उत्तर प्रदेश में आफत बने आवारा पशु, खेतों के साथ ही आबादी में भी मचा रखा है कहर

उत्तर प्रदेश , , रविवार , 13-01-2019


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चरण सिंह राजपूत

नई दिल्ली/लखनऊ। जिस गोवंश के लिए गोरक्षक आये दिन हिंसा फैलाते रहते हैं। योगी सरकार समय-समय पर तरह-तरह के फरमान जारी करती रहती है। वही गोवंश उत्तर प्रदेश में लोगों के लिए आफत बनता जा रहा है। आवारा पशुओं में तब्दील हुआ यह गोवंश जहां खेतों में कहर मचाये हुए है वहीं आबादी भी इससे वंचित नहीं रह गई है। रात दिन मेहनत कर किसान जिस फसल को तैयार कर रहे हैं उसे ये आवारा पशु चट कर जा रहे हैं। सड़कों पर आम नागरिक भी इनका निशाना बन रहे हैं। फसल बचाने के लिए किसानों को इस कड़ाके की ठंड में रातभर जागकर खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है।वैसे तो पूरा उत्तर प्रदेश इन आवारा पशुओं के आतंक की चपेट में है पर खेती पर निर्भर रहने की वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश ज्यादा प्रभावित है।

गत दिनों बुलंदशहर और अलीगढ़ में किसानों को मजबूरन आवारा पशुओं को स्कूलों व सामुदायिक केंद्र में बंद करना पड़ा था। अलीगढ़ के गोराई गांव में 24 दिसंबर की रात फसल बर्बाद होने से नाराज किसानों ने करीब 800 आवारा गोवंश को एक सरकारी स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र में बंद कर दिया था।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में गत रात किसानों ने परेशान होकर दर्जनों आवारा पशुओं को राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में बंद कर दिया। सुबह जब डॉक्टर अस्पताल पहुंचे तो उनको वहां अस्पताल में आवारा पशु बंधे मिले। उन लोगों ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। यह मामला दोस्तपुर थाना क्षेत्र के धनऊपुर गांव का है। यहां के किसानों ने पहले इस समस्या को लेकर वन और कृषि अधिकारियों के पास पहुंचे थे। बाद में ये किसान  डीएम विवेक से भी मिले, पर कुछ नतीजा न निकल सका। अंत में किसानों को यह कदम उठाना पड़ा। जब डॉक्टर इन पशुओं को खदेड़ने लगे तो किसान आक्रोशित हो गए। ग्राम प्रधान आशीष शुक्ला ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाया। किसान मान तो गए पर आवारा पशु वहां से निकलने नहीं दिए। इसके चलते दिनभर अस्पताल का कामकाज ठप रहा। डीएम विवेक का कहना है कि जिले में 50 गोवंश आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। उनके अनुसार इनमें 25 हजार मवेशियों को रखने की व्यवस्था होगी।

पिछले दिनों सिद्धार्थनगर जिले में भी आवारा पशुओं के आतंक को लेकर किसानों का गुस्सा देखने को मिला। किसान आवारा पशुओं को पकड़कर कलेक्ट्रेट परिसर में ले गए और जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। मवेशियों के साथ हुए किसानों के प्रदर्शन से वहां अफरा-तफरी मच गई थी। किसानों का आरोप है कि ये आवारा पशु उनकी फसल बर्बाद करने के साथ ही आबादी में भी तांडव कर रहे हैं। इन मवेशियों ने कई बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों को मारकर घायल कर दिया है। झुंड में रह रहे इन आवारा पशुओं का कहर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का समाधान जल्द न किया गया तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे। सिद्धार्थनगर के डीएम कुणाल सिल्कू ने कहा है कि इस समस्या के समाधान के लिए जल्द ही कारगर उपाय किये जायेंगे।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश खेती के मामले में अव्वल माना जाता है। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, अमरोहा जिले मुख्य रूप से कृषि प्रधान हैं। यहां पर आजकल गेहूं, सरसो व गन्ने की फसल खड़ी है। मवेशियों के चारे के लिए हर किसान ने बरसीम बो रखी है। ये आवारा पशु इन फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिसके चलते किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल यह समस्या योगी सरकार द्वारा गोवंश को बेचने में अनेक पेंचों के चलते पैदा हुई है। एक तो किसान के पास उन्हें बांधने के लिए जगह नहीं बची है दूसरे उसके सामने चारे की बड़ी समस्या है। ऐसे में किसान इस गोवंश को बेच तो पा नहीं रहा है। तो खुले में ही छोड़ दे रहा है। ऐसे में यही गोवंश आवारा पशुओं में तब्दील हो जा रहे हैं। उधर गोरक्षकों के आतंक के चलते मवेशी व्यापारी भी गोवंश को नहीं खरीद रहे हैं। जिसके चलते इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

अब यह समस्या गांव, किसान और खेती की ही नहीं रह गई है। शहरों में भी आवारा पशुओं का आतंक चरम पर है। सड़कों पर झुंड के रूप में घूम रहे आवारा पशु आये दिन किसी को भी मारकर घायल कर दे रहे हैं। किसी भी गाड़ी को पलट दे रहे हैं। कहना गलत न होगा कि जो गोवंश किसी समय लोगों के लिए पूजनीय था वही गोवंश अब भजपा की गलत नीतियों के चलते उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है।

 










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