बेल-इन यानी परमानेंट आर्थिक इमरजेंसी, बैंकों में जमा आपके पैसों की लूट की तैयारी

आप के वास्ते , , मंगलवार , 05-12-2017


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अखिलेश अखिल

अगर सब कुछ सरकार के हिसाब से चलता रहा और विपक्ष की तरफ से कोई शोर शराबा नहीं हुआ तो मोदी सरकार बैंकिंग व्यवस्था में एक और कानून लाने जा रही है।  जिसका असर न सिर्फ बैंकों पर पड़ेगा बल्कि बचत खाते में पैसा रखने वाला हर एक ग्राहक इस कानून के दायरे में होगा। इस कानून के बनते ही  'परमानेंट नोटबंदी' का नया वित्तीय ढांचा खड़ा हो जाएगा। अब जनता के पैसे से कंगाल हो चुके बैंकों का कायाकल्प किया जाएगा। घाटे में चल रहे बैंक जनता के पैसे से चलेंगे और कोई भी ग्राहक अपने बचत खाते से अपना ही पूरा पैसा नहीं निकाल सकेगा। 

दरअसल मोदी सरकार फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) 2017 को शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पेश करने की तैयारी में है। चूंकि  लोकसभा में सरकार के पास बहुमत है और मनी बिल होने के चलते इसे राज्यसभा से पास होना जरूरी भी नहीं है। इसलिए बिल के पास होने में किसी समस्या की गुंजाइश नहीं दिख रही है। हालांकि  इस बिल को केंन्द्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान ही संसद में पेश किया था और तब इसे ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) के पास विचार के लिए भेज दिया गया था। जेपीसी ने इस पर कुछ सुझाव दिए हैं। इसी वजह से सरकार अब इस बिल को नए तरीके से फिर से संसद में पेश करने जा रही है। 

इस कानून के बनते ही देश के सभी बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और इंश्योरेंस कंपनियों की चांदी हो जाएगी। उनके दिवालिया होने की समस्या ख़त्म हो जाएगी।  केन्द्र सरकार का दावा है कि यह कानून देश में बैंकिंग और इंसॉल्वेंसी कोड, सरकारी बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन प्लान और इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की मंजूरी के बाद फाइनेंशियल सेक्टर का एक लैंडमार्क रिफॉर्म होगा। 

हमारे देश के बैंक और वित्तीय संस्थानों में डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन कानून लागू है। मौजूदा समय में अलग-अलग बैंकों में जमा आपके पैसे की गारंटी इसी कानून से मिलती है।  इस कानून में एक अहम प्रावधान है कि किसी बैंक के बीमार होने की स्थिति में यदि उसे दिवालिया घोषित किया जाता है तो बैंक के ग्राहकों का डिपॉजिट बैंक को वापस करना होगा। जाहिर है इसी कानून से देश की मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय मानी जाती है। लेकिन केंद्र सरकार अब इस कानून को ख़त्म करने जा रही है। इसकी जगह पर सरकार एफआरडीआई कानून लाने जा रही है। इस नए एफआरडीआई  कानून के जरिए  रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन की स्थापना की जाएगी। फिलहाल किसी बैंक की वित्तीय स्थिति का आंकलन करने और उसे वित्तीय संकट से बाहर निकलने की सलाह  देने का काम रिजर्व बैंक करता था।  लेकिन एफआरडीआई कानून बनने के बाद नया रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन इस काम को करने लगेगा।  रिज़र्व बैंक की भूमिका यहां खत्म हो जाएगी। 

आपको बता दें कि इस नए कानून के आने के बाद जनता की परेशानी बढ़ सकती है। इसे परमानेंट नोटबंदी के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब तक बैंक में वित्तीय संकट की स्थिति पैदा होने पर बैंकों को बेलआउट पैकेज दिया जाता रहा है।  यह बेलआउट पैकेज केन्द्र सरकार अपने खजाने से देती है।  बैंक बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने को कर्ज देकर जब बर्बाद हो जाते हैं तो सरकार बेलआउट पॅकेज देकर बैंकों को ज़िंदा करती रही है। यह बात और है कि तब भी बर्बाद हो चुके बैंकों को बचाने के लिए बेलआउट पॅकेज के नाम पर जनता के पैसे से ही बैंक का जीर्णोद्धार किया जाता है। कर्ज ले कोई और और घाटे की भरपाई करे जनता।  ऐसा ही होता रहा है।  लेकिन अब एफआरडीआई कानून के तहत प्रावधान किया गया है कि अब बेलआउट की जगह बैंक बेल-इन का सहारा ले सकेंगे।  

अब बैंकों के एनपीए की समस्या बढ़ने पर नया रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन यह तय करेगा कि बैंक में ग्राहकों के डिपॉजिट किए गए पैसे में ग्राहक कितना पैसा निकाल सकता है और कितना पैसा बैंक को उसका एनपीए पाटने के लिए दिया जा सकता है। यानी आपके जमा पैसे से कॉर्पोरेट घराने की कर्ज की राशि चुकाई जाएगी।  उदाहरण के तौर वर्तमान में  बैंक में सेविंग खाते में पड़े आपके एक लाख रुपये को आप जब चाहें और जितना चाहें निकाल सकते हैं।  लेकिन नया कानून आ जाने के बाद केन्द्र सरकार नए कॉरपोरेशन के जरिए तय करेगी कि आर्थिक संकट के समय में ग्राहकों को कितना पैसा निकालने की छूट दी जाए और उनकी बचत की कितनी रकम के जरिए बैंकों के  कर्ज को पाटने का काम किया जाए। साफ़ है कि आप जो बचत राशि बैंक में जमा कर रखे हैं उसे अपने मन मुताबिक निकाल नहीं सकते। आपके बचत का एक अंश बराबर बैंक अपने पास रखना चाहेगा। 

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)


 






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SHAMSHUZ ZAHID :: - 12-05-2017
Deshwasi jo thode bahoot aazade they ab wo bhi nahi rahenge......