कवि और सामाजिक कार्यकर्ता अंशु मालवीय को इलाहाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार!

ज़रा सोचिए... , नई दिल्ली, शुक्रवार , 08-02-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और कवि अंशु मालवीय को इलाहबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनएसएस (एनएसए) लगाने की धमकी देते हुए गिरफ़्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि उन्हें झूंसी थाने में रखा गया है। अंशु मालवीय कुम्भ मेला क्षेत्र में न केवल सफाई कर्मचारियों के साथ होने वाली ज्यादती के खिलाफ लड़ रहे थे बल्कि उनको उचित वेतन देने की लड़ाई की अगुवाई भी कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि अंशु पर किसी पुराने मामले में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। दरअसल कुंभ मेला में एक सफाई कर्मी की मौत हो गयी थी। साथ ही एक अन्य कर्मी की किसी साधु द्वारा पिटाई के चलते हाथ टूट गया था। इन दोनों मामलों को लेकर सफाई कर्मी हड़ताल पर चले गए थे। और उसी हड़ताल की अगुवाई अंशु मालवीय भी कर रहे थे।

गिरीश मालवीय के हवाले से अंकित अमलतास ने इस मामले में विस्तार से जानकारी दी है। अपने फेसबुक वाल पर उन्होंने लिखा है कि “इलाहाबाद में पिछले हफ्ते सफाई कर्मचारियों की हड़ताल थी, जिसकी अगुवाई कर रहे सफाई कर्मचारियों के नेता दिनेश को तीन दिन पहले पुलिस ने उठा लिया। अंशु मालवीय को मेला अधिकारी ने उसी दिन धमकाया कि तुम्हारे ऊपर रासुका लगा देंगे, अंशु भी सफाई कर्मचारियों के आंदोलन में सक्रिय थे।

आज सिरजन के पंडाल में गांधी पर कठपुतली नाटक बस शुरू ही होने वाला था, कि पुलिस एक इनोवा गाड़ी से, जिसमें काले शीशे लगे हुए थे, सभी पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे, वे सफाई कर्मचारियों के नेता 'दिनेश' को लेकर आए और अंशु मालवीय को उसी से फोन करवाकर पंडाल के सामने रोड पर बुलवाया, और फिर बेहद बदतमीजी के साथ धक्का देते हुए उन्हें गाड़ी में बैठा लिया।

फिर अंदावा मोड़ के पास बिना नंबर की एक टाटा सूमो गाड़ी जिस पर काले शीशे चढ़े थे, वह भी उस इनोवा गाड़ी के साथ लग गयी।  झूंसी थाने की पुलिस से लेकर इलाहाबाद के बड़े अधिकारी तक कोई भी अभी तक गिरफ्तारी का कारण नहीं बता रहा है”।

वैसे भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे में एस्मा लगा दिया है। इसका मतलब है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकता है। और इस तरह की कोई भी कोशिश गैरकानूनी करार दे दी जाएगी। अंशु की गिरफ्तारी को भी इसी के आइने में देखी जा रही है। इसके जरिये प्रशासन दूसरे लोगों को इस तरह की चेतावनी देना चाह रहा है कि अगर कोई इस तरह की हरकत की कोशिश भी की तो उससे पहले उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

योगी-मोदी सरकार लगातार जनांदोलनों से जुड़े बुद्धजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लेखकों की आवाज को दबाने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

अंशु मूलत: एक कवि हैं और सामाजिक सरोकार रखने के लिए चलते समाज में होने वाले किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से परहेज नहीं करते हैं। लेकिन बगैर किसी वजह के उन्हें इस तरह से गिरफ्तार करना सरकार के तानाशाही रवैये को ही दर्शाता है। रिहाई मंच के नेता राजीव यादव ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। और प्रशासन से तत्काल उन्हें छोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो सूबे में योगी सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।










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Umesh Chandola :: - 02-08-2019
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