ये अघोषित नोटबंदी तो नहीं? गायब हुए एटीएम से नोट, देश में मचा चौतरफा हाहाकार

मुद्दा , , मंगलवार , 17-04-2018


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गिरीश मालवीय

ये अघोषित नोटबंदी तो नहीं? गायब हुए एटीएम से नोट, देश में मचा चौतरफा हाहाकार

यह अघोषित रूप से नोटबन्दी ही है पूरे उत्तरी भारत में लोग सोशल मीडिया के जरिए बता रहे हैं कि एटीएम में पैसा नहीं है, उनके गांवों शहरों में 70 से 80 फीसदी एटीएम खाली पड़े हुए हैं। चलिए एटीएम की ही बात होती तो माना जा सकता था कि कोई बड़ी बात नहीं है। अक्सर ऐसी समस्या होती रहती है लेकिन कई जगहों पर एसबीआई की ब्रांचों में कैश की किल्लत बताई जा रही है। ब्रांच में भी डिमांड पर पैसा टुकड़े टुकड़े में ही उपलब्ध कराया जा रहा है। शहरों में तो फिर कैसे न कैसे इंतजाम हो रहा है पर ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह त्राहि त्राहि मची हुई है।

बड़े पैमाने पर लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन मजाल है कि मोदी सरकार के कानों पर जू भी रेंग जाए। वित्तमंत्री जी के बोल सुनिए वित्तमंत्री अरुण जेटली कह रहे हैं कि देश में ऐसी कोई किल्लत नहीं है। अर्थव्यवस्था में पर्याप्त मात्रा में कैश फ्लो बना हुआ है।

चिरपरिचित अंदाज में ट्वीट करते हुए जेटली साहब कह रहे हैं कि "हमने देश में कैश फ़्लो की स्थिति का जायजा लिया है। इस समय देश में पर्याप्त मात्रा में नकदी बाज़ार में और बैंकों में मौजूद है. करेंसी में अस्थाई कमी की वजह कुछ इलाकों में इसकी मांग में 'अचानक और असामान्य वृद्धि' है।"

लेकिन सच्चाई यह नहीं है बैंक शाखा प्रमुख भी व्यक्तिगत बातचीत में स्वीकार कर रहे हैं कि रिजर्व बैंक की ओर से नकदी का प्रवाह घट जाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

कल अक्षय तृतीया है इसे जन साधारण की भाषा मे आखातीज भी बोलते हैं, इस दिन बिना मुहूर्त के भी शादियां हो जाती हैं, बड़े-बड़े धन्ना सेठों की शादियां सर्दियों में होती हैं और देश का श्रमजीवी वर्ग अक्सर गर्मियों में ही शादी निकालता है, इस कारण से बड़ी संख्या में लोग अपना जमा पैसा निकालने पुहंच रहे हैं। तो इसमें सरकार को असाधारण स्थिति दिखाई दे रही है। बोल रही है कि अचानक से लोग पैसा क्यों निकाल रहे हैं।

जैसे कुछ समय पहले हर घटना में विदेशी हाथ होने की घोषणा कर दी जाती थी ऐसे ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को एटीएम में नोट नहीं होने में भाजपा के खिलाफ षणयंत्रकारी 'हाथ' दिख रहा है, उनकी अक्ल की तो वाकई में बलिहारी है।

ऐसी भी चर्चा है कि 2000 के नोट बैंको द्वारा री सर्कुलेट नहीं किये जा रहे हैं और दो हजार के नोटों की छपाई भी बंद कर दी गयी है और जो नए 200 के नोट रिजर्व बैंक ने बाजार में डाले हैं, उसको डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए एटीएम में अभी तक जरूरी व्यवस्था नहीं की गयीं हैं। अभी तक महज 30 फीसदी एटीएम ही 200 रुपये को लेकर कैलीब्रेट हो सके हैं। यानी 70 फीसदी एटीएम 200 का नोट उगलने में सक्षम ही नहीं हैं।

ऐसे में संकट और भयानक रूप अख्तियार कर रहा है और एक बात कही जा रही है कि बढ़ते एनपीए ने बैंकों की साख को हिला दिया है। इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है इससे भी पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है।

देश के गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय आदमी के लगातार बद से बदतर होते हालात का जिम्मेदार कौन है, खुद ही समझ लीजिए।

एटीएम के कैशलेस होने पर कुछ और महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं:








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