मैंने कभी सोचा नहीं कि मेरी छवि को दागदार बनाने के लिए सरकार इस हद तक जा सकती है नीचे- तेलतुंबडे

ज़रूरी बात , , मंगलवार , 04-09-2018


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आनंद तेलतुंबडे

(आनंद तेलतुंबडे चर्चित लेखक हैं और दलित से लेकर तमाम दूसरे सामाजिक सवालों पर बेबाक तरीके से लिखते रहते हैं। मानवाधिकारवादियों के खिलाफ चलाए गए सरकार के अभियान के दौरान पुणे पुलिस ने गोवा स्थित उनके घर पर भी छापा मारा था। आपको बता दें कि तेलतुंबडे आजकल वहीं गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में अध्यापन कर रहे हैं। पुलिस की इस हरकत से तेलतुंबडे बेहद परेशान हो गए हैं और उन्होंने इस संदर्भ में कई पत्र लिखा है। अभी जब महाराष्ट्र पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान रोना विल्सन के पास से मिले कथित पत्र से उनको भी जोड़ने की कोशिश की तो उनकी परेशानी और बढ़ गयी। उन्होंने उसे पूरी तरह से झूठा, आधारहीन और मनगढ़ंत करार दिया है। इसी मसले पर उन्होंने “दि सिटीजन” पोर्टल को एक पत्र लिखा था जो मूल रूप में अग्रेंजी में था। जनचौक ने उसे यहां हिंदी में देने का फैसला किया है-संपादक)

एक मित्र ने हिंदू में प्रकाशित खबर की एक क्लिप मुझे ह्वाट्सएप किया। जिसमें एक्टिविस्ट ने “विदेश में बैठक की: पुलिस” के हेडिंग के तहत मेरे बारे में लिखा गया था कि “गिरफ्तार आरोपी ने दावा किया कि भीमा-कोरेगांव दंगों के दौरान उन्हें हिंसा और तनाव को बढ़ाने के साथ ही अधिक से अधिक दलित नौजवानों के मौत की जरूरत थी। श्री सिंह ने ये दावा आनंद तेलतुंबडे द्वारा विल्सन को इस साल के जनवरी में लिखे गए कथित पत्र को पढ़ते हुए किया। श्री सिंह के मुताबिक पत्र कहता है कि “यही समय है हमें एक बड़े हमले को अंजाम देना चाहिए जैसा कि वीवी (वरवर राव) और सुरेंद्र ने सुझाव दिया है।” ये बात उन्होंने श्री राव के निर्देश पर 80 गाड़ियों के जलाए जाने के संदर्भ में कही।

मेरी छवि को नुकसान पहुंचाने के मकसद से पुलिस द्वारा फैलाए जा रहे इस तरह के झूठ को देखकर मैं अवाक हूं। मैं ये बताना चाहता हूं कि हालांकि रोना को मैं जेएनयू के दिनों से ही जानता हूं और उसके बाद एक कार्यकर्ता के तौर पर भी लेकिन मैंने आज तक उनको एक ई-मेल तक नहीं लिखा है पत्र की बात तो छोड़ दीजिए।

ये बेहद परेशानी पैदा करने वाला है कि मेरे जैसे एक रक्षा रहित नागरिक की छवि को दागदार बनाने के लिए सरकार इस हद तक नीचे जा सकती है जिसे यहां तक कि सपने में भी इस तरह की विचित्र गतिविधियों से नहीं जोड़ा जा सकता है। मैं आईआईएम अहमदाबाद का विद्यार्थी रहा हूं और मेरा पूरा कैरियर कारपोरेट की दुनिया में बीता है। जिसमें मैनेजिंग डायरेक्टर से लेकर एक होल्डिंग कंपनी के सीईओ तक का सफर तय किया हूं।

यहां तक कि उसके बाद जब आईआईटी खड़गपुर ने मुझे अपने फैकल्टी के तौर पर ज्वाइन करने के लिए बुलाया तो मैं वहां पांच साल तक बिजनेस मैनेजमेंट पढ़ाया। इस साल मैंने मैनेजमेंट में भारत का पहला बड़ा डाटा एनालिटिक्स प्रोग्राम लांच किया। क्या कोई समझदार शख्स मेरे जैसे इस पृष्ठभूमि वाले को इस तरह की विचित्र कहानियों से जोड़ सकता है जैसा कि कथित पत्र के जरिये करने की कोशिश किया गया है।

पहले ही कैंपस में स्थित मेरे घर में रेड डालकर उन्होंने छात्रों के सामने मेरी प्रतिष्ठा को ध्वस्त कर दिया है। और इसके साथ ही उनके कैरियर को भी खतरे में डाल दिया है क्योंकि किसी न किसी रूप में वो भी मेरी प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। मेरा परिवार, मेरा बड़ा मित्रों का दायरा, मेरे कारपोरेट संपर्क सारी चीजें इस झूठे अभियान के साथ ध्वस्त हो गयीं। पुलिस ने इसे चाहे जिस भी मंशा से लांच किया हो। 

मैंने कुछ पत्रकारों से सुना कि पुलिस प्रवक्ता ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में मेरे विदेश दौरों को इस तरह से पेश किया जैसे इनका मकसद पैसा इकट्ठा करना था। मैं एक प्रतिष्ठित स्कालर हूं और विश्विविद्यालयों के निमंत्रण पर बाहर जाता हूं और ये सभी टूर पूरी तरह से दस्तावेजीकृत हैं। अगर संक्षेप में कहें तो सरकार के एजेंटों द्वारा इस तरह का जानबूझ कर फैलाया जा रहा झूठ और अफवाह इस देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है।

मैं आप से निवेदन कर सकता हूं कि इस तरह की आधारहीन और ऊल-जलूल पुलिस की कहानियों को मीडिया में जगह नहीं दें खासकर वो लोग जिनकी अभी भी जनता के बीच कुछ साख बनी हुई है।



 








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