झूठ की खेती और खालिस वादों पर चित्रकूट का हथौड़ा

राजनीति , , सोमवार , 13-11-2017


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अखिलेश अखिल

कहते हैं राजनीति का कोई भरोसा नहीं होता। कब, कहां और कैसी करवट ले ले उसको बता पाना बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के वश में भी नहीं होता है। सत्ता के आसमान पर चमकते नेताओं के सूरज को कब ये जमीन दिखा दे इसका कोई अनुमान नहीं लगा सकता है। कई बार इसको साधने की कोशिश में बड़े-बड़े नेता खुद सध जाते हैं। और फिर राजनीति के एक ऐसे बियाबान में पहुंच जाते हैं जहां से लौटना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी मध्यप्रदेश में दोहराती दिख रही है। अमेरिका की सड़कों से अपने सूबे की सड़कों को अच्छा बताने वाले एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज को चित्रकूट ने उनकी असली जमीन दिखा दी है। भाजपा ने इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। लेकिन कुछ भी काम नहीं आया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 29 सभाएं, 11 रोड शो किए और तीन दिन चित्रकूट में रुके। लोगों के सामने मिन्नतें  कीं, विकास की गंगा बहाने का वादा किया, लेकिन सफल नहीं हुए।  

सीएम शिवराज  जिस तुर्रा गांव में आदिवासी के घर रुके, उसी गांव से भाजपा हार गई। लोगों ने शिवराज को नकार दिया।  भाजपा इस सीट को इतनी अहम मान रही थी कि उसने मैदान में 29 मंत्री समेत संगठन के तमाम दिग्गज नेताओं की फौज उतार दी थी। खुद उत्तरप्रदेश के ओबीसी चेहरा व डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य रोड शो में उतरे, लेकिन इनका भी जादू नहीं चला। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी चुनाव प्रचार के लिए आए थे। भाजपा नेताओं ने 750 से ज्यादा सभाएं भी कीं पर वो जनता के दिल में नहीं उतर पाए।

प्रदेश का हर बड़ा चेहरा था चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव मैदान में। भाजपा प्रत्याशी शंकरदयाल त्रिपाठी के लिए वोट मांगने का काम संगठन के अलावा संघ के बड़े पदाधिकारियों ने भी किया था। प्रदेशस्तर का हर बड़ा नेता, मंत्री पोलिंग बूथ स्तर से लेकर ग्राम प्रभारी, संकुल स्तर पर केन्द्र प्रभारी, विधानसभा प्रभारी, चुनाव प्रभारियों पर नजर रखे हुए था। मंत्री रातभर कैंपन करते रहे, लेकिन इसके बाद भी भाजपा हार गई।

योजनाओं की दुहाई, विकास की बात कुछ भी काम नहीं आया। उपचुनाव में भाजपा ने प्रत्याशी को पीछे तथा प्रदेश व केन्द्र की योजनाओं को आगे रखा था। कहीं स्टार प्रचारक योजनाओं की दुहाई देकर चित्रकूट के विकास की बात करते नजर आए तो वहीं भाजपा संगठन सशक्त चित्रकूट बनाने तथा चित्रकूट का समुचित विकास करने का संकल्प भी दोहराया। पिछड़ेपन एवं कुपोषण से जूझ रहे चित्रकूटवासियों को  यह बात भी समझ में नहीं आई।

  • कोई तरकीब काम नहीं आयी
  • चित्रकूट ने दिया शिवराज को सबक

चित्रकूट का वर्णन रामायण काल से ही लोग सुनते आ रहे हैं। इसी चित्रकूट के घाट पर तुलसीदास और भगवान राम की मुलाक़ात की बात भी सामने आती है। चित्रकूट मिलन  केंद्र है।  आस्था स्थली है।  त्याग की भूमि है और राम-रामायण का केंद्र भी। लेकिन आज का चित्रकूट दरिद्रता, लूट और शोषण का केंद्र बना हुआ है। यह पलामू और कालाहांडी से कम नहीं।  आजादी के बाद ना जाने कितनी  सरकारें बनीं और आयी गयीं लेकिन चित्रकूट की दशा नहीं बदली। 15 साल से शिवराज जमे हैं, यूपी में योगी जी जमे हैं लेकिन चित्रकूट उखड़ गया। बर्बाद हो गया। ऐसे में बर्वाद होते चित्रकूट की जनता अब करे भी तो क्या क्या ? जो उसके बस में था उसने कर दिया। वादों की राजनीति पर हमला किया और झूठी भक्ति को तलांजलि दे दी। योगी जी को भी सबक सिखाया और शिवराज को भी आंख दिखाया। 

आगे की राजनीति देखी जायेगी यही समझकर चित्रकूट ने अपना फैसला सुनाया है। कुछ लोगों के लिए चित्रकूट का यह फैसला कड़वा लग सकता है लेकिन आजिज जनता के पास चारा ही क्या होता है? शिवराज को सोचने और मंथन करने का मौक़ा मिला है। झूठ की खेती और वादों का झूठा संसार अब जनता नहीं सहेगी। चित्रकूट का सबक यही है। 

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)






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