सृजन घोटाले में नेताओं को बचाने का खेल शुरू !

बिहार , , चयन करें , 10-11-2017


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अखिलेश अखिल

नेताओं, बैंक कर्मियों, कारोबारियों और दलालों की मिलीभगत से बिहार में जिस सृजन घोटाले को अंजाम दिया गया था उसमें पहली  चार्जशीट तो सीबीआई ने दायर कर दी है। लेकिन इस घोटाले के असली मास्टर माइंड प्रिया और उनके पति अमित की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। उनकी गिरफ्तारी न होने से आशंकाओं का बाजार गर्म है। ऐसा माना जा रहा है कि इसके जरिये नेताओं से जुड़े सबूत ख़त्म करने की कोशिश की जा रही है। यह कैसी विडंबना है कि सृजन चलाने वाले प्रिया और अमित अभी तक पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। जबकि सच्चाई ये है कि मामले के उजागर होने के कई सप्ताह बाद तक प्रिया और अमित नेताओं, अफसरों और दलालों के साथ घूमते नजर आ रहे थे। 

आपको बता दें कि  सीबीआई ने बिहार के सृजन घोटाले में पहली चार्जशीट बुधवार को दायर कर दी। ये चार्जशीट पटना स्थित सीबीआई की  विशेष कोर्ट में 6 आरोपियों के ख़लिाफ़ दायर किया गया है। फ़िलहाल इनमें से चार आरोपी न्यायिक हिरासत में भागलपुर जेल में बंद हैं। जिन छह आरोपियों के ख़लिाफ़ चार्जशीट दायर की गयी है उनमें सृजन महिला विकास समिति की मैनेजर सरिता झा, भागलपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के ब्रांच मैनेजर वरुण कुमार सिन्हा, पूर्व मैनेजर अरुण कुमार सिंह, इंडियन बैंक के क्लर्क अजय कुमार पांडेय, भू अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह और पूर्व नाज़िर राकेश कुमार झा शामिल हैं। इन लोगों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जालसाज़ी, धोखाधड़ी और ग़बन के आरोप में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। सीबीआई ने इस मामले में छानबीन 25 अगस्त को शुरू की थी। फ़िलहाल सीबीआई सृजन घोटाले से संबंधित दस मामलों की जांच कर रही है।

इस मामले में जांच एजेंसी द्वारा अब तक मुख्य आरोपियों जिसमें सृजन की सचिव प्रिया या उनके पति अमित जिनकी स्वर्गीय मां मनोरमा देवी इस पूरे घोटाले की मास्टरमाइंड थीं अभी तक फरार है। 

सीबीआई द्वारा इन लोगों की गिरफ़्तारी नहीं किए जाने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।  माना जा रहा है कि कई नेताओं को बचाने के लिए इन लोगों की गिरफ्तारी जानबूझ का नहीं की जा रही है। भागलपुर से जुड़े लोगों का मानना है कि चूंकि इस घपले में बड़े स्तर पर बीजेपी नेताओं की सहभागिता रही है ऐसे में इस बात की संभावना भी बन रही है कि साक्ष्य मिटाने के लिए मुख्य आरोपियों की हत्या ना कर दी  जाए। 

 इस घोटाले से जुड़े लोगों पर भी अभी तक सीबीआई की कोई कार्रवाई नहीं पायी है। सृजन के पैसे से कारोबार करने वाले लोगों से भी अभी तक पूछताछ नहीं हुई। इसके अलावा उन नेताओं से भी सीबीआई अभी तक पूछताछ नहीं कर पायी है। जिनके  संबंध सृजन की मालकिन मनोरमा देवी और उनकी बेटी प्रिया से रहे हैं।  आपको बता दें कि भागलपुर स्थित सृजन के कार्यालय में बीजेपी के कई नेताओं का आना जाना रहा है और तस्वीर भी सोशल मीडिया में उजागर की गयी थी। 

 गौरतलब है कि सृजन घोटाला क़रीब एक हज़ार करोड़ से अधिक का भागलपुर और उसके आसपास के कुछ जिलो में केंद्रित घोटाला है। जहां एक एनजीओ ने बैंक वालों की मदद से सरकारी राशि का जमकर ग़बन किया। इस घोटाले में भागलपुर के कई ज़िला अधिकारियों ने सृजन की संस्थापक सचिव मनोरमा देवी की मदद की थी। 

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और दिल्ली में रहते हैं।)






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