बरखा दत्त को पत्रकारिता छोड़ने की मिल रही धमकी, ट्वीट कर साझा किया अपना दर्द

विशेष , , शनिवार , 09-06-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। दो दिन पहले यानी गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने एक एक करके पांच ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल का एक वर्ग काफी दिनों से उन्हें धमका रहा है। यह समूह चाह रहा है कि वह किसी समाचार चैनल से न जुड़ें और न तो किसी नए समाचार चैनल को लाएं। वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त समाचार चैनल की जानी मानी चेहरा हैं। हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता में समान अधिकार रखने वाली बरखा अपने पत्रकारीय सरोकारों के लिए भी जानी जाती हैं। उनकी कई रिपोर्टों से सरकारों की खासा किरकिरी होती रही है। जनपक्षीय और सत्ता विरोधी पत्रकारिता करने का अब उन्हें सबक सिखाया जा रहा है। ‘‘द हिंदू’’ अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक बरखा कहती हैं कि -

‘‘यह सरकार द्वारा मेरे काम में हस्तक्षेप करना है। कई मीडिया मालिकों ने व्यक्तिगत रूप से मुझे बताया है कि भाजपा के शीर्ष लोग मुझे पसंद नहीं करते हैं। इसलिए वे चैनल पर उनका शो जारी रखने का जोखिम नहीं उठा सकते।’’  

बरखा कहती हैं कि उन्हें भाजपा से मित्रवत चेतावनी और सलाह मिल रही है-

कहा जा रहा है कि सरकार ने उन्हें कम झूठ बोलने के लिए कहा है। दिसंबर 2017 में एक प्रमोटर ने उनसे संपर्क किया था, वो एक समाचार चैनल लाने की योजना बना रहे थे। वे चाहते थे कि वह समाचार चैनल शुरू करने के लिए टीम बनाने में मदद करें।  

बरखा अपने ट्वीट में लिखती हैं कि पिछले कुछ महीनों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों ने मुझे विनम्रतापूर्वक और कड़े शब्दों में भी चेतावनी दी है कि अब वह किसी नई टीवी परियोजना पर काम न करें और मुझे बताया कि ‘‘हम यानी सरकार उन्हें कभी भी चैनल शुरू करने की इजाजत नहीं देंगे।’’ आज मुझे बताया गया कि 45 मिनट की एक बैठक में इस पर चर्चा की गयी कि कैसे मुझे रोका जाए, अपमानित और बदनाम करने के साथ ही घेरे में लिया जाए।

द हिंदू अखबार के प्रतिनिधि से बात करते हुए बरखा दत्त ने कहा कि-

सरकार धमकी देने के लिए कानून का सहारा ले रही है। मुझे डराने के लिए सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

गुरुवार को ही किए गए ट्वीट में वह लिखती हैं-

‘‘सत्तारूढ़ दल से लगातार मिल रही धमकी और सलाह के बीच आज हमने इसे सार्वजनिक करने का फैसला किया। क्योंकि मुझे बताया गया कि अब वे मेरे बाद मेरे परिवार को परेशान करेंगे।’’ 

दरअसल, सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों का बरखा को परेशान करने के पीछे कांग्रेस का भय सता रहा है। धमकी देने वालों का दावा है कि कुछ प्रमोटर्स जो नए समाचार चैनल ला रहे हैं उनको फाइनेंस करने वालों में कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल भी एक हैं।

बरखा कहती हैं, ‘‘किसी समाचार चैनल को लाने की मंजूरी के लिए क्या यह सवाल प्रासंगिक होना चाहिए कि इसको आर्थिक मदद करने वाला एक विपक्षी सांसद है? जब तक एक समाचार चैनल सभी नियमों और विनियमों का पालन करता है, तब तक उसे लाइसेंस से इनकार क्यों किया जाना चाहिए? दो भाजपा सांसद सुभाष चंद्र और राजीव चंद्रशेखर हैं जो समाचार चैनल के मालिक हैं और चलाते हैं। पिछले डेढ़ सालों में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मात्र एक समाचार चैनल ‘‘रिपब्लिक टीवी’’ को लाइसेंस दिया है। और उसके संस्थापक राजीव चंद्रशेखर हैं। रिपब्लिक चैनल राजीव के द्वारा वित्त पोषित है। बरखा कहती हैं कि वे अपने-

‘‘काम करने के अधिकार’’ के लिए लड़ने की योजना बना रही हैं। वह कहती हैं कि, ‘‘जब तक मैं कानून नहीं तोड़ती, भाजपा मुझे काम करने से कैसे रोक सकती है?

’’ 

द हिंदू अखबार के प्रतिनिधि ने जब इस धमकी पर पुलिस में एफआईआर करने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि फिलहाल एफआईआर दर्ज करने के लिए उनके पास तकनीकी आधार नहीं है।वह कहती हैं कि कृपया जान लें कि धमकी कई तरीकों से काम करती है। मैं एफआईआर कैसे दर्ज कर सकती हूं, उनके हाथ मीडिया मालिकों तक हैं।बरखा दत्त ने अपने ट्वीट्स में सूचना और प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन राठौर को भी टैग किया था। लेकिन मंत्री ने ट्वीट्स पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।  


 

 










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Mohit :: - 06-10-2018
Himmat mat haro, mat gabrao aandhiyo se Satya Ko Jeet dilana Hoga Yahi waqt ki maang hai Barkhaa Dutt samana karo Bharat Ko todne Bali vichardhara ka