पंजाब के बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में भी लेफ्ट का परचम,उपाध्यक्ष पर आइसा की जीत

एक नज़र इधर भी , , शनिवार , 08-09-2018


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इंद्रेश मैखुरी

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर (गढ़वाल) उत्तराखंड के छात्र संघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर आइसा के अंकित उछोली  विजयी रहे हैं।

यह जीत आइसा द्वारा पिछले पूरे सत्र में छात्र हितों के लिए किए गए संघर्षों की जीत है, जिसे आइसा के प्रत्याशी अंकित उछोली की लोकप्रियता ने और सुगम बनाया। बीते सत्र में आइसा ने लाइब्रेरी को 5 बजे के बाद भी खोले जाने के लिए लाइब्रेरी भरो आंदोलन चलाया। छात्राओं के छात्रावासों के बंद होने का समय 5 बजे शाम से बढ़वा कर 8 बजे शाम करवाने के लिए आइसा ने संघर्ष किया और जीत हासिल की।

छात्र हितों के ऐसे छोटे-छोटे मुद्दों से लेकर शिक्षा-रोजगार के व्यापक सवालों पर आइसा आंदोलनात्मक पहलकदमियां लेता रहा। इसके अलावा श्रीनगर (गढ़वाल) में शराब विरोधी आंदोलन  से लेकर नगर में पीने के साफ पानी और चिकित्सा सेवाओं के सुधार के लिए चले आंदोलन में आइसा के साथियों ने भागीदारी की। शराब विरोधी आंदोलन में तो आइसा के साथियों पर मुकदमे भी दर्ज हुए।

लिंगदोह समिति की सिफारिशें लागू होने के बावजूद छात्रसंघ का चुनाव धन बल के भौंडे प्रदर्शन के लिये भी चर्चा में रहा। इसके बीच में आइसा ने बेहद सादगी के साथ हाथ से बने कलात्मक प्रचार सामग्री के साथ चुनाव लड़ा। छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं आम नागरिकों से धन संग्रह करके चुनाव लड़ने के लिए संसाधनों की व्यवस्था की।

अंकित उछोली के लिए प्रचार।

जहां आइसा साल भर की आंदोलनात्मक उपलब्धियों और शिक्षा-रोजगार के लिए संघर्ष के एजेंडे के साथ चुनाव मैदान में था, वहीं विरोधियों ने कम्युनिस्टों के देशद्रोही होने जैसे घिसे-पिटे जुमलों और झूठी अफवाहों के दम पर आइसा को हराने के लिए पूरा जोर लगाया।

युवा सिर्फ भाजपा आईटी सेल और उसकी विध्वंसक राजनीति के साथ ही नहीं हैं बल्कि क्रांतिकारी लाल झंडे के प्रति भी उनका रुझान निरंतर बना हुआ, यह जीत इसका एक और उदाहरण है। इस जीत में आम छात्र-छात्राओं की बड़ी भागीदारी थी। इसलिए जब जीत का जुलूस शुरू हुआ तो वह "जीत गया भई जीत गया" टाइप परंपरागत नारों से शुरू हुआ, लेकिन फिर "इंक़लाब जिंदाबाद", "नई सदी का नया खून है- आइसा, आइसा", "लड़ो पढ़ाई करने को,पढ़ो समाज बदलने को" "शिक्षा-रोजगार के लिए कौन लड़ेगा-आइसा, आइसा", "शिक्षा पर जो खर्चा हो,बजट का दसवां हिस्सा हो" जैसे नारों ने इस विजय जुलूस को आइसा के तेवरों से लैस कर दिया।

आइसा के साथियों को जीत की बधाई। उम्मीद है कि यह जीत छात्र हित और जनहित के मुद्दों पर आइसा की पहलकदमियों को नई बुलंदियों तक पहुंचाएगी।

(इंद्रेश मैखुरी हे.नं.ब. (गढ़वाल) विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे हैं। और आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं।)

 








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