आरा में आरके सिंह करवा सकते हैं बड़ी गड़बड़ी, माले ने लगाया आरोप

मुद्दा , नई दिल्ली, बुधवार , 22-05-2019


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जनचौक ब्यूरो

पटना। भाकपा-माले ने आरा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी आरके सिंह द्वारा मतगणना में गड़बड़ी करने की आशंका का आरोप लगाया है। उसने कहा है कि सिंह अपनी संभावित हार के चलते बौखला गए हैं। लिहाजा वह स्वच्छ और निष्पक्ष मतगणना की प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप कर सकते हैं। 

माले ने इस लिहाज से कई उदाहरण भी पेश किया। उसका कहना है कि आरा मुफ्फसिल के थाना प्रभारी जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की कड़ी में ईमानदारी के साथ अपनी भूमिका निभा रहे थे, उन्हें सिंह के इशारे पर लाईन हाजिर कर दिया गया। गौरतलब है कि थाना प्रभारी ने मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले चंदन पांडेय नामक भाजपा के कार्यकर्ता के खिलाफ एक्शन लिया था। जिसके बाद आरके सिंह ने उन पर माले के लिए काम करने का आरोप लगा दिया। माले नेताओं का कहना है कि चूंकि थाना प्रभारी दलित हैं इसलिए आरके सिंह ने ऐसी टिप्पणी की है। जो उनकी घोर जातिवादी-सामंती मानसिकता का परिचायक है। 

इस सिलसिले में माले नेताओं ने क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दिया है। ज्ञापन के मुताबिक यह आम चर्चा है कि जिलाधिकारी-सह-निर्वाचन पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने उनकी धौंस, धमकी और हुक्म मानने से इनकार कर दिया है, इसलिए वह उनको गालियां और धमकियां दे रहे हैं। इस सिलसिले में पार्टी ने कुछ वीडियो भी प्रशासन को मुहैया कराए हैं। 

माले नेताओं का कहना है कि यह एक उम्मीदवार द्वारा अपने मंत्री होने की ताकत और राजसत्ता की शक्ति का दुरुपयोग है और स्पष्ट तौर पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला है। इस सिलसिले में मुख्य चुनाव आयुक्त, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक को आवेदन दिया गया है। और इन लोगों से मांग की गयी है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और जरूरी कार्रवाई करें।

उन्होंने बताया कि भाजपा प्रत्याशी का यह आरोप हास्यास्पद है कि जिला प्रशासन और पुलिस भाकपा-माले और राजद के पक्ष में काम कर रही थी। सच तो यह है कि भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ही कई जगह बूथ कब्जा करने की कोशिश की या बोगस वोटिंग की। एकाध जगह इसी कारण पुलिस प्रशासन से उनका टकराव हुआ। 

पार्टी नेताओं का कहना है कि आरके सिंह का सामंती चरित्र और भूतपूर्व नौकरशाह होने का दंभ अब जगजाहिर हो चुका है। पहले तो उन्होंने सामंती ताकतों का मनोबल बढ़ाया, जिसके कारण चुनाव प्रचार के दौरान माले कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले हुए। 9 मई को जीरो माइल पर पार्टी की प्रचार गाड़ी का बैनर फाड़ दिया गया, जिसके खिलाफ एफआईआर किया गया। इसमें पुलिस ने एक बाइक पकड़ी है, जिसका नंबर बीआर3वाई3926 है। 

संदेश विधान सभा के नवादा बेन में 10 मई को भाजपा समर्थक सामंती लोगों ने माले की प्रचार गाड़ी पर हमला किया। उन लोगों ने विशाल पासवान नामक एक नौजवान कार्यकर्ता को चाकू मार दिया, जिनका अभी भी पीएमसीएच पर इलाज चल रहा है और माले नेता जोगेंद्र राम एवं दो नौजवान उमेश पासवान और आकाश कुमार भी इस हमले में घायल हुए। 14 मई को तरारी विधानसभा के तिलाठ मुसहरटोली में प्रचार कार्य करने नहीं दिया गया। भाजपा समर्थक प्रमोद सिंह, पिता देवलाल सिंह ग्राम- राममोहन टोला ने गोली मारने की धमकी तक दे डाली । 18 मई की रात को आरा विधानसभा के जमीरा पंचायत के लच्छनपुर में भाकपा-माले समर्थक दलित नौजवान प्रमोद कुमार पर कुंदन सिंह बोनी सिंह, विकास सिंह और रवि सिंह ने हमला कर करके उनका सिर फाड़ दिया। उसे अभी भी धमकी दी जा रही है। लेकिन उनके खिलाफ अभी भी केस नहीं दर्ज किया गया। 

18 मई को ही बड़हरा विधानसभा के हेमतपुर गांव में पोलिंग एजेंट रजनीश यादव सहित कमजोर वर्ग के मतदाताओं के घरों पर पर्चा साट दिया गया जिसमें कहा गया था कि राजपूत समाज द्वारा फैसला लिया गया है कि पिछड़ा समाज का कोई वोट देने न आए, अन्यथा इसका बुरा परिणाम भुगतना होगा। यहीं पर दोपहर बाद पोलिंग एजेंट को भगाकर बूथ कब्जा कर लिया गया। 18 मई की सुबह अगिआंव विधासभा क्षेत्र के बड़गांव में अपराधी रिंकू सिंह और उसका गिरोह बड़ी संख्या में हथियारबंद होकर गरीबों के टोले में घूम-घूमकर वोट न देने की धमकी देता हुआ देखा गया। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेंद्र झा, केंद्रीय कमेटी सदस्य मीना तिवारी और स्थाई समिति सदस्य राजाराम शामिल थे।








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