आखिर यूपी में क्यों रोने के लिए मजबूर हैं किसान?

उत्तर प्रदेश , , सोमवार , 13-11-2017


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जनचौक ब्यूरो

हरदोई। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे सूबे में राम राज्य लाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने एक अजीब रास्ता अपनाया हुआ है। जिसके तहत सूबे की सभी सरकारी ईमारतों और बसों को भगवा रंग में रंगवाने का काम हो रहा है। शायद उनका मानना है कि ऐसा करने से रामराज्य आ जाएगा। लिहाजा उन्होंने अपनी पूरी ताकत उसी दिशा में झोंक दी है। इसके पहले अयोध्या में सरकारी दीवाली मनाने के कार्यक्रम के जरिये भी वो इसी तरह की एक कोशिश कर चुके हैं। और जब सरकार को रामराज्य लाने का इतना आसान रास्ता दिख जाए तो फिर भला वो किसी दूसरे काम को क्यों तरजीह देगी? 

लेकिन पेट है तो भूख है और फिर उसके लिए रोटी भी चाहिए। लेकिन योगी और सन्यासी को इससे क्या लेना-देना। न उन्हें कभी खेतों में हाड़तोड़ मेहनत करनी पड़ी। और न ही किसी मिल या फैक्ट्री में काम करना पड़ा। ऊपर से परिवार की भी कोई जिम्मेदारी नहीं। फिर भला उन्हें नमक और आटे के भाव से क्या मतलब। ऐसे में उनके लिए रामराज्य और राम भजन ही सबसे बड़ा एजेंडा है। 

लोगों ने हो हल्ला मचाया तो योगी जी ने किसानों के कर्जे की माफी की घोषणा कर अपनी पीठ थपथपा ली। लेकिन ये कितना जमीन पर उतरा और कितना लागू हुआ ये उनका विषय नहीं था। किसानों के प्रति योगी कितने गंभीर हैं उसका पता अब लोगों को चल रहा है। जब किसान अपने अनाज को लेकर मंडियों और सरकारी केंद्रों पर जा रहे हैं। 

आलम ये है कि जगह-जगह सरकारी केंद्रों पर किसानों का धान लेने से मना कर दिया जा रहा है। हरदोई के एक किसान केंद्र का मामला सामने आया है जो बेहद परेशान करने वाला है। यहां के एक किसान का धान इसलिए नहीं खरीदा गया क्योंकि उसने दलालों की मदद नहीं ली। ऊपर से ऐसा न करने पर दलालों ने उसके साथ मारपीट तक कर डाली।

राजपाल निवासी नानक गंज जब अपना धान लेकर सेंटर बेचने आए तो केंद्र ने उनका धान लेने से इंकार कर दिया। इस मसले पर सेंटर इंचार्ज का कहना कि उनके धान के मानक नहीं पूरे हैं।

यहां के एक किसान ने बताया कि यहां दलाल बहुत ज्यादा सक्रिय हैं और उनके बगैर कोई किसान अपना अनाज बेच ही नहीं सकता। मंडी में धान के रेट 1200 से 1300 के बीच हैं वहीं सरकारी केंद्रों पर रेट 1590 रुपये प्रति कुंतल है। 






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