छत्तीसगढ़ में कानून नहीं, चलता है पुलिस का राज; पंद्रह दिन से 14 आदिवासी थाने में बंद

ग्राउंड रिपोर्ट , , बुधवार , 13-06-2018


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तामेश्वर सिन्हा

छत्तीसगढ़/नारायणपुर। सौ किमी दूर चल कर कोई अपने बेटे को छुड़ाने आया है तो कोई अपने पति को, यह नजारा बस्तर का है, जहां रोज भोले-भाले आदिवासियों को नक्सली बता कर जेल भेज दिया जाता है। आदिवासियों को नक्सली बता कर फर्जी आत्मसमर्पण दिखाया जाता है। फर्जी मुठभेड़ कर हत्या कर दिया जाता है। नक्सल उन्मूलन के नाम पर गस्त पर निकली पुलिस ने खेती कर रहे आदिवासियों को नक्सली होने के आरोप में पुलिस मुख्यालय नारायणपुर ले आई है, परिजन अपनों को ढूंढते-ढूंढते जिला मुख्यालय तक आए। राशन-पानी लेकर पिछले एक सप्ताह से जिला मुख्यालय आकर वे अपने परिजनों को पुलिस हिरासत से छुड़ाने में लगे हैं।कोई दुधमुंहे बच्चे को लेकर आई है, तो कोई बुजुर्ग अपने बेटे को छुड़ाना चाहती है। ये सरकारी दमनात्मक आत्याचार स्वतंत्र भारत में आदिवासियों के साथ हो रहा है।छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अन्तर्गत नारायणपुर जिले के आदिवासियों के साथ होने वाली यह रोज की कहानी है। नारायणपुर जिले में ही अबूझमाड़ का 70 प्रतिशत हिस्सा आता है। जहां अबुझमाड़िया जनजाति के लोग बसते हैं, जो अब प्राय: विलुप्त होने के कगार पर आकर खड़े हो गए हैं। 

ताजा मामला नारायणपुर जिला ओरछा ब्लाक अन्तर्गत अबूझमाड़ क्षेत्र के कोडोली ग्राम पंचायत के मुसनार गांव का है। जहां खेती के काम में लगे 14 ग्रामीण आदिवासियों को गस्त पर निकली पुलिस ने नक्सली बोल के उठा लिया है और नारायणपुर पुलिस मुख्यालय में रखा है। परिजन नारायणपुर जिला मुख्यालय पहुंच कर ग्रामीणों को छोड़ने की मांग कर रहे हैं । 

परिजनों ने बताया कि एक सप्ताह पहले पुलिस वाले गस्त पर आए थे, जहां उनके पति/बेटे खेत में हल चला रहे थे। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। मुसनार की एक महिला ग्रामीण बताती है कि जब उसके पति को पुलिस वाले पकड़े तो उनका पीछा करते हुए कडेनार कैम्प जो ओरछा ब्लाक में स्थित है, साथ में आई जहां उनके सामने ही उन्हें बैठा कर नारायणपुर लाया गया। परिजनों ने बताया कि वह एक सप्ताह से गांव से राशन-पानी लेकर नारायणपुर आए हुए हैं, और रोजाना थाना जाकर परिजनों से मिलने की गुहार पुलिस अफसरों से लगाते हैं लेकिन उनको मिलने नहीं दिया जाता है। ग्रामीण फिर थक-हार कर कहीं रुक कर रात बिताते हैं और सुबह फिर से थाना जाते हैं। पुलिस ने ग्रामीणों के आधार कार्ड को भी उनके परिजनों से छीन लिया है। 

अपने दो दुंधमुहे बच्चों के साथ कुंती मंडावी

पुलिस-नक्सली के दो पाटों में पिसते आदिवासी 

न्याय की गुहार लेकर मुसनार से आई कुंती मंडावी बताती हैं कि उनकी शादी 4 साल पहले हुई है, उन्होंने नाबालिग रहते हुए भी शादी किया क्योंकि शादी से पहले नक्सली लोग उन्हें अपने साथ आने को कहते थे जिसके डर से उन्होंने जल्दी शादी कर ली। उनके 2 लड़के और 2 लड़की है। जिसमें दो तो दुधमुंहे बच्चे हैं। आज उनके पति को पुलिस उठा कर ले आई है, उनके ससुर को भी पुलिस ने उठा लिया है, घर में कोई पुरुष बचा ही नहीं है । ठीक वैसे ही मालती मंडावी बताती हैं कि उनके पति सखरू नेताम और उनके दो बेटे रामू, रिके को पुलिस ने उठा लिया है, उनके घर में भी कोई पुरुष नहीं बचा है। पुलिस और नक्सल की लड़ाई में आदिवासियों की एक पीढ़ी ही समाप्ति के कगार पर आ कर खड़ी हो गई है, जहां सरकार प्रायोजित सरकारी हिंसा को अंजाम देने में लगी है तो वही अपना अस्तित्व बचाने के नक्सलियों की लड़ाई में आदिवासी पिस रहे हैं । 

मुसनार से पुलिस द्वारा उठाए ग्रामीणों के नाम  

1- फूल सिंह कोर्राम पिता मूर्रा कोर्राम 

2- आयतु पिता मंगलु

3- बैसाखु पिता मंगलु

4- लक्ष्मण पिता आयतु

5- सुखदेव पिता जयराम

6- सखरू नेताम पिता सिंगलु 

7- रसिया मंडावी पत्नी मलाती

8- रामु पिता रसिया

9-रिके पिता रसिया

10- सुखरू पिता चमरू 

11- बदरू पिता गैंडो 

12- बुधु पिता पांडु

13- बुधराम पिता मासो

14-डोंडा पिता सहदेव 

पुलिस ग्रामीणों को न्यायालय में पेश नहीं करती 

आप को बता दें कि पुलिस गांव से उठाए ग्रामीणों को 24 घन्टे के अंदर न्यायालय में पेश नहीं करती है बल्कि 15 से ज्यादा दिनों तक रखने के बाद मीडिया के सामने पूरे ताम-झाम के साथ कभी समर्पण दिखाया जाता है तो कभी गिरफ्तारी दिखा दिया जाता है, और वहीं निर्दोष पकड़े गए ग्रामीणों को कभी मुठभेड़ में मार गिराने का दावा भी किया जाता है । नक़्सल उन्मूलन के नाम पर आदिवासियों का नरसंहार निरन्तर जारी है, यह एक नारायणपुर जिले की बात नहीं है, पूरे बस्तर में ऐसे सैकड़ों से ज्यादा मामले रोज देखने को मिलेंगे। बहरहाल मुसनार के ये आदिवासी ग्रामीण परिजन अब भी नारायणपुर में डटे हुए हैं और जब तक उनके अपनों को पुलिस नहीं छोड़ेगी गांव नहीं लौटने की बात कह रहे हैं । 

 






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Rupsing korram :: - 06-15-2018
Or yeah Atyachar police ki aur se abhi se nahi kintu Bahut pehle se chalta aa raha hai ISI sudharo Varna achha nahi hoga

Rupsing korram :: - 06-15-2018
Or yeah Atyachar police ki aur se abhi se nahi kintu Bahut pehle se chalta aa raha hai ISI sudharo Varna achha nahi hoga

Rupsing korram :: - 06-15-2018
Yeh Sab ho kya raha hai pura adivasi Humko Naksha Lekar aap se pareshan karte hain aur dusra sabse police Swatantra Bharat Desh Mein Aisa nahi hona chahiye

dilip gond :: - 06-13-2018
Ye to bahut jyada aadiwasiyo par jyaditi hai