संविधान दिवस के मौके पर अहमदाबाद में दलितों ने निकाली संविधान बचाओ यात्रा

गुजरात , अहमदाबाद, सोमवार , 26-11-2018


samvidhan-diwas-yatra-dalit-ambedkar-rss-manuvad-jignesh

जनचौक ब्यूरो

अहमदाबाद। दलित चेतना एक बार फिर उस समय अहमदाबाद की सड़कों पर हिलोरें मारेती दिखी जब संविधान दिवस के मौके पर दलित नेता जिग्नेश मेवानी के संगठन राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच ने "संविधान बचाओ यात्रा" का आयोजन किया। यह यात्रा रविवार को अहमदाबाद के चांद खेड़ा से निकलकर वाडज, दुदेश्वर, असारवा, बापूनगर, गोमतीपुर होते हुए अमराई वाड़ी में समाप्त हुई।

जिग्नेश मेवानी के आगे बढ़ने के साथ ही सूबे में दलित चेतना भी नये मुकाम पर पहुंच गयी है। इसके पहले गुजरात में इस तरह के आयोजन कम ही देखने को मिलते थे। लेकिन रविवार को 2000 से अधिक दलितों ने जय भीम, जो दलितों से टकराएगा चूर-चूर हो जाएगा, दलित हक़ की लड़ाई है पूरे देश में छाई है, हम आम्बेडकरवादी हैं संघर्ष के आदी  हैं, के नारों के साथ 26 किलोमीटर की यात्रा तय की।

यात्रा का जगह-जगह आम जनता द्वारा स्वागत किया जा रहा था। रात के 8 बजे अमराई वाड़ी में जनसभा के साथ समापन हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए दलित-मुस्लिम एकता मंच के कलीम सिद्दीकी ने कहा कि "अच्छा हुआ संविधान निर्माण बाबा साहेब की अगुवाई में हुआ। अगर किसी मुस्लिम की अगुवाई में हुआ होता तो आज संघी खुलकर कहते हम संविधान को नहीं मानते।" सिद्दीकी ने आगे कहा कि संविधान के साथ दलित समाज के जज़्बात जुड़े हैं लेकिन संविधान को बचाने की जिम्मेदारी देश के सभी नागरिकों की है।

कमलेश कटारिया ने कहा कि 1947 से पहले महिलाएं पैर की जूती हुआ करती थीं। संविधान ने महिलाओं को अधिकार दिया तो सिर का ताज बन गईं।

जगदीश चावड़ा का कहना था कि "मनुवादी लोग संविधान बदलना चाहते हैं। और वो अब तक 47 जगह छेड़-छाड़ कर चुके हैं लेकिन हम किसी भी हाल में संविधान को बचाएंगे। वह शांति से हो या फिर क्रान्ति से।"

महेश भाई परमार ने समापन भाषण में कहा कि " चीन और जापान जैसे देश खुद को विश्व के नक़्शे में आगे देखने के लिए हर उपाय कर रहे हैं और हम कह रहे हैं मंदिर वहीं बनाएंगे। देश में गांधीवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद है लेकिन देश अंबेडकरवाद से ही बचेगा।" परमार ने आगे कहा कि "समाज का युवा नशे और व्यसन में फंस रहा है ऐसे में जिग्नेश मेवानी जैसे युवा नेता एक आशा की किरण हैं जो इन्हें  नशे के दलदल से निकालने के लिए भी प्रयत्न कर रहे हैं। समय की मांग है बाबा साहेब के दिए दो शस्त्र मताधिकार और शिक्षा की अहमियत को युवा समझें । आंबेडकर आंदोलन केवल दलित समाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए यह आंदोलन समस्त समाज का होना चाहिए। हम लोग संविधान के लिए बलिदान भी देंगे लेकिन संविधान पर आंच नहीं आने देंगे। " 

अवसरवादी गुजराती मीडिया ने जिग्नेश की राष्ट्रीय पहलों को दूसरे नजरिये से पेश करना शुरू कर दिया है। लिहाजा इस मौके पर उनकी गैरमौजूदगी को ही खबर बना दिया। उसके मुताबिक जिग्नेश मेवानी अब दलित समाज के लिए संघर्ष न कर अन्य समाज के लिए काम कर रहे हैं। इसका जवाब देते हुए महेश परमार ने कहा कि "हमने कभी भी मेवानी को केवल दलितों का नेता नहीं माना। वह हमेशा से वंचितों के लिए काम करते आए हैं।"

सचाई ये है कि संविधान दिवस के एक कार्यक्रम में जिग्नेश मेवानी , कन्हैया कुमार और हार्दिक पटेल एक साथ मुंबई में थे।

 








Tagsamvidhan yatra dalit ambedkar rss

Leave your comment