सिटीजनशिप बिल को लेकर उत्तर-पूर्व में उबाल, बीजेपी के सहयोगियों ने भी खोला मोर्चा

मुद्दा , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 10-01-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। “द सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल 2019” को लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों का माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। मणिपुर के एक छात्र संगठन `द डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स अलायंस` ने चेतावनी दी है कि लोकसभा में पास हो चुका यह बिल राज्यसभा में भी पास हो जाता है तो पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के लिए अलग ``पॉलिटिकल ऑटोनोमी`` की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। मणिपुरी स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ) के एक नेता ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार ने पूर्वोत्तर के मूल निवासियों के खिलाफ युद्ध घोषित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, `द डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स अलायंस` के उपाध्यक्ष एन एडिशन ने कहा कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के मसले पर विभिन्न छात्र व नागरिक संगठनों का साथ लिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मूल निवासियों को खत्म कर देने के लिए लाया गया एक जहरीला बिल है। लोकसभा में इस बिल का पास होना पूर्वोत्तर के लोगों के लिए प्रलय के दिनों की गिनती शुरू हो जाने जैसा है। उन्होंने मणिपुर की भाजपा सरकार को लेकर भी सवाल खड़े किए।

एक क्षेत्रीय न्यूज वेबसाइट इनसाइड एनई के मुताबिक, डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बिद्युत गोगोई ने सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल 2019 को पूर्वोत्तर के मूल निवासियों की संस्कृति, भूमि अधिकार और इकॉनमी के लिए खतरा करार दिया है। उन्होंने ऐलान किया कि बिल के विरोध में यूनिवर्सिटी के छात्र कक्षाओं का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगे और किसी भी केंद्रीय मंत्री को यूनिवर्सिटी में घुसने नहीं देंगे।

उधर, त्रिपुरा के वेस्ट त्रिपुरा इलाकों में अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति है। बुधवार को इन इलाकों में और ज्य़ादा सख्ती बढ़ा दी गई है। 8 जनवरी को नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के आह्वान पर हुए पूर्वोत्तर बंद के दौरान वेस्ट त्रिपुरा के माधाबाड़ी व आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बल के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी और फायरिंग में छह लोग जख्मी हो गए थे। इस सिलसिले में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और तलाशी अभियान जारी है। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

 मेघालय की गारो हिल्स के एक संगठन `द एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेसी एंड एम्पॉवरमेंट (एडीई) ने 8 जनवरी के पूर्वोत्तर बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हिंसा को लेकर चिंता व्यक्त की है। एडीई के अध्यक्ष डालसेंद बी मोमीन ने असम और त्रिपुरा की घटनाओं को लेकर खासतौर से रोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर के लोगों के विश्वास को तोड़ा है। खासी स्टूडेंट यूनियन (केएसयू) और कई अन्य संगठनों ने भी रोष व्यक्त किया है। मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा पहले ही बिल को लेकर असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से इस्तीफे के मांग कर चुके हैं। भाजपा के साथ मिलकर मेघालय में सरकार चला रही एनपीपी को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। नागालैंड पब्लिक राइट्स अवेयरनेस एक्शन फोरम ने भी एनडीए पर नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया है।

पूर्वोत्तर में भाजपा के राजनीतिक अभियानों में बड़े मददगार व असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा तमाम विरोध प्रदर्शनों को दरकिनार करते हुए हिंदू-मुस्लिम वाली अपनी पुरानी लाइन पर बढ़ते नज़र आए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों का मसला सेक्युलरिज्म के बजाय धर्म के जरिये ही हल हो सकता है। गांधी और नेहरू के जमाने में भी भारत ने इन हिंदुओं का पक्ष लिया था। बिल का भाजपा को लाभ मिलेगा और हम पूर्वोत्तर में 25 में से 21 सीटें जीतेंगे। इससे पहले सरमा यह बयान भी दे चुके हैं कि बिल की बदौलत यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि असम जिन्ना की विचारधारा पर चलने वालों के हाथों में न जाए।

मणिपुर की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री एन बीरेन ने बुधवार को नागरिकों से सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल को लेकर पैनिक न होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि राज्य सरकार हमेशा केंद्र के निर्देश के अनुरूप ही चले। राज्य सरकार कभी भी नागरिकों की इच्छा के खिलाफ नहीं जाएगी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराष्ट्र के सोलापुर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि वे असम व पूर्वोत्तर के लोगों को यकीन दिलाते हैं कि सिटीजनशिप बिल पास होने से उनके अधिकारों को नुकसान नहीं होगा। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राज्यसभा में बोलते हुए असम व पूर्वोत्तर के लोगों को उनकी उम्मीदों और भावनाओं के मुताबिक, जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिलाया।

 

 








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