आदिवासियों के पत्थलगड़ी अभियान के खिलाफ बीजेपी ने खोला मोर्चा, प्रबल जूदेव ने बुलाई महापंचायत

कार्यक्रम , , रविवार , 03-06-2018


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तामेश्वर सिन्हा

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में शुरू हुई पत्थलगड़ी अभियान के विरुद्ध जशपुर जिले के कलिया गांव में आज रविवार को महापंचायत है। यह महापंचायत आदिवासियों के सांस्कृतिक, संवैधानिक पत्थलगड़ी अभियान का विरोध कर रहे जशपुर राजपरिवार के प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और भाजपा,हिन्दू संगठनों के पदाधिकारियों ने बुलाया है।कलिया गांव छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले अन्तर्गत आता है जहां आदिवासी लगातार पत्थलगड़ी अभियान में भाग ले रहे है । पत्थलगड़ी को कुचलने के लिए राज्य सरकार आदिवासियों पर लगातार दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। 

28 अप्रैल को आदिवासियों के पत्थलगड़ी करने को लेकर भाजपा,आरएसएस के एकजुटता से ऑपरेशन घरवापसी के नाम से भाजपा पदाधिकारी और प्रबल जूदेव ने सद्भावना यात्रा निकाली थी, जिसमें सद्भावना यात्रा निकाल रहे हिंदूवादी और भाजपा समर्थित लोगों के द्वारा आदिवासियों के पत्थलगड़ी को तोड़ दिया गया था।

इतना ही नहीं पत्थलगड़ी को तोड़ने के बाद पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासी सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर आन्दोलनरत हो गए थे। लेकिन पुलिस ने उल्टे आदिवासियों को ही जेल में डाल दिया। 

  • पत्थलगड़ी को लेकर राजनीतिक बयानबाजियों के बीच प्रबल जूदेव और हिन्दूवादी संगठनों ने आदिवासियों के संवैधानिक,सांस्कृतिक अभियान पत्थलगड़ी को धर्मांतरण, नक्सलवाद, देशद्रोही बताया था। इस बयान से पत्थलगड़ी हुए गांवों और प्रदेश में आदिवासी बुद्दिजीवी वर्ग  में काफी रोष व्याप्त था तथा प्रदेश में तनावपूर्ण माहौल निर्मित हो गया था। ठीक उसी समय भाजपा,हिन्दू संगठन और राजपरिवार द्वारा सद्भावना यात्रा निकाली गई।
  • सरकार और प्रशासनिक अमले को अंदेशा था की यह यात्रा हिंसक रूप ले सकती है बावजूद इसके प्रशासन ने यात्रा की अनुमति दी थी और यात्रा हिंसक रूप लेते हुए उपद्रवियों ने पत्थलगड़ी को तोड़ते हुए एक दर्जन आदिवासियों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया था।
  • आदिवासियों ने जब इसका विरोध किया तो धार्मिक उन्माद फैलाने के नाम पर एक दर्जन से ज्यादा आदिवासियों को जेल में डाल दिया गया। यात्रा के दौरान जिस गांव में हिंसक रूप लेते हुए पत्थलगड़ी को तोड़ा गया गया था, उसी पास के गांव कलिया में फिर से राजपरिवार के प्रबल जूदेव अथवा भाजपा पार्टी के पदाधिकारियों ने पत्थलगड़ी के विरोध में महापंचायत बुलाया है। आशंका जताई जा रही है कि फिर से  कोई हिंसक या उपद्रवी घटना को अंजाम दिया जा सकता है।
  • जशपुर प्रशासन फिर एक बार असावधानी बरतते हुए भाजपा और राजपरिवार के लोगों को खुली छुट देकर हिंसक तौर-तरीकों को आमंत्रित कर रही है। राजपरिवार और भाजपा के पत्थलगड़ी कार्यक्रम पर प्रशासन का अब तक कोई नियंत्रण नहीं है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रबल प्रताप जूदेव ने द्वार खुला पत्र लिखते हुए कहा है कि पुरखों के द्वारा वर्षो से सहेजी गई संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए अब एकजुट होने के वक़्त आ गया है इसलिए अभी सनातन हिन्दू वनवासियों को महापंचायत में शामिल होना चाहिए । उन्होंने पत्र में लिखा है कि इस महापंचायत में पत्थलगड़ी जैसे समाज को विध्वंशक रास्ते पर ले जाने वाली परम्परा से निपटने  के लिए ठोस नीति बनाई जाएगी और वनवासी एकता पर बल दिया जाएगा। 

छत्तीसगढ़ मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा था कि प्रदेश के जशपुर जिले में पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी एच.पी. किंडो और ओ.एन.जी.सी से सेवानिवृत अधिकारी जोसफ मिंज समेत आदिवासी बुद्धिजीवियों और ग्रामीण कार्यकर्ताओं की धारा 149, 153सी, 505 (1)(सी), 120बी में गिरफ्तारी की भी छत्तीसगढ़ लोक स्वातंत्र्य संगठन कड़ी निंदा करता है।

जब जशपुर के गांव बच्छरांव में ग्रामीणों ने पांचवी अनुसूची एवं संविधान के अंतर्गत अपनी पारंपरिक एवं संवैधानिक अधिकारों की, तथा अपने जल-जंगल-ज़मीन को बचाने की घोषणा की, तो उनपर प्रबल जूदेव के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सांप्रदायिक माहौल पैदा कर हमला किया, उनकी पिटाई की। अंततः इन्हीं के समर्थन में राज्य पुलिस ने एक छद्म मुकद्दमा दर्ज किया है, ऐसी कार्यवाही वास्तव में अनुसूचित जनजाति पर अत्याचार की श्रेणी में आता है और कानून का सरासर दुरूपयोग है।

छत्तीसगढ़ पीयूसीएल, “सर्व आदिवासी समाज” और “छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन” जैसे प्रदेश के अन्य लोकतान्त्रिक संगठनों के साथ, इस कार्यवाही की कड़ी निंदा करता है और इस द्वेष भावना से प्रेरित फर्जी मुकद्दमे को तुरंत वापस लिए जाने की मांग की थी। 

आप को यह भी बताते चले कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासी समाज पत्थलगड़ी को लेकर भाजपा सरकार द्वारा गलत व्याख्या और जशपुर राजपरिवार द्वारा सद्भावना यात्रा के दौरान आदिवासियों से मारपीट कर संवैधानिक पत्थलगड़ी को तोड़ने को लेकर अब तक गुस्से में है और लगातार आंदोलन कर सरकार को चेतावनी दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पत्थलगड़ी वाले गांव में भाजपा हिन्दू समर्थित संगठन फिर से एक बार विरोध करने जा रहे हैं। बहरहाल आदिवासियों के सांस्कृतिक पत्थलगड़ी को सरकार धर्मान्तरण बता रही है। 

 










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Deena Masram :: - 06-04-2018
पत्थलगडी हमारी पारम्परिक औऱ संवैधानिक अधिकार है , जुदेव फालतू मे गुन्डागर्दी कर रहा है ,हम वनवासी नहीं मुलनिवासी आदिवासी हैं ,हमारी जल ,जंगल औऱ जमीन को ऐसे ही लोग मनुवादी सोच विचार के लोग हैं जो हम आदिवासियों की अधिकार कि हनन कर रहे हैं ।

Pyare saiyam :: - 06-03-2018
बहामण समझ किया रखे है आदिवासियो को इनका राज्य नही चलेगा ये मुलनिवासियो की राज्य है आपना घर आपना जमीन और कोई का नही