यूपी की सरकारी थर्मल पावर कंपनियों में मजदूरों-कर्मचारियों की हालत दयनीय, विरोध में उपवास पर बैठे नेता

उत्तर प्रदेश , अनपरा/नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 19-04-2018


up-thermal-power-labour-employee-anpara-upwas-yogi

जनचौक ब्यूरो

अनपरा, सोनभद्र। थर्मल पावर कंपनियों में मजदूरों और कर्मचारियों की हालत बेहद बदहाल है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी उनकी न तो कहीं सुनवाई हो रही है और न ही कोई रास्ता निकाला जा रहा है। जिसके चलते मजदूरों और कर्मचारियों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इसी गुस्से को अपनी आवाज देने के लिए यूपी वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपून उपवास पर बैठ गए हैं। 

एक प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि ऊंचाहार में हुए दर्दनाक हादसे और अनपरा में परवेज की जलने से हुई मौत के बाद मुख्यमंत्री अनपरा आए थे और यह वादा करके गए थे कि परियोजना में हर हाल में मजदूरों के जीवन सुरक्षा का इंतजाम किया जायेगा। लेकिन उनकी यह घोषणा भी महज जुमला ही बनकर रह गयी। 

उन्होंने कहा कि मजदूरों, टैक्सी चालकों व सुरक्षा में लगे रिटायर्ड फौजियों तक को छः माह से काम कराकर वेतन का भुगतान नहीं किया गया। उनके कार्यालय में इस संबंध में शिकायत करने पर जनवरी में बताया जाता है कि सितम्बर 2017 तक का ही भुगतान किया गया है। उनका कार्यालय लिखकर देता है कि परवेज के आश्रित को संविदा पर नौकरी दी जायेगी पर उसकी पत्नी पिछले दो माह से दर-दर की ठोकर खा रही हैं। 

कपूर ने बताया कि कई बार वार्ता के बावजूद उसका गेट पास नहीं बना। आग से रोज खेलने वाले मजदूरों की जिंदगी दांव पर लगा दी गयी है। टेण्डरों में सुरक्षा मानकों का पालन करने और सुरक्षा उपकरण देने की घोषित शर्त के बाद भी आज तक किसी मजदूर को हेलमेट, जूता, चश्मा, ग्लब्स, जैकेट, मास्क जैसे न्यूनतम सुरक्षा उपकरण तक नहीं दिए गए। मजदूरों को बोनस, रोजगार कार्ड, हाजिरी कार्ड, वेतन पर्ची जैसे कानूनी अधिकार भी नहीं मिलते। 

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर योगी राज में जंगल राज व्याप्त है इसके खिलाफ कानून के राज की स्थापना के लिए वो सत्याग्रह उपवास पर बैठे हैं। उनका अनशन अनपरा तापीय परियोजना के मुख्य द्वार पर चल रहा है। 

उन्होंने जानकारी दी कि अनपरा व ओबरा तापीय परियोजना के ठेका मजदूरों के नियमितीकरण के लिए वर्कर्स फ्रंट की तरफ से माननीय उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका संख्या 10029 को कल माननीय न्यायधीश बी अमित शेतेलकर की एकल पीठ ने स्वीकार कर लिया है, जिस पर आगामी 24 अप्रैल को सुनवाई होगी।

उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट कराकर योगी सरकार पूरे प्रदेश की सार्वजनिक सम्पदा को पूंजी निवेश के नाम पर बड़े पूंजी घरानों को बेचने में लगी हुई है। इसका पहला शिकार प्रदेश का बिजली क्षेत्र बना था जिसके विरुद्ध हुए कर्मचारियों और आम जनता के व्यापक प्रतिरोध ने सरकार को कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर कर दिया है। पर सरकार की सार्वजनिक उद्योगों को बर्बाद करने वाली नीतियां जारी हैं। अनपरा तापीय परियोजना का ही हाल देखें। यहां रूटीन मेंटीनेंस के कामों का अरबों रूपया बकाया पड़ा हुआ है। 

यूपी में उल्टी अर्थनीति जारी है सबसे सस्ती बिजली उत्पादित करने वाली अनपरा परियोजना में उत्पादन रोक कर थर्मल बैकिंग करायी जा रही है। पिछले कई दिनों से पारीक्षा में शून्य उत्पादन कर दिया गया है। एक तरफ सार्वजनिक बिजली उत्पादन गृहों में थर्मल बैकिंग हो रही है दूसरी तरफ अम्बानी की रिलांयस से महंगी दर पर बिजली खरीदी जा रही है। 

सरकार की परियोजना को बर्बाद करने के सबसे बुरे शिकार ठेका मजदूर, चालक और गार्ड जैसे कमजोर लोग हो रहे हैं। वेतन न मिलने से उनके परिवार भुखमरी के कगार पर हैं, इलाज के अभाव में दम तोड़ने के लिए मजबूर हैं, बेटियों के हाथ पीले करने तक में कठिनाई हो रही है। मजदूरों को असहाय, बेबस और मजबूर बनाकर उनका आखेट किया जा रहा है। लेकिन इस उत्पीड़न को नहीं चलने दिया जायेगा अपने शरीर के अंतिम सांस तक इसके विरुद्ध शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रतिवाद किया जायेगा।

उपवास के समय बड़ी संख्या में मजदूर और चालक मौजूद रहे। यूपी वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश महामंत्री राजेश सचान, ठेका मजदूर यूनियन के कार्यालय मंत्री तेजधारी गुप्ता, स्वराज अभियान के राहुल कुमार भी इस मौके पर उपस्थित थे। 




Tagup thermal upwas labour anpara

Leave your comment