चंद्रशेखर की रिहाई के लिए फिर उठी आवाज, जिग्नेश ने कहा-गुजरात मॉडल से भी घटिया है योगी मॉडल

इंसाफ की मांग , मेरठ/नई दिल्ली, मंगलवार , 13-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

मेरठ/नई दिल्ली। गुजरात के निर्दलीय विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर रावण की तत्काल रिहाई की मांग की है। वो मेरठ की कमिश्नरी के बाहर चौधरी चरण सिंह पार्क में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब तक चंद्रशेखर की रिहाई नहीं हो जाती देश के युवा यूपी की योगी सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे। इस मौके पर मेवानी ने कहा कि दलित-मुस्लिम एकता के जरिए बीजेपी को शिकस्त दी जा सकती है। जितना संविधान को खतरा आज है उतना कभी नहीं था। उन्होंने कहा कि दलितों और मुसलमानों को समझने की जरूरत है अगर वे दोनों एक हो जाएं, तब न तो योगी यूपी के सीएम फिर से बनेंगे और न 2019 में मोदी देश के पीएम बन पाएंगे। 

मेवानी ने युवाओं से अपील की है अगर एक अप्रैल तक चंद्रशेखर को रिहा नहीं किया जाता है, तो 14 अप्रैल को सीएम योगी के काफिले को रोकने के साथ ही आंबेडकर की प्रतिमा को हाथ मत लगाने दें।

इस सभा में कई दूसरे दलित नेताओं ने भी शिरकत की। यहां पर मेवानी ने कासगंज हिंसा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कासगंज के दंगे में 80 फीसद से ज्यादा बेगुनाह दलित, अति पिछड़े और मुस्लिमों को गिरफ्तार किया किया। अगर यहां ऐसा चलता है, फिर तो गुजरात मॉडल से घटिया योगी मॉडल है। मेवानी ने इस दौरान कहा कि यूपी में रहना होगा, तो योगी-योगी कहना होगा के नारे लगाने वालों सुन लो, चंद दिन बाद योगीजी अगर तुम्हें भी यूपी में रहना होगा, तो संविधान-संविधान कहना होगा। 

सभा में मौजूद लोग।

उहोंने आरोप लगाया कि मंहगाई, भ्रष्टाचार और किसानों की आत्महत्या जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए गाय माता की बात की जाती है। जब आम आदमी रोटी, कपड़ा और मकान की बात करता है, तब केंद्र की सरकार घर वापसी, लव जिहाद का मुद्दा उछालती है। जिग्नेश ने पीएम से अपील की है कि सबको छोड़ दें और सिर्फ बीजेपी, आरएसएस और एबीवीपी के बेरोजगार लोगों को ही रोजगार दिला दें।

मेवानी ने कहा कि 'चार साल में आठ करोड़ रोजगार देने थे, आठ हजार को भी नहीं दे पाए। पाक से मोदी का मैच फिक्स है। दोनों देश जनता का ध्यान भटकाने के लिए तनाव पैदा करने का दिखावा करते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो चलो हमला करो।' 

सभा को उत्तर प्रदेश के पूर्व आईजीपी एसआऱ दारापुरी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कासगंज दौरे से लौटने के बाद अपना अनुभव बताया। उनका कहना था कि बीजेपी ने प्रायोजित तरीके से मुसलमानों को निशाना बनाया है। दारापुरी ने कहा कि चंद्रशेखर की रिहाई न केवल दलित समुदाय की बल्कि लोकतंत्र पसंद हर व्यक्ति की पहली प्राथमिकता बन जानी चाहिए। इस मौके पर इलाहाबाद में दिनदहाड़े हुई एक दलित छात्र की हत्या की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गयी।

https://www.youtube.com/watch?v=yLux_Nw9zQo&feature=youtu.be






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