अधीर रंजन चौधरी के जरिये मुकुल रॉय की कमी की भरपाई की कोशिश में ममता बनर्जी

प. बंगाल , कोलकाता , शनिवार , 14-10-2017


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जनचौक संवाददाता

 

कोलकाता। संगठन के मामले में दक्ष मुकुल रॉय द्वारा तृणमूल कांग्रेस से रिश्ता नाता तोड़ने के बाद, ममता बनर्जी को एक ऐसे ही विकल्प की बेसब्री से तलाश थी जो कि मुकुल रॉय और बीजेपी दोनों को मुंहतोड़ जवाब दे सके। ममता बनर्जी की यह तलाश अब जाकर ठहरी है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी पर। गौरतलब है कि ममता बनर्जी 2011 में बंगाल तो जीत गईं लेकिन मुर्शिदाबाद में 2017 तक राज नही कर पाई। इसके पीछे एकमात्र वजह हैं अधीर रंजन चौधरी। ऐसे में उन्होंने अपने दूतों के जरिये अधीर रंजन चौधरी तक यह संदेश पहुंचा दिया है कि आपका तृणमूल कांग्रेस में हार्दिक स्वागत है। दरअसल, इसके जरिए ममता एक तीर से कई निशाना कर पाने में सफल होंगी। मुकुल व बीजेपी दोनों को मुंहतोड़ जवाब और कांग्रेस को भी हाशिये पर धकेलने में कामयाब होंगी। यहां यह याद दिलाना लाजमी होगा कि इसके पूर्व ममता बनर्जी, सोमेन मित्रा के जरिये कांग्रेस व सोमेन मित्रा दोनों की ही राजनीति को हासिये पर धकेलने में कामयाब रही हैं। वैसे भी ममता को बंगाल में एक ही कांग्रेस पसंद है और मुकुल रॉय ने भी 11 अक्टूबर को कहा था कि दोनों कांग्रेस का विलय क्यों नही हो जाता।

टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल हुए मुकुल राॅय

 

अधर में लटकी है अधीर रंजन चैधरी की राजनीति

पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बेहद दुविधा में हैं। इन्हें अध्यक्ष सिर्फ इसलिए बनाया गया था, ताकि वो ममता बनर्जी का मुकाबला कर सकें। अधीर रंजन चौधरी जहां तक उनके गृह जिला मुर्शिदाबाद का सवाल है, ममता बनर्जी से हमेशा बीस साबित हुए हैं। अब लेकिन राजनीतिक हालात व परिस्थिति बदलने के बाद कांग्रेस आलाकमान वही फैसला लेगा जो ममता बनर्जी को भायेगा। ऐसे में अब इनके पास तीन विकल्प हैं, पहला- कांग्रेस छोड़ नया दल गठन कर लें। हकीकत तो यह है कि यह इनके वश की बात नही है। दूसरा- बीजेपी में शरीक हो जाएं, लेकिन इनका चाल चरित्र व चेहरा बीजेपी से मेल नही खाता। तीसरा- कांग्रेस में बने रहें लेकिन यह सम्भव नही है, यदि वह साथ नहीं आते हैं तो ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी इन्हें शायद ही स्वीकार करें। कांग्रेस आलाकमान भी वही फैसला लेगा जो ममता बनर्जी को पसंद हो। पूरी संभावना है कि 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस व तृणमूल कांग्रेस मिलकर लड़ें। आखिर दोनों के ही मुख्य शत्रु बीजेपी ही है। ऐसे में अधीर रंजन चौधरी के पास भी विकल्प सीमित है, इनकी भावी राजनीति पूरी तरह ममता बनर्जी के इच्छा पर ही टिकी हुई है।

 










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