भ्रष्टाचार के आरोपी जिलाधिकारियों के निलंबन के हाईकोर्ट के आदेश को योगी ने दिखाया ठेंगा

उत्तर प्रदेश , , मंगलवार , 19-12-2017


up-assembly-dm-highcourt-clp-congress-corruption-cm-yogi

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। यूपी विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उस समय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ गया जब कांग्रेस के एक विधायक ने भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें निशाने पर ले लिया। फिर सीएम के बचाव में स्पीकर हृदय नारायण दीक्षित को उतरना पड़ा। और उन्होंने विधायक को न केवल बोलने रोक दिया बल्कि उसकी कही बातों को रिकार्ड में दर्ज करने से भी मना कर दिया।

खबर के मुताबिक विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजय कुमार लालू ने सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का आरोप जड़ दिया। इस सिलसिले में उन्होंने दो जिलाधिकारियों के भ्रष्टाचार का मामला उठाया। जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने उनके निलंबन का आदेश दिया है। लेकिन उनमें से एक अफसर इस समय मुख्यमंत्री के गृह जिले गोरखपुर के जिलाधिकारी हैं।

नेशनल हेरल्ड के मुताबिक सीएलपी नेता ने कहा कि “मुख्यमंत्री इसलिए उसे निलंबित नहीं कर रहे हैं क्योंकि वो उनके गृह जिले का जिलाधिकारी है।” आगे उन्होंने कहा कि “एक तरफ मुख्यमंत्री कहते हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में उनकी सरकार की जीरो टॉलरैंस की नीति है। जबकि दूसरी तरफ वो एक भ्रष्ट अफसर को संरक्षण दे रहे हैं।” 

सदन के भीतर न बोले दिए जाने पर उन्होंने असेंबली के सेंट्रल हाल में पत्रकारों से बातचीत की। लालू ने सवालिया अंदाज में पूछा कि अगर सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरैंस में विश्वास करती है तो वो डीएम का निलंबन क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि आज स्पीकर ने उन्हें इस मुद्दे को उठाने से रोक दिया लेकिन वो इसे शून्य काल में उठाएंगे।

इस मौके पर दो बार कांग्रेस से विधायक रहीं अर्चना मिश्रा ने कहा कि 402 सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस की संख्या कम हो सकती है लेकिन सदन में उनकी मौजूदगी हर कोई महसूस करेगा। उन्होंने कहा कि “हम भ्रष्टाचार का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। कानून और व्यवस्था के प्रश्न पर भी हमने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है। और अब मुख्यमंत्री के दरवाजे पर पहुंच चुके भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी उठाया जाएगा।” गौरतलब है कि यूपी विधानसभा में कांग्रेस के केवल 7 विधायक हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर को अवैध खनन में शामिल होने के आरोप में कानपुर देहात के जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह और गोरखपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला को निलंबित करने का आदेश दिया था। आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले और जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता की दो सदस्यीय पीठ ने पारित किया था। मामले में याचिका रामपुर जिले के रहने वाले मकसूद ने दायर की थी।

बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सिंह और रौतेला पर रामपुर जिले में अवैध खनन को बढ़ावा देने का आरोप था।










Leave your comment