पूनम से पहले भी बीजेपी नेताओं के कई बार बिगड़े हैं बोल

ज़रा सोचिए... , नई दिल्ली, बुधवार , 14-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

मुंबई मार्च में शामिल हुए महाराष्ट्र के गरीब किसान महिला-पुरुषों की तस्वीरों ने मायानगरी कही जाने वाले मुंबई के लोगों को झकझोर कर रख दिया लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सांसद पूनम महाजन ने कह डाला कि प्रदर्शन कर रहे लोग किसान नहीं शहरी माओवादी हैं।

स्वामीनाथन आयोग की सिफारशें लागू करने और फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने का वादा करने वाली भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की किसानों को लेकर इस तरह की टिप्पणी पहली बार नहीं है। यहां तक कि किसानों की आत्महत्या की घटनाओं को लेकर भी बीजेपी सरकार के मंत्री अमर्यादित टिप्पणियां कर चुके हैं। गूगल पर सर्च करेंगे तो ऐसे बयानों का पूरा सिलसिला सामने आ जाएगा। ऐसे कुछ बयानों को याद करते हैं।

24 जुलाई 2015 को केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने किसानों की आत्महत्या को लेकर राज्यसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में कहा, 'नैशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक, किसानों की आत्महत्या की वजह उनकी पारिवारिक समस्याएं, बीमारी, ड्रग्स, दहेज, प्रेम संबंध और नामर्दी है।' यह जरूर है कि उन्होंने किसानों की आत्महत्या की घटनाओं के पीछे आत्महत्या को भी एक वजह मानने से मना नहीं किया था। किसानों की आत्महत्या की वजह प्रेम सबंध और नामर्दी बताए जाने को लेकर तब खासा विवाद पैदा हुआ था।

मई 2015 में ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम में कहा था कि वे दिल्लीह के अपने आवास में पौधों की सिंचाई के लिए पेशाब का इस्ते माल करते हैं। तब अखबार में छपी खबर के गडकरी ने कहा था कि वे हर दिन करीब 50 लीटर पेशाब इक्ट्ठा करते हैं फिर इनका इस्तेमाल मेरे दिल्ली आवास में लगे पौधों को सींचने के लिए किया जाता है। उनके इस बयान का विडियो भी यूट्यब पर अपलोड कर दिया गया था।

मंत्री के इस बयान को सूखा प्रभावित किसानों की समस्या के मद्देनजर गैरजरूरी और संवेदनहीनता भी करार दिया गया था। प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब को लेकर भी केंद्रीय मंत्री गडकरी ने निराश किया था। उन्होंने कह दिया था कि किसान भगवान या सरकार पर भरोसा न करें। अपने भाग्यविधाता खुद बनें।

अप्रैल 2015 में हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने किसानों की आत्महत्या की घटनाओं को लेकर कहा था,  'जो सुसाइड करते हैं, वो कायर लोग होते हैं। यह अपराध होता है और सरकार ऐसे लोगों के साथ नहीं है।' बीजेपी विपक्ष में थी तो धनखड़ हरियाणा में स्वामीनाथन आयोग लागू किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन किया करते थे। मई 2015 में डबवाली में वे फसल बरबाद होने से दुखी किसानों के लिए मुआवजे के चैक बांटते हुए इन्हीं धनखड़ ने बतौर मंत्री कह डाला था कि उनका नाचने का मन हो रहा है। 

जून 2017 में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा था कि मध्य प्रदेश में किसी भी किसान ने कर्ज की वजह से आत्महत्या नहीं की। उनकी आत्महत्या की तमाम वजहें हो सकती हैं। वे निजी समस्या और डिप्रेशन की वजह से भी आत्महत्या कर सकते हैं। इससे पहले मध्य प्रदेश में पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत पर उन्होंने एक चैनल से बातचीत में कहा था, “यह आपको बड़ा लग रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश एक बहुत बड़ा राज्य है। तीन-चार जिलों में घटना घट जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है।’

मध्य प्रदेश के ही ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने एक किसान की आत्महत्या को लेकर पत्रकारों के सवाल के जवाब में कह दिया था कि किसान ने बवासीर और अल्सर जैसी बीमारी के कारण जान दी। इसी मंत्री का पिछले महीने यह बयान सुर्खियों में रहा कि केवल किसानों की ही मौत पर इतना बवाल क्यों होता है। मेरे सामने 10 विधायकों की मौत हो चुकी है। क्या हम लोगों में कोई तनाव नहीं रहता है? किसी विधायक को ब्रेन हेमरेज हो जाता है तो किसी की अन्य कारणों से मृत्यु हो जाती है। हम लोग इतनी यात्राएं करते हैं, दौरे करते हैं, हमारा जीवन हमेशा खतरे में रहता है।

फरवरी 2017 में मध्य  प्रदेश के भाजपा विधायक रामेश्वेर शर्मा ने एक कार्यक्रम के दौरान यह कहकर चौंकाया था कि वे किसान मरे हैं जो काम कम और सब्सिडी चाटने का व्याशपार ज्या्दा करते हैं।

फरवरी 2016 में भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी ने महाराष्ट्र के बोरिवली में एक कार्यक्रम में जो कहा था, उसकी कुछ पंक्तियां इस तरह थीं, "किसानों में आजकल आत्महत्या करने का फैशन चल पड़ा है। एक ट्रेंड चल रहा है। मुआवजे के लिए किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मुआवजे को लेकर भी विभिन्न राज्यों में प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस किसान आत्महत्या रोकने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इसमें काफी समय लगेगा। एक दिन में किसान आत्महत्या नहीं थमेगी।" शेट्टी ने दो दिन बाद अपने इस बयान को लेकर माफी भी मांग ली थी।

राजस्थान सरकार के मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने भी विधानसभा में झुंझला कर कह दिया था कि कोई खुद पेड़ से लटक जाए तो इसमें सरकार क्या करे।

ऐसे संवेदनहीन और आपत्तिजनक बयानों का सिलसिला अंतहीन है और दूसरी पार्टियों के नेताओं का रवैया भी निराशाजनक रहता आया है। लेकिन भाजपा नेता किसानों को समस्याओं से निपटने के लिए हनुमान चालीसा का जाप करने और हवन करने जैसे सलाहें देने से भी नहीं चूक रहे हैं।

 










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