सवर्णों को आरक्षण दिये जाने का फैसला जुमला नहीं; संविधान, सामाजिक न्याय व बहुजनों पर बड़ा हमला है!

बिहार , भागलपुर, मंगलवार , 08-01-2019


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जनचौक ब्यूरो

आर्थिक आधार पर सवर्णों को 10% आरक्षण देने के केन्द्र सरकार के फैसले के खिलाफ भागलपुर स्टेशन चौक पर जोरदार प्रतिवाद प्रर्दशन हुआ। इस मौके पर सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमेटी सदस्य रिंकु यादव और रामानंद पासवान ने कहा कि सवर्णों को 10% आरक्षण देने का केन्द्र सरकार का फैसला संविधान विरोधी है। यह जुमला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और बहुजनों पर बड़ा हमला है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के कोर कमेटी सदस्य अर्जुन शर्मा और बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच के अजय कुमार राम ने कहा कि सवर्णों को आरक्षण देकर केन्द्र सरकार बहुजनों के आरक्षण पर हमला बोल रही है। सत्ता व शासन की संस्थाओं में पहले से ही सवर्णों की भागीदारी आबादी के अनुपात से कई गुना ज्यादा है। इसलिए सवर्णों को आरक्षण देना सत्ता-शासन की संस्थाओं में उसके वर्चस्व को बनाये रखने की गारंटी की कोशिश है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमेटी सदस्य अंजनी और बिहार फूले-अंबेडकर युवा मंच के अंशदेव निराला ने कहा कि आरक्षण गरीबी उन्मूलन व रोजगार गारंटी कार्यक्रम नहीं है। यह तो दलितों-पिछड़ों व आदिवासियों का सत्ता-शासन व शैक्षणिक संस्थाओं में भागीदारी व प्रतिनिधित्व की संवैधानिक व्यवस्था है। इसलिए सवर्णों को आरक्षण देना कहीं से उचित नहीं है।

न्याय मंच के  सोनम कुमार और पीएसओ के मिथिलेश विश्वास ने कहा कि सवर्णों के साथ संपूर्ण समाज से गरीबी उन्मूलन के लिए आर्थिक विषमता बढ़ाने वाली और पूंजीपति पक्षधर नई आर्थिक नीति का खात्मा जरूरी है। गरीबी उन्मूलन का जवाब आरक्षण नहीं है।

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमेटी सदस्य अभिषेक आनंद और पीएसओ के  विभूति कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार का यह फैसला घोर मनुवादी है। बहुजन विरोधी है। सबसे पहले तो बहुजनों को सभी क्षेत्रों में संख्यानुपात में प्रतिनिधित्व की गारंटी के लिए आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर कम से कम 69% करने की जरूरत है। निजी क्षेत्र सहित न्यायपालिका व अन्य क्षेत्रों में आरक्षण की गारंटी करने की जरूरत है। लेकिन केन्द्र सरकार बहुजनों के खिलाफ सवर्णों के पक्ष में खड़ा होकर सामाजिक न्याय पर हमला कर रही है और सवर्णों को ही आरक्षण दे रही है।

महेश अंबेडकर और विजय कुमार दास ने कहा कि सवर्ण आरक्षण के पक्ष में खड़े बहुजन नेताओं को बहुजन समाज माफ नहीं करेगा। मनुवादी शक्तियों के इन दलालों को भी सबक सिखाया जाएगा।

राजेश रोशन और नंदकिशोर ने कहा कि कांग्रेस और आप जैसी पार्टियों ने भी अपना मनुवादी चरित्र सामने ला दिया है। भाजपा के विपक्ष में सामाजिक न्याय पक्षधर होने का दावा करने वाली पार्टियां भी सवर्णों को आरक्षण देने के मसले पर गोल-मटोल बात कर रही हैं। जो भी सामाजिक न्याय व बहुजनों के पक्ष में हैं, उन्हें खुले तौर पर सवर्णों के आरक्षण का विरोध करना होगा।

 








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