बलिया में दलित महिला को जलाने का मुख्य आरोपी अभी भी फरार, बीजेपी नेताओं पर संरक्षण देने का आरोप

ज़रा सोचिए... , बलिया/ वाराणसी, रविवार , 11-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

बलिया/ वाराणसी। बलिया के भीमपुरा थाने के गांव जजौली में गुरुवार की रात दलित महिला को सूदखोरों द्वारा जिंदा जलाए जाने की घटना के बाद इलाके में दहशत है। कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के लोगों ने घटनास्थल का दौरा किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। 

सीपीआई (एमएल) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बनारस के जिला अस्पताल में भर्ती महिला से मुलाकात की। जबकि रिहाई मंच की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। रिहाई मंच के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निवासी बृजेश से घटना के संबंध में बात की। घटनास्थल पर तैनात पुलिस पीड़ितों से मिलने नहीं दे रही है। क्योंकि वो नहीं चाहती कि मामले की असलियत सामने आए। लेकिन प्रतिनिधिमंडल में गए नेताओं की पीड़ित महिला रेशमी की दोनों बेटियों से मुलाकात हुई। 

उन्होंने बताया कि रेशमी ने इलाके के ही गुड्डू सिंह से पैसा लिया था जिसका लगातार वो सूद वसूल रहे थे। उनका कहना था कि पैसा दिया जा चुका था। बावजूद इसके उनके लोग घर पर आकर अक्सर धमकाते रहते थे। साल भर पहले भी गुड्डू सिंह ने मारपीट की थी। साथ ही जलाने के अलावा घर फूकने की कोशिश की थी। उन लोगों ने घर में आग लगा दी थी लेकिन लोगों ने मिलकर बुझा दिया था। इस घटना के बाद एफआईआर भी दर्ज हुआ, जिसका मुकदमा भी चल रहा है। 

बेटियों के मुताबिक 9 मार्च को कोर्ट में पेशी होने वाली थी। 8 की मध्य रात्रि में गुड्डू सिंह के भाई सत्यम सिंह और उनके साथ बहुत सारे लोग आए थे। वो लोग चाहते थे कि रेशमी कोर्ट में जाकर गवाही न दे। लेकिन रेशमी ने धमकी देने पर कहा कि कोर्ट जाऊंगी और दोषियों को सजा दिलवाऊंगी। उसके बाद वो लोग गुस्से में आकर उनके ऊपर तेल फेंक दिया और फिर आग लगा दी। इस दौरान हमलावरों ने पीड़िता की बच्चियों के साथ मारपीट भी की।

भाकपा माले, राष्ट्रीय इंकलाबी दलित- आदिवासी अधिकार मंच, जन अधिकार मंच, महिला जागृति समिति की सात सदस्यीय संयुक्त टीम पीड़ित दलित महिला से कबीर चौरा स्थित जिला अस्पताल में मुलाकात की। टीम ने पाया कि महिला को लगभग अस्सी फीसदी जला दिया गया है। जांच टीम के मुताबिक इस जघन्य अपराध के पीछ मुख्य रूप से घोर पूंजीवादी लालच और ब्राह्मणवादी, सवर्ण-सामंती घृणा काम कर रही है, जो योगी-मोदी सरकार के संरक्षण फल-फूल रही है। 

साल भर के अंदर दूसरी बार उनके ऊपर हमला किया गया है। यह हमला पहली घटना को लेकर किया गया है। हमलावर ठाकुर जाति के हैं और पीड़िता दलित समुदाय से संबद्ध है। खास बात ये है कि अभी तक मुख्य अभियुक्त गुड्डू सिंह की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 

संगठनों ने भाजपा सरकार में मंत्री उपेंद्र तिवारी और स्थानीय भाजपा विधायक पर दबाव बनाकर अपराधियों को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया है। 

नेताओं का कहना है कि पीड़ित परिवार को पुलिस प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया था कि 24 घंटे के अंदर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन अभी तक केवल दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है और मुख्य अभियुक्त को सरकारी दबाव के चलते जानबूझकर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। 

पीड़ित परिवार पर मुकदमा वापस लेने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पहले वाले हमले के दौरान ही अगर पुलिस प्रशासन ने उचित कार्रवाई की होती तो अपराधियों ने इस तरह का दुस्साहस नहीं किया होता। 

जाँच टीम ने यह भी पाया कि पीड़िता के साथ अस्पताल में कोई भी महिला पुलिसकर्मी मौके पर नहीं थी। 

जाँच टीम में मुख्य रूप से अनूप श्रमिक, मनीष शर्मा, अनिल कुमार मौर्या, विनोद कुमार, फजर्लुरहमान अंसारी, सरताज अहमद, चंद्रिका मौर्या शामिल थे।

जाँच टीम ने माँग की है कि मुख्य अभियुक्त को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़िता और उसके पूरे परिवार की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए। अभियुक्तों को संरक्षण दे रहे संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो और योगी सरकार यह सुनिश्चित करे कि सत्तारूढ़ पार्टी का विधायक और मंत्री पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाना बंद करे। 

डॉक्टरों का कहना है कि पीड़िता की जो हालत है उसका इलाज इस अस्पताल में बेहतर ढंग से संभव नहीं है, अतः उनकी सर्वोत्तम अस्पताल में उपचार की तत्काल व्यवस्था करवाई जाए और पीड़ित परिवार को कम से कम 25 लाख का मुआवजा दिया जाए।






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