आखिर किसके निशाने पर हैं तोगड़िया और जिग्नेश!

गुजरात , अहमदाबाद, बृहस्पतिवार , 08-03-2018


togadia-jignesh-attack-murder-attempt-security-zplus

कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय नेता प्रवीण तोगड़िया ने एक बार फिर अपनी हत्या की साजिश का आरोप लगाया है। बुधवार को जब वो सूरत जा रहे थे तभी उनकी गाड़ी को एक ट्रक ने टक्कर मार दिया। जिसमें तोगड़िया बाल-बाल बच गए। इसके साथ ही दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवानी की जान के खतरे को लेकर भी तमाम तरह की बातें हो रही हैं। उनके समर्थकों ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने की मांग की है। 

बताया जा रहा है कि बुधवार को ग्यारह बजे प्रवीण तोगड़िया बड़ोदा से सूरत जा रहे थे। तभी उनकी स्कार्पियो पर हैवी ट्रक चढ़ाने का प्रयास हुआ। इस घटना के बाद कल शाम को तोगड़िया ने एक प्रेस वार्ता कर कहा कि “जो लोग मुझे संगठन से नहीं हटा पाए उन्होंने हटाने का अब एक दूसरा रास्ता खोज लिया है।” किसी का नाम लिए बगैर तोगड़िया ने प्रधानमंत्री और बीजेपी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि पुलिस जांच में दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा। तोगड़िया ने कहा कि जेड प्लस सुरक्षा के बावजूद सूरत जिले की हद में पहुंचने पर केवल पायलट गाड़ी थी। स्कॉर्टिंग गाड़ी नहीं थी। तोगड़िया ने बताया कि सुरक्षा अधिकारी से बात होने पर पता चला कि केवल पायलट गाड़ी सुरक्षा ही देने का लिखित आदेश था। तोगड़िया इसके पहले भी अपनी हत्या की आशंका जता चुके हैं। 

2 जनवरी 2018 को वरिष्ठ पत्रकार बसंत रावत का जनचौक में एक व्यंग्य छपा था। व्यंग्य में लिखा गया था कि “ मिली अति गोपनीय जानकारी के अनुसार रूपानी सरकार जल्द ही जिग्नेश मेवानी को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर सकती है”। व्यंग्य में कही गई बात सही साबित होती दिख रही है। रूपानी सरकार को समझ में नहीं आ रहा है कि मेवानी को कैसे डील करें।

भानु भाई आत्मदाह की घटना के बाद जिस प्रकार से सरकार दलित समाज की मांगों को न मानने पर अड़ी थी और फिर मेवानी के आंदोलन के बाद उसे झुकना पड़ा था। उसके बाद से ही जिग्नेश प्रशासन और सरकार की निगाह में चढ़ गए हैं। लिहाजा मामला केवल तोगड़िया तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब जिग्नेश को लेकर भी गुजरात में चर्चों का बाजार गर्म है।

इस तरह की बातें आ रही हैं कि प्रशासन में बैठे लोग (जिनके लिए मेवानी चुनौती बन रहे हैं ) शराब माफियाओं के साथ मिलकर जिग्नेश मेवानी की हत्या करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। षड्यंत्र के अनुसार शराब माफियाओं की मदद से मेवानी का रोड एक्सीडेंट कराया जा सकता है। और घटना को अंजाम देने वाले पर हत्या का आरोप लगा कर फिट किया जा सकता है। ताकि पूरी घटना को शराब माफियाओं से जोड़कर सिस्टम में बैठे लोग अपने आप को बचा लें। आप को बता दें राज्य के पूर्व गृहराज्यमंत्री हरेन पांड्या की हत्या भी इसी प्रकार से हुई थी। हरेन पांड्या ने 2002 के बाद तीस्ता शीतलवाड़ द्वारा बनाये गए जस्टिस के. अयंगर के ट्रिब्यूनल में राज्य सरकार की दंगों में भूमिका तथा 23 एनकाउंटर की महत्वपूर्ण जानकारियां दी थी। उसके बाद से ही वह तन्त्र में बैठे कुछ लोगों के निशाने पर थे और हत्या हो गई जिसे आतंकवादी घटना करार दे दिया गया। 

जिग्नेश मेवानी की सुरक्षा को लेकर दलित समाज चिंतित दिख रहा है। राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के भारत शाह ने जनचौक संवाददाता को बताया कि “जिग्नेश मेवानी केवल दलित समाज के लिए ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक आशा की किरण हैं। सरकार को अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी समझते हुए मेवानी को उच्चतम सुरक्षा प्रदान करना चाहिए।” वकील उवेश मलिक का कहना है कि “प्रवीण तोगड़िया जिसने एक विचारधारा को अपने 35 वर्ष दिए अब उसे उसकी अपनी विचारधारा के लोगों से ही खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने डायरेक्ट इन डायरेक्ट मोदी और अमित शाह का नाम लिया है। यदि मेवानी की जान को खतरा बताया जा रहा है तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए”। 

उन्होंने कहा कि मेवानी को एक दलित नेता के रूप में न देख कर पब्लिक आइकॉन के रूप में देखना चाहिए। सरकार तुरंत मेवानी को जेड प्लस की सुरक्षा प्रदान करे। मेवानी के सहयोगी राकेश महेरिया का कहना है वैचारिक चुनौती के चलते इस देश में कलबुर्गी, गौरी लंकेश की हत्या कर दी जाती है। जिग्नेश मेवानी संघ को केवल वैचारिक चुनौती नहीं दे रहे हैं बल्कि राजनैतिक चुनौती भी दे रहे हैं।

बीजेपी मेवानी को 2019 के लिए बड़ा खतरा मानती है। जिस प्रकार से अब प्रगतिशील एवं दलित महापुरुषों की मूर्तियाँ तोड़ी जा रही हैं जाति और विचार के खिलाफ उन्माद फैलाये जा रहे हैं। इन सब को देखते हुए जिग्नेश मेवानी को सबसे पहले जेड प्लस सुरक्षा दी जानी चाहिए।  










Leave your comment