चार मुख्यमंत्रियों के साथ आने के बाद दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज, आप का आज प्रधानमंत्री आवास तक मार्च

राजनीति , , रविवार , 17-06-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल छह दिन से उप राज्यपाल सचिवालय में धरना दे रहे हैं। उनके साथ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री गोपाल राय और सत्येंद्र जैन भी धरने पर बैठे हैं। उप राज्यपाल अनिल बैजल और केंद्र सरकार इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए कोई पहल नहीं कर रही है। उप राज्यपाल का कहना है कि केजरीवाल दिल्ली में जिन समस्याओं की बात कर रहे हैं,वैसा दिल्ली में कुछ भी नहीं है। सारे अधिकारी काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार के कान में भी जूं नहीं रेंग रहा है। ऐसे में आम आदमी पार्टी ने आज प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने का फैसला किया है।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता ने कहा-

‘‘दिल्ली की जनता द्वारा चुनी गई सरकार को काम नहीं करने दिया जा रहा। प्रधानमंत्री और उप राज्यपाल पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। कांग्रेस भाजपा की बी टीम बन गई। जनता कह रही है कि आप पार्टी की सरकार को काम करने दिया जाए। लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर शांत है। हम अपनी आवाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने के लिए रविवार शाम 4 बजे मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से मार्च शुरू करेंगे।’’

केजरीवाल सरकार का आरोप है कि मुख्यमंत्री आवास पर मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित मारपीट के बाद दिल्ली के अधिकारी कैबिनेट की बैठक में नहीं आ रहे हैं। वे हड़ताल पर हैं और सहयोग नहीं कर रहे हैं। दूसरी तरफ केजरीवाल और उनके मंत्रियों के धरने के विरोध में आप से निलंबित विधायक कपिल मिश्रा, भाजपा सांसद प्रवेश साहिब वर्मा और दो भाजपा विधायक भी मुख्यमंत्री कार्यालय में 4 दिन से हड़ताल पर बैठे हैं। कांग्रेस भी केजरीवाल के धरने को नौटंकी बता रही है। 

दिल्ली के उप राज्यपाल और केंद्र सरकार भले ही केजरीवाल की बात सुनने से इनकार कर रहे हों लेकिन देश भर में यह गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है। केजरीवाल के भूख हड़ताल के समर्थन में कल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू और केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने शनिवार को दिल्ली पहुंचकर केजरीवाल के मांगों को जायज ठहराया। वे केजरीवाल से मिलना चाहते थे। लेकिन उप राज्यपाल ने मिलने की इजाजत नहीं दिया। इसके बाद चारों मुख्यमंत्री शनिवार रात केजरीवाल के परिवार से मिले। इसके बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेस की। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि दिल्ली सरकार की मांगें मानी जानी चाहिए। वहीं, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि एक चुनी हुई सरकार को काम करने देना चाहिए। 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा- 

’’हमने उप राज्यपाल को लेटर लिखकर वक्त मांगा था, पर कोई जवाब नहीं मिला। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। चारों मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलना चाहते हैं। विपक्षी पार्टियों की सरकारों के कामकाज में केंद्र को दखल नहीं देना चाहिए।’’

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने कहा-

’’हम यहां दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने आए हैं। लोकतंत्र में केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों पर लगाम लगा रही है। राज्य सरकार पर प्रतिबंध लगाना, दिल्ली ही नहीं देश के लिए खतरा है।’’

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा-

’’लोकतंत्र में दलों के बीच मतभेद होते ही हैं। कोई मुख्यमंत्री उपराज्यपाल से मिलने का वक्त मांगे और वे 6 मिनट का समय भी न दें तो किसके पास जाएंगे। आज संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। दिल्ली की जनता परेशान है। चुनाव के लिए जनता पर छोड़ दें कि वे किस पार्टी को चुनते हैं। एक मुख्यमंत्री 6 दिन से धरने पर बैठा है, तो समझ सकते हैं कि देश का भविष्य क्या होगा।’’

चारों मुख्यमंत्रियों ने कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा और अन्य मुद्दों,जिसकी वजह से गतिरोध बना हुआ है, उस पर हम रविवार को नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाएंगे। इससे पहले चारों मुख्यमंत्रियों ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर दिल्ली के मुद्दे पर बात करने के लिए वक्त मांगा था, लेकिन कहा गया कि वे बाहर हैं। इसलिए नहीं मिल सकते।चारों मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को दिल्ली का गतिरोध दूर करने के लिए पहल करनी चाहिए।

 

 

 




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