचारी सरकारें क्या करे ?  विकास जनता को मिला है, यह साबित करने के लिए प्रयास तो करेंगी ही! इसलिए सरकारें जश्न मना कर दिखा रही हैं कि देखो, हमारे यहां विकास पैदा हुआ है। बाकायदा अखबारों और टीवी में विज्ञापन देकर सरकार विकास को स्वीकार करवाने के लिए जूझती नजर आती है।

विज्ञापन में विकास...!

विज्ञापन में विकास!

अभी पिछले दिनों राजस्थान की वसुंधरा सरकार के 4 साल पूरे होने पर राष्ट्रीय अखबारों में पूरे 2 पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ। उसमें 4 साल में किए कार्यों का विवरण दिया गया।  सबसे मजेदार बात यह लिखी हुई थी कि 2.8 लाख युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 13 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवा दिए गए हैं। अखबार में देखकर बेरोजगार युवा आपस में फोन करके पता करते दिखे कि नौकरी मिली किस को है?  सरकारी आंकड़ा भी कहता है कि अभी तक कुल 35 हजार लोगों को नौकरी मिली है। 

किसानों को बांटी गई राहत के आंकड़े देखकर तो लगा कि अभी जो किसान गड्ढों में बैठकर सरकार की  मुखालफत कर रहे हैं, सड़कों पर रैलियां निकाल रहे हैं, जगह-जगह धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं वो तो सरकार के गद्दार हैं। जब सरकार ने किसानों को दिल खोल कर दिया है तो किसान नाटक क्यों कर रहे है? आंकड़े देखो सरकार के।

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आंकड़ों के माध्यम से  सबसे ज्यादा विकास राजस्थान की सड़कों का हुआ है।  जो सड़कें थी वो तो टूट कर बिखर गईं हैं, लोग गड्ढों में सड़क ढूंढते नजर आते हैं, लेकिन सरकार ने 4 साल में 60 साल में जितनी सड़कें बनी हैं उतनी बना डाली हैं।  नहीं दिखे तो इसमें सरकार की गलती थोड़े ही है।  सरकार ने तो जैसी आपने चुनी वैसी सड़कें बना दीं।  73 हजार किलोमीटर सड़कें बनी हैं। अब आप ढूंढिये ये सड़कें कहां बनी हैं?

सभी मरीजों के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में ऑपरेशन हो रहे हैं। आप निजी अस्पताल में लुट रहे हो तो इसमें आप की गलती है, सरकार तो पूरी व्यवस्था किए हुए बैठी है।  कुचामन वाली काकी आज विज्ञापन के माध्यम से कह रही है कि "सरकार ने काया रो कष्ट मेट दियो!" अब आपको काया का कष्ट नहीं मिटाना तो इसमें सरकार क्या करे?

सरकार कह रही है कि 10 हजार करोड़ रुपये पिछले 4 सालों में सरकारी मुलाजिमों को ज्यादा दिए हैं और हड़ताल पर उतरे मुलाजिम एक-दूसरे को पूछ रहे हैं कि यह पैसा मिला किसको है?  सरकार जी कह रही है तो झूठ थोड़े ही कह रही है। शायद ये मुलाजिम ही सरकार के साथ गद्दारी कर रहे हैं!

शहरी गरीबों को सस्ता व पोष्टिक खाना दिया जा रहा है। ये जो रैन बसेरों में सूखे हाड़ मांस वाले लोग टॉयलेट व कम्बल का रोना रो रहे हैं, वो हैं ही बेवकूफ! जाकर पोष्टिक खाना खा लें तो ठंड भी कम लगेगी व शरीर मे गर्मी आ जायेगी तो ठंड में बार-बार पेशाब भी नहीं आएगा। सरकार ने व्यवस्था की है लेकिन ये लोग सरकार को बदनाम करने के लिए नाटक कर रहे हैं।

सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। 450 से ज्यादा स्कूलों को तो विश्वस्तरीय स्कूल बना कर आदर्श रूप प्रदान किया है। पीपीपी मोड पर स्कूल देने का आरोप लगाने वाले लोग सरकार के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं। सबसे ज्यादा पीपीपी मोड पर 27 स्कूल नागौर से देने की खबर देखी तो वहां एक शिक्षक मित्र से बात की। वे धीरे से बोले कि प्राइमरी स्कूल में अकेला ही हूं। किसी को बताना मत नहीं तो मुझे भी वो वाला प्रमाणपत्र मिल जाएगा। 

सबको ‘पेज 3’ पर आने के लिए बच्चों को निजी स्कूलों में ठेलना है तो ठेलने दीजिये सरकार ने बेहतर व्यवस्था की है।

अब विपक्ष को पता है कि अगला नंबर हमारा है और हमें भी इसी प्रकार के क्रांतिकारी बदलाव लाने हैं इसलिए चुपचाप बैठकर अभी से ही मंत्री पद बांट लिए हैं और मुख्यमंत्री पद तय करने में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं अपनी जीत सुनिश्चित मान कर शादियों में व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं। 

अब जनता के पास विकल्प क्या है? राजा कोई भी हो जनता को लुटना ही है। दिल्ली की गद्दी पृथ्वीराज चौहान के पास हो या अकबर के पास, गोरे अंग्रेजों के पास हो या काले अंग्रेजो के पास क्या फर्क पड़ता है। जयपुर में वसुंधरा बैठे या गहलोत, जनता को तो विकास अखबारों में ही देखना है। 

देखते रहिये विकास को नए-नए तेवर और नए-नए रूपों में और खुश होकर ताली बजाते रहिये। विकास ऐसा ही होता है आप मान लीजिए। नहीं मानोगे तो टीवी व अखबारों में और ज्यादा विज्ञापन देंगे और आपके ही पैसे बर्बाद होंगे। मोदी जी ने 3 साल में विकास बताने के लिए 1500 करोड़ रुपये फूंक दिए हैं। राजस्थान सरकार भी आपको विकास स्वीकार करवाने के लिए और पैसे फूंकेंगी। मैं तो कहता हूं कि राजस्थान की जनता अपनी तरफ से चौक-चौराहों पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगा कर कह दे कि हम विकास को दिल से स्वीकार करते हैं।

(मदन कोथुनियां पत्रकार हैं और आजकल जयपुर में रहते हैं।)






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