सीएम के गृह जिले में ही नहीं सुरक्षित हैं बैगा आदिवासी, सरकारी अमले ने की उत्पीड़न की सारी सीमाएं पार

विशेष , कवर्धा (छत्तीसगढ़), मंगलवार , 10-07-2018


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तामेश्वर सिन्हा

कवर्धा (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में विशेष संरक्षित बैगा आदिवासियों के साथ जानवरों जैसा सलूक किया जा रहा है। पिछले एक साल से लगातार उनके साथ मार-पीट की जा रही है। बीती 3 जुलाई को इन सारी सीमाओं को पार करते हुए वन अमला समेत पुलिस के संरक्षण में तकरीबन 200 से ज्यादा लोगों ने लाठी-डंडों के साथ बैगा आदिवासियों के घरों पर हमला बोलकर उन्हें आग के हवाले कर दिया। आपको बता दें कि कवर्धा मुख्यमंत्री का गृहजिला है। 

बैगा आदिवासियों ने बताया कि पहले उन्हें बेहरमी से पीटा गया जिसमें 30 से ज्यादा बैगा महिलाएं और पुरुष बुरी तरह से घायल हो गए। फिर उनके समानों को घरों से बाहर फेंक दिया गया। पशुओं को खदेड़ा गया फिर उन्हें पिकअप-ट्रैक्टर में जबरन भेड़-बकरियों की तरह डाल कर दूर भगा दिया गया। नागड़बरा के बैगा आदिवासियों के मुताबिक पुलिस घटना को रोकने की बाजए दबंगों का साथ देती रही। यहां तक वन अमले ने भी बैगा आदिवासियों के आशियाने को तोड़ने और उजाड़ने में पूरा साथ दिया। सूत्रों की मानें तो बैगा आदिवासियों के घरों को उजाड़ कर जलाने में वन अमले और पुलिस की मिलीभगत रही। आदिवासियों के अनुसार वन विभाग द्वारा पहले आस-पास के गांवों में जमीन कब्जा करने का अफवाह उड़ाया जाता है और फिर उन्ही गांव वालों को उनके विरुद्ध कर हिंसा का माहौल तैयार किया जाता है।  

पूरा मामला सरकार के विकास के दावे से शुरू होता है, पूर्व में 3 साल पहले पंडरिया ब्लाक बिरहुलडीही पंचायत के लिपटी,नवाटोला, कराहुल, बिरहुल गांव के 50 बैगा आदिवासी परिवारों को पूर्व एसडीएम द्वारा मठापुर पंचायत के नागाडबरा गांव की भूमि पर जमीन देकर बसाया गया था। बैगा आदिवासी परिवार अपना गांव इस कारणवश छोड़ना चाहते थे कि उन गांवों में सरकार ने आज तक बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं उपलब्ध करा पायी थी। बैगा आदिवासियों का घर उन गांवों बसा था जहां मोटी-मोटी चट्टानें और पहाड़ियां थीं। खेती भी बैगा आदिवासी नहीं कर पा रहे थे। तमाम समस्यायों से जूझते आदिवासियों ने एक दिन पूर्व एसडीएम को अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

बैगा आदिवासी। फाइल फोटो।

एसडीएम ने समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पंडरिया ब्लाक में स्थित राजस्व भूमि चिन्हित कर (12 जगह राजस्व भूमि पाई गई) उनके सामने 12 गांवों में से एक गांव में बसने का प्रस्ताव रखा। इस पर बैगा आदिवासियों ने मठापुर पंचायत के नागाडबरा गांव में बसने की सहमति दे दी। बैगा आदिवासियों ने रहने लायक जमीन लेकर वहां अपनी छोटी-छोटी झोपड़ी बना ली। एक बैगा आदिवासी का कहना था कि जब से वो नागाडबरा में बसे हैं तभी से वन विभाग के लोगों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। आस-पास के गांव वालों को भड़का कर उनके खिलाफ कर दिया गया है। और फिर उनके द्वारा अक्सर उन लोगों की पिटाई की जाती है। 

आप को बता दें कि कवर्धा जिले के तहत यह पहला मामला नहीं है, नागाडबरा के बैगा आदिवासियों के घर जलाने की घटना के दूसरे दिन 4 जुलाई को 17 सालों से रह रहे बैगाओं को भी इसी तरह की धमकी दी गयी। उनके खेतों में जबरन ट्रैक्टर चला कर उन पर कब्जा कर लिया गया। नागाडबरा के आदिवासियों ने बताया कि 17 साल पहले वे छिन्दडीही गांव से नागाडबरा आकर बसे थे। उनके पास वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन अधिकार का पट्टा भी है। यहां लगभग 50 आदिवासी परिवार निवासरत हैं। 

माठपुर गांव के बैगाओं ने बताया कि वो पिछले कई सालों से इसी गांव में रह रहे हैं। गांव के बाहर जंगल में जमीन समतल करने के बाद उस पर खेती कर अपना गुजारा करते हैं। रहने के लिए उन्होंने मकान, झोपड़ी भी बनाए हैं। लेकिन उन मकानों और झोपड़ियों को भी वन, पुलिस और राजस्व अमले के लोगों ने तोड़ दिया। जब आदिवासियों ने मना किया तो उनसे मारपीट की गई है। बैगाओं की मांग है कि उन्हें उसी गांव में रहने के लिए घर और खेती के लिए जमीन का पट्टा दिया जाए। ताकि वे अपने परिवार के साथ रह सकें। वहीं मनमानी करने वाले सरकारी विभागों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग बैगाओं ने की है। बैगा आदिवासियों ने आगे कहा है कि प्रशासन दोषी लोगों के ऊपर अगर कार्रवाई नहीं करता है तो वो अपना सारा सामान लेकर कलेक्ट्रेट ऑफिस में रहेंगे। 

बहरहाल क्षेत्र में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा आदिवासी डर-भय के साए में जीने को मजबूर हैं। अपने आशियानों को अपनी आंखों के सामने जलता हुआ देखने के बाद अब वो जंगल में दर-दर भटकने के लिए मजबूर हैं।

(तामेश्वर सिन्हा पेशे से पत्रकार हैं और अपनी जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।)






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Humendraraj :: - 07-11-2018
Jay Birsha. Bahut badhiya reporting. Ground information has. This is reality of cm home district in chhattisgarh