जब बीजेपी सांसद हुकुम देव को एयरपोर्ट पर करना पड़ा अपमानजनक स्थितियों का सामना

मुद्दा , नई दिल्ली, मंगलवार , 21-08-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। बीजेपी में मनुवाद और ब्राह्मणवाद का वर्चस्व इतना बढ़ गया है कि पिछड़े और दलित समुदाय से आने वाले उसके सांसद भी इसकी चपेट में आने से नहीं बच पा रहे हैं। किसी छोटे और अनजाने नेता की बात तो दूर पार्टी के वरिष्ठ सांसद हुकुमदेव नारायण यादव तक को इसके चलते अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। बिहार से सांसद हुकुम देव 1 अप्रैल 2018 को पटना से दिल्ली आ रहे थे तभी एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान उन्हें उस समय अपमानजनक स्थितियों से गुजरना पड़ा जब चेकिंग करने वाले सुरक्षाकर्मी ने उनकी बनियान तक उतारने का फरमान जारी कर दिया। उसने जेब में रखी कलम को भी निकालने का निर्देश दिया। 

यादव के विनम्रता पूर्वक एतराज जताने पर उसने कहा कि ये सब उनकी ही सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। इस सिलसिले में यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा था। ये घटना 1 अप्रैल 2018 की है। और उन्होंने 2 अप्रैल को ये पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने फ्लाइट का विवरण देने के साथ ही सुरक्षाकर्मी को मिश्रा के नाम से संबोधित किया है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि उनके साथ कार्रवाई किसी जातिगत दुर्भावना से प्रेरित थी। अपनी पीड़ा को जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि सन 77 से वो सांसद हैं और लेकिन इसके पहले उन्हें कभी इस तरह की स्थितियों से नहीं गुजरना पड़ा। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने इस बात की भी आशंका व्यक्त कर दी है कि शायद ही मामले में कोई कार्रवाई हो सके।

हुकुम का पत्र।

उल्टा उन्हें ही दोषी ठहराये जाने का प्रयास किया जाएगा। अभी जबकि इस घटना को चार महीने बीत गए हैं अभी तक किसी तरह की कार्रवाई की कोई रिपोर्ट नहीं आयी है। ऐसे में समझा जा सकता है कि पिछड़े समुदाय से आने वाले एक नेता जिनका कि एक इतिहास रहा है। अगर बीजेपी के भीतर उनका भी सम्मान सुरक्षित नहीं है तो बाकियों की क्या हालत होगी। बताया तो यहां तक जाता है कि दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदाय से आने वाले ज्यादातर नेताओं को दोयम दर्जे का समझा जाता है। और उनके साथ उसी तरह से व्यवहार भी किया जाता है।

इसी तरह की एक घटना महाराष्ट्र के नंदुरबार से बीजेपी सांसद डॉ. हीना गावित जो आदिवासी समुदाय से आती हैं, के साथ घटी थी। जब वो किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गयी थीं। और उस कार्यक्रम में पार्टी के दूसरे एमएलए भी गए थे। लेकिन उनको नहीं परेशान किया गया। 100-150 की संख्या में लोग अचानक गावित पर हमला बोल दिए। जिसमें उनकी गाड़ी तक को पलटने की कोशिश की गयी।

उन्होंने इस मसले को लोकसभा में भी उठाया। लेकिन स्पीकर की तरफ से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं हुई। घटना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उस समय मौके पर चार कांस्टेबल मौजूद थे लेकिन वो सब मूकदर्शक बने रहे। उनका कहना था कि अगर उनके समर्थक उन्हें गाड़ी से समय से नहीं खींचते तो कार के पलटने पर उनके उसके नीचे आने का खतरा था। जिससे उनकी मौत भी हो सकती थी।

 

https://www.youtube.com/watch?v=2J18By0jsnU










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Ram Sharan Joshi :: - 08-23-2018
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