एक्टिविस्टों की नजरबंदी 19 सितंबर तक बढ़ी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-फर्जी स्टोरी लगने पर रद्द कर देंगे मामला

मुद्दा , नई दिल्ली, सोमवार , 17-09-2018


activist-supreme-court-arrest-govt-maharashtra

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक्टविस्टों की घर में नजरबंदी की अवधि को 19 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। जबकि सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट को दखल करार देते हुए उसका विरोध किया है।  

दखलंदाजी के सरकार के आरोप का जबाव देते हुए कोर्ट ने कहा कि “हम निश्चित रूप से तथ्यों को देखेंगे। रिकार्ड देखेंगे। आरोप क्या हैं और इस बात को देखेंगे कि क्या सचमुच में कुछ असलियत है भी या नहीं। अगर हमें लगा कि नकली रूप से बनायी गयी बिल्कुल फर्जी स्टोरी है तो हम रद्द कर देंगे.....अगर इसमें दखल की जरूत पड़ती है तो हम इसको देखेंगे।”

गौरतलब है कि पुणे पुलिस द्वारा पांच एक्टिवस्टों को गिरफ्तार किए जाने के बाद इतिहासकार रोमिला थापर समेत कई दूसरे लोगों ने उनकी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व में जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच कर रही है। सरकार ने बेंच से कहा कि “हर मुकदमा सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकता है। ये गलत प्रक्रिया है। तब हर केस सुप्रीम कोर्ट आने लगेगा।” सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की सुनवाई के लिए अलग से कोर्ट मुकर्रर करने की मांग की। उसने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले को देखेगा तो ये खतरनाक बात होगी। याचिकाकर्ताओं का हवाला देते हुए महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि कोर्ट अनजाने लोगों को संज्ञान में नहीं ले सकती है।

इस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि कोर्ट याचिका को स्वतंत्रता की रक्षा के लिए स्वीकार करती है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस ने 28 अगस्त को पांचों एक्टिविस्टों के घरों पर छापे मारकर उन्हें गिरफ्तार किया था। लेकिन अभी उन्हें पुलिस पुणे ले जाती उससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को इनके घरों में नजर बंद रखने का आदेश दे दिया। इन सभी पर भीमा कोरेगांव मामले में हुई हिंसा से जुड़े आरोप लगाए गये हैं। गिरफ्तार एक्टिविस्टों में सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वरवर राव, वरनन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा शामिल हैं।










Leave your comment